पूसा बासमती को जीआई टैग दिलाने की मांग: दिग्विजय सिंह बोले- केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान किसान के बेटे हैं, फिर भी धान को नहीं मिला दर्जाबाड़ी में किसानों के संवाद कार्यक्रम में उठी धान के उचित दाम और जीआई टैग की मांग, विधायक देवेंद्र पटेल बोले- कांग्रेस सरकार बनी तो किसानों को दिलाएंगे उनका हक, अधिकार

नरेन्द्र राय रायसेन रायसेन/बाड़ी। जिले के तहसील मुख्यालय बाड़ी स्थित अटवाल रिसॉर्ट में सोमवार दोपहर पूसा बासमती धान उत्पादक किसानों का संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह और सिलवानी विधायक एवं कांग्रेस जिला अध्यक्ष देवेंद्र पटेल शामिल हुए। सर्वदलीय बैठक में किसानों ने पूसा बासमती धान को जीआई टैग (भौगोलिक संकेतक) का दर्जा दिलाने, धान के उचित दाम सुनिश्चित करने और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की मांग उठाई। इस दौरान किसानों की समस्याओं और उनके आर्थिक हितों को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।जिले के तहसील मुख्यालय बाड़ी स्थित अटवाल रिसॉर्ट में सोमवार दोपहर पूसा बासमती धान उत्पादक किसानों का संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह और सिलवानी विधायक एवं कांग्रेस जिला अध्यक्ष देवेंद्र पटेल शामिल हुए। सर्वदलीय बैठक में किसानों ने पूसा बासमती धान को जीआई टैग (भौगोलिक संकेतक) का दर्जा दिलाने, धान के उचित दाम सुनिश्चित करने और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की मांग उठाई।

इस दौरान किसानों की समस्याओं और उनके आर्थिक हितों को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि रायसेन जिला कृषि प्रधान है और यहां करीब 80 प्रतिशत किसान खेती-किसानी से जुड़े हुए हैं। धान उत्पादन के मामले में भी जिला प्रदेश के अग्रणी क्षेत्रों में शामिल हो चुका है। इसके बावजूद यहां उत्पादित पूसा बासमती धान को अब तक जीआई टैग का दर्जा नहीं मिलना किसानों के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि केंद्र से लेकर प्रदेश और स्थानीय स्तर तक भाजपा की सरकारें हैं। इसके बावजूद किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए अपेक्षित कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।बंपर पैदावार के बाद भी किसानों को नहीं मिल रहे उचित दाम…पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने कहा कि किसान सालभर मेहनत कर धान की बंपर पैदावार करते हैं।लेकिन उन्हें हर साल उसकी धान उपज के वाजिब दाम नहीं मिल पाते। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि विदिशा संसदीय क्षेत्र से सांसद शिवराज सिंह चौहान को केंद्रीय कृषि मंत्री की जिम्मेदारी मिली है। वे स्वयं को किसान का बेटा बताते हैं, ऐसे में किसानों की धान को जीआई टैग का दर्जा दिलाने के लिए ठोस पहल क्यों नहीं की गई? उन्होंने कहा कि जीआई टैग मिलने से स्थानीय धान की विशिष्ट पहचान स्थापित करने और किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने की दिशा में मदद मिल सकती है।दिग्विजय सिंह ने आगे कहा कि किसान सालभर मेहनत कर धान की बंपर पैदावार करते हैं।लेकिन उन्हें हर साल उपज के वाजिब दाम नहीं मिल पाते। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो रहा है। उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि विदिशा संसदीय क्षेत्र से सांसद शिवराज सिंह चौहान को केंद्रीय कृषि मंत्री की जिम्मेदारी मिली है। वे स्वयं को किसान का बेटा बताते हैं, ऐसे में किसानों की धान को जीआई टैग का दर्जा दिलाने के लिए ठोस पहल क्यों नहीं की गई? उन्होंने कहा कि जीआई टैग मिलने से स्थानीय धान की विशिष्ट पहचान स्थापित करने और किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने की दिशा में मदद मिल सकती है।कांग्रेस सरकार बनी तो सबसे पहले जीआई टैग दिलाएंगे: देवेंद्र पटेल…

.सिलवानी बेगमगंज सीट के विधायक एवं कांग्रेस जिला अध्यक्ष देवेंद्र पटेल ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनाने में किसानों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। यदि भविष्य में मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनती है तो किसानों की धान को उचित मूल्य दिलाने और पूसा बासमती को जीआई टैग का दर्जा दिलाने के लिए प्राथमिकता से प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि किसानों की मेहनत का उचित मूल्य मिलना चाहिए और उनकी उपज को राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाने के लिए ठोस कदम उठाए जाने जरूरी हैं।कार्यक्रम में किसानों ने धान उत्पादन के दौरान आने वाली समस्याओं, बाजार में उचित मूल्य नहीं मिलने और जीआई टैग की आवश्यकता सहित विभिन्न मुद्दों पर अपने विचार रखे। बैठक में किसानों के हितों को लेकर सार्थक चर्चा हुई। इस अवसर पर कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता, पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में पूसा बासमती धान उत्पादक किसान मौजूद रहे।