3 साल बाद दुर्लभ संयोगः पितृ तर्पण के साथ मिलेगी शनि पीड़ा से मुक्ति

*इंदौर/संजय मौर्य/10 अक्टूबर को सर्वपितृमोक्ष और शनिश्चरी अमावस्या एक साथ, दान-पुण्य और शनि देव की आराधना का विशेष महत्व/इन दिनों पितृपक्ष पखवाड़ा चल रहा है। इसमें लोग निमित्त श्राद्धकर्म, तर्पण, पिंडदान कर रहे हैं। 10 अक्टूबर को सर्वपितृमोक्ष अमावस्या के साथ इस पखवाड़े का समापन हो जाएगा। इस बार इस दिन शनिश्चरी अमावस्या का संयोग भी बन रहा है। ऐसे में पितृदोष के साथ-साथ शनि पीड़ा से मुक्ति के लिए भी यह दिन विशेष शुभ होगा। वर्षों बाद इस तरह का संयोग बन रहा है। इसके पहले 14 अक्टूबर 2023 को भी इस तरह का संयोग बना था। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृपक्ष पखवाड़ा पितरों की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। मान्यता है कि इस पखवाड़े में पितर भूलोक पर रहते हैं। इसलिए पूरे पखवाड़े में दीक्षा की मृत्यु तिथि पर श्राद्धकर्म, तर्पण किए जाते हैं। जिन पितरों की श्राद्ध तिथि ज्ञात नहीं होती या किसी कारणवश निर्धारित तिथि पर श्राद्ध नहीं हो पाता, उनके निमित सर्वपितृ अमावस्या पर श्राद्ध करने की परंपरा है। इस दिन पितरों का स्मरण कर तर्पण करने और ब्राह्मण भोज, अन्न-वस्त्र दान का विधान बताया गया है।*शनिश्चरी अमावस्या पर शिप्रा नर्मदा संगम स्थल उज्जैनी में भीड़ रहेगी*इस बार सर्वपितृमोक्ष के साथ-साथ शनिश्चरी अमावस्या का संयोग भी बन रहा है। इस साल की एकमात्र शनिश्चरी अमावस्या होगी। जिस दिन अमावस्या तिथि शनिवार को आती है तो यह संयोग बनता है। पंडितों के अनुसार यह दिन शनिदेव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ होता है। श्रद्धालुओं शनि मंदिर में दर्शन कर तिल के तेल का दीपक अर्पित करेंगे तथा काले तिल, उड़द, वस्त्र और अन्न का दान करेंगे। मान्यता है कि सेवा, दान और संयम के साथ की गई शनि उपासना से साती, ढैया सहित शनि की महादशा, कष्टों में राहत मिलती है।