मैहर मेला क्षेत्र की यातायात व्यवस्था: केवल ‘जुर्माना’ समाधान नहीं, व्यापक नीति की आवश्यकता

मैहर में मां शारदा प्रबंध समिति और जिला प्रशासन द्वारा कलेक्टर की अध्यक्षता में यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए लिया गया हालिया निर्णय स्वागत योग्य है। प्रशासन की मंशा निश्चित रूप से क्षेत्र को जाम-मुक्त और सुव्यवस्थित बनाने की है। हालांकि, जमीनी हकीकत को देखे बिना केवल*जुर्माना लगाने* और *बैनर-बैरियर खड़े करने* से समस्या का समाधान होने के बजाय श्रद्धालुओं की परेशानी और अधिक बढ़ सकती है।यदि इस नीति को व्यावहारिक रूप नहीं दिया गया, तो यह निर्णय अनजाने में स्थानीय दलालों और असामाजिक तत्वों के लिए ‘वरदान’ साबित हो सकता है।नीचे प्रशासन और नीति-निर्माताओं के लिए कुछ गंभीर व्यावहारिक चुनौतियाँ और उनके *ठोस सुधारात्मक सुझाव* दिए गए हैं: 1. केवल जुर्माने से पैदा होने वाले खतरे (जमीनी हकीकत) *श्रद्धालुओं में भय और ठगी की आशंका:* बैरियर पार करने के बाद जब श्रद्धालु मेला क्षेत्र में प्रवेश करेंगे, तो दुकानदार और बिचौलिए उन्हें ‘प्रशासनिक जुर्माने का खौफ’ दिखाकर डरा सकते हैं। दलाल सुरक्षित पार्किंग का झांसा देकर प्रसाद के नाम पर मनमानी वसूली करेंगे और बाद में वाहन जब्त होने का डर दिखाकर ₹500 या उससे अधिक की अतिरिक्त ठगी को अंजाम दे सकते हैं। *सुरक्षा का गंभीर संकट (पुनरावृत्ति का डर):** वर्ष 2022 में मेला क्षेत्र में बेसहारा खड़े वाहनों में हुई आगजनी की घटना हम सभी के सामने है। यदि श्रद्धालु भयवश अपने वाहनों को असुरक्षित या लावारिस स्थानों पर छोड़ेंगे, तो न सिर्फ चोरी और आगजनी का खतरा बढ़ेगा, बल्कि दर्शन के दौरान भी उनका ध्यान माता के चरणों के बजाय अपने वाहन की सुरक्षा पर अटका रहेगा। *ई-रिक्शा और ऑटो की अनियंत्रित आवाजाही:* वर्तमान में मेला क्षेत्र में ई-रिक्शा और ऑटो की ‘धमाचौकड़ी’ यातायात को बदतर बना रही है। रोपवे तक निजी वाहनों और ऑटो का निर्बाध प्रवेश ही मुख्य जाम की जड़ है।2. अधिकारियों के लिए व्यावहारिक एवं सुधारात्मक सुझावयातायात व्यवस्था को “सकारात्मक और श्रद्धालु-हितैषी” बनाने के लिए प्रशासन को निम्नलिखित कदम उठाने की आवश्यकता है:* (क) ‘बंधा पार्किंग’ और ‘बड़ी पार्किंग’ का अनिवार्य उपयोगप्रशासन के पास पहले से ही निर्धारित पार्किंग स्थल मौजूद हैं, जो मेला के मुख्य दिनों के अलावा अमूमन खाली और अनुपयोगी पड़े रहते हैं।* सभी भारी और निजी चार पहिया वाहनों को ‘बंधा पार्किंग’ या अन्य निर्धारित बड़ी पार्किंग पर ही अनिवार्य रूप से रोक दिया जाए। रोपवे तक वाहनों के प्रवेश को पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाना चाहिए।* मेला क्षेत्र और पार्किंग ज़ोन के खाली स्थानों को ‘नो-पार्किंग’ घोषित कर वहां **CCTV कैमरों से निगरानी** की जाए। नो-पार्किंग ज़ोन में दलाली करने वाले या अवैध रूप से वाहन खड़े करवाने वाले दुकानदारों पर सीधे कानूनी कार्रवाई हो, न कि अनभिज्ञ श्रद्धालुओं पर।* डिजिटल डिस्प्ले: पार्किंग स्थलों पर खाली जगह (Slots) की जानकारी देने वाले डिजिटल बोर्ड लगाए जाएं ताकि पारदर्शिता बनी रहे।* (घ) किराया और शुल्कों का सार्वजनिक प्रकटीकरण (फ्लेक्स बोर्ड्स)* पूरे मेला क्षेत्र, बैरियर और पार्किंग स्थलों पर बड़े-बड़े फ्लेक्स बोर्ड लगाए जाएं, जिन पर **प्रसाद की औसत दरें, पार्किंग शुल्क और आधिकारिक हेल्पलाइन नंबर** साफ अक्षरों में लिखे हों। लाउडस्पीकर से लगातार घोषणा की जाए कि *”किसी भी दुकानदार या दलाल को पार्किंग के नाम पर अतिरिक्त राशि न दें।”** (ङ) सुरक्षा और अग्निशमन के पुख्ता इंतजाम* 2022 की आगजनी जैसी घटनाओं से सबक लेते हुए, सभी अधिकृत पार्किंग स्थलों पर*अग्निशमन यंत्र (Fire Extinguishers)**, पानी के टैंकर और सुरक्षा गार्डों की 24/7 तैनाती सुनिश्चित की जाए, ताकि श्रद्धालु निश्चिंत होकर दर्शन कर सकें।* मैहर कलेक्टर का निर्णय सराहनीय है, लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि प्रशासन ‘दंडात्मक रुख’ अपनाने के बजाय ‘प्रबंधकीय रुख’ कितना अपनाता है। जब तक अधिकृत पार्किंग को पूरी क्षमता से सक्रिय नहीं किया जाएगा और बिचौलियों पर लगाम नहीं कसी जाएगी, तब तक कागजी नियम जमीन पर अराजकता ही पैदा करेंगे। श्रद्धालुओं को भय नहीं, सुरक्षा और सुगमता का अहसास कराना प्रशासन की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।