गृह-गृह गायत्री महायज्ञ: 2400 के लक्ष्य के विरुद्ध 3700 घरों में संपन्न हुआ शिक्षा बैठक संपन्न

सुरज दहे बुरहानपुर:अखिल विश्व गायत्री परिवार बुरहानपुर द्वारा 20 सितंबर को आयोजित “गृह-गृह गायत्री महायज्ञ” की समीक्षा बैठक रविवार को गायत्री परिवार के रचनात्मक केंद्र, गोलोक धाम, खड़कोद में आयोजित की गई। बैठक में बुरहानपुर जिले के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित हुए। इस अवसर पर महायज्ञ में विशेष सहयोग प्रदान करने वाले कार्यकर्ताओं और प्रभारियों का गायत्री मंत्र अंकित दुपट्टे से स्वागत एवं सम्मान किया गया।लक्ष्य से बढ़कर 3700 घरों तक पहुँचा अभियानगायत्री परिवार के राजेंद्र शाह (राजु भाई शाह) ने बैठक की जानकारी देते हुए बताया कि गृह-गृह गायत्री महायज्ञ के लिए 2400 घरों में यज्ञ संपन्न कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, लेकिन कार्यकर्ताओं के अथक प्रयासों और समाज के व्यापक सहयोग से यह अभियान लक्ष्य से आगे बढ़ते हुए लगभग 3700 घरों तक पहुँचा। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति के दो प्रमुख आधार स्तंभ—

यज्ञ और गायत्री—के माध्यम से घर-घर सद्विचार एवं सत्कर्म की स्थापना का प्रयास इस अभियान के जरिए किया गया है।प्रयाज, याज और अनुयाज की समझाई गई अवधारणाकार्यक्रम की रूपरेखा को स्पष्ट करते हुए गायत्री परिवार के दीपक कापड़िया ने बताया कि इस पूरे अभियान को तीन चरणों—प्रयाज, याज और अनुयाज—में निर्धारित किया गया था।प्रयाज: इसके अंतर्गत कार्यक्रम की पूर्व तैयारी, जनसंपर्क एवं प्रचार-प्रसार किया जाता है।याज: इसमें मुख्य कार्यक्रम (यज्ञ) को संपन्न किया जाता है।अनुयाज: इसके माध्यम से कार्यक्रम के उद्देश्यों को निरंतर आगे बढ़ाया जाता है।दीपक कापड़िया ने आगे बताया कि जिन 3700 घरों में गायत्री यज्ञ संपन्न हुआ है, अब उन परिवारों में भारतीय सनातन संस्कृति के जीवन मूल्यों की स्थापना तथा प्रत्येक घर को ‘देव परिवार’ के रूप में विकसित करने का प्रयास ‘अनुयाज’ के अंतर्गत किया जाएगा। इसके लिए घर-घर गायत्री उपासना, बलिवैश्व यज्ञ, सत्साहित्य की स्थापना तथा परिवार प्रबोधन जैसे कार्यक्रमों को निरंतर आगे बढ़ाया जाएगा। यह महायज्ञ केवल एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि परिवारों में संस्कार, सद्विचार और सत्कर्म की निरंतर स्थापना का एक बड़ा अभियान है।प्रमुख वक्ताओं के विचारबैठक में गायत्री परिवार के वरिष्ठ वक्ताओं—

बृजेश भाई पटेल, मनोज भाई तिवारी, रामअवतार पोद्दार, पवन कुमार बंकाजी, पूर्णिमा पवार, मनोज चौरे और संजय राठौर—ने गृह-गृह गायत्री महायज्ञ और भव्य शोभायात्रा की महिमा का विस्तार से वर्णन किया। वक्ताओं ने कहा कि यज्ञ और गायत्री हमारी सनातन संस्कृति के मूल प्राण हैं, जिन्हें हर घर तक पहुँचाना हमारी साझी जिम्मेदारी है।गरिमामयी उपस्थितिइस अवसर पर प्रमुख रूप से दीपकभाई कपाड़िया, वसंत मोंढे, सुंदरलाल चौधरी, संजय राठौर, धर्मेश चौधरी, गायत्री पाटीदार, मेघराज महाजन, राजेश पटेल, सुरेश चौधरी, दिनेश सुगंधी, मनोज चौरे, विजय पेशवानी, पवन बांका, श्रीमती पुष्पा पोद्दार, रामेश्वरी सुगंधी सहित बड़ी संख्या में गायत्री परिवार के कार्यकर्ता और एरिया प्रभारी उपस्थित रहे। बैठक के अंत में सभी ने भारतीय संस्कृति की इस पावन धारा को जन-जन तक प्रसारित करने का दृढ़ संकल्प लिया