मिट्टी के ऐरावत पर विराजमान मां महालक्ष्मी की सुहागिनों ने की पूजा: सोलह श्रृंगार कर महिलाओ की सुख-समृद्धि और वैभव की कामना

नरेन्द्र राय रायसेन। महालक्ष्मी पूजन पर मिट्टी से बने गजलक्ष्मी की पूजा श्रद्धाभक्ती के माहौल में की। मिट्टी से बने एरावत हाथी को सनातन परंपरा में माना जाता है बुद्धि और विवेक का प्रतीक।सुख, समृद्धि और वैभव की कामना के लिए सोलह श्रृंगार कर शनिवार को दोपहर और शाम के वक्त सुहागिन महिलाओ मां महालक्ष्मी का व्रत एवं पूजन की ।शनिवार को रायसेन नगर और आसपास के ग्रामीण अंचलों में महालक्ष्मी व्रत हाथी पूजन श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ संपन्न हुआ। सुबह से ही महिलाओं ने स्नान कर नवीन वस्त्र धारण किए और परंपरा अनुसार मिट्टी का एरावत हाथी बनाकर उस पर माता लक्ष्मी का प्रतिष्ठापन किया। इसके बाद श्रृंगार सामग्री, फल, मिष्ठान और विविध तरह के व्यंजनों के साथ पूजन-अर्चन किया गया। क्वांर मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को होने वाले इस महालक्ष्मी व्रत को लेकर क्षेत्रभर में दिनभर धार्मिक माहौल बना रहा। सुहागिन महिलाओं ने पूरे उत्साह से व्रत धारण किया और परिवार की सुख-समृद्धि, खुशहाली,भोजन, वस्त्र और गृह वैभव की निरंतर प्राप्ति के लिए माता महालक्ष्मी से प्रार्थना की।धर्मशास्त्री पंडित ओमप्रकाश शुक्ला पंडित दुर्गा प्रसाद शर्मा के अनुसार कलियुग में दान का विशेष महत्व है मान्यता है कि इस व्रत से धन-वैभव और समृद्धि की प्राप्ति होती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार महाभारत काल में भी इसका उल्लेख मिलता है। एक अन्य प्रसंग में स्वयं भगवान विष्णु ने धन वृद्धि के लिए इसकी महिमा बताई थी। मान्यता यह भी है

कि कलियुग में दान का विशेष महत्व है और इस व्रत के दौरान किया गया दान सभी मनोरथ पूरे करता है। धार्मिक विधान के अनुसार पूजन के समय ब्राह्मण को बुलाकर कथा श्रवण कराना और दक्षिणा देना आवश्यक माना गया है। साथ ही गृहस्थ जीवन में सास-ससुर का सम्मान करने और सौहार्द बनाए रखने पर मां लक्ष्मी की कृपा निरंतर बनी रहती है। पंडित राम मोहन चतुर्वेदी ने आरती कर पूजन संपन्न कराया। पितृ पक्ष की अष्टमी तिथि को मां गजलक्ष्मी की पूजा की जाती है। इस दौरान सोलह की संख्या में गुड़ के मीठे पूए पकवान बनाए जाते हैं।वहीं इस पूजा में मां लक्ष्मी के श्रृंगार के लिए बेसन से गहने भी बनाए जाते हैं, जिससे पूजा के दौरान मां गजलक्ष्मी का श्रृंगार किया गया।वहीं इस व्रत में मिट्टी के ऐरावत हाथी पर विराजी मां गजलक्ष्मी की पूजा श्रृद्धाभक्ति के माहौल में की गई। जो हमें जीवन में धन के साथ-साथ बुद्धि, विवेक और विनम्रता बनाए रखने का संदेश देती है।कविता, पूजा शिक्षा, दीपिका और रोशनी का कहना है कि हाथी को सनातन परंपरा में बुद्धि और विवेक का प्रतीक माना गया है। ऐरावत स्वर्ग का सबसे दिव्य और वैभवशाली सफेद हाथी है। लेकिन मां महालक्ष्मी पूजा में उसे मिट्टी से बनाकर पूजा की जाती है। मिट्टी हमारी जड़ों और सादगी को दर्शाती है। मां गजलक्ष्मी का यह रूप संदेश देता है कि सकारात्मकता, पवित्र मन और शांत स्वभाव से मां लक्ष्मी के आशीर्वाद को प्राप्त किया जा सकता है।महालक्ष्मी व्रत के लिए मिट्टी के ऐरावत हाथी और मां गजलक्ष्मी की पूजा की जाती है। पूजा के बाद इस ऐरावत हाथी की प्रतिमा का विसर्जन कर दिया जाता है। जो हमें जीवन में कुछ भी स्थाई नहीं है इस बात की सीख देता है।