जिला शिक्षा केंद्र पहुंचने की राह में कीचड़ और पानी, परिसर में गाजर घास की भरमारपानी भरे गड्ढों में पनप रहा मच्छरों का लार्वा, कर्मचारियों को संक्रमण का डर; मत्स्य विभाग और जिला अस्पताल के रास्ते पर भी महीनेभर से बह रहा गंदा पानी

नरेन्द्र राय रायसेन रायसेन। जिला शिक्षा केंद्र कार्यालय तक पहुंचने की राह इन दिनों कर्मचारियों और आम लोगों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। बारिश के बाद जिला शिक्षा केंद्र कार्यालय तक जाने वाले रास्ते पर जगह-जगह गंदा पानी और कीचड़ जमा है। पानी निकासी की व्यवस्था नहीं होने से लोगों को इसी रास्ते से होकर कार्यालय पहुंचना पड़ रहा है। हालात यह हैं कि पैदल निकलने वालों को पानी और कीचड़ से बचकर रास्ता तय करना पड़ रहा है।जबकि दोपहिया वाहन चालकों को भी फिसलने का खतरा बना रहता है।जिला शिक्षा केंद्र परिसर के अंदर भी सफाई व्यवस्था बदहाल नजर आ रही है। दफ्तर परिसर में जगह-जगह गाजर घास और अन्य खरपतवार उग आए हैं। कई स्थानों पर गड्ढों में बारिश का पानी जमा है। लंबे समय से पानी जमा रहने के कारण इनमें मच्छरों का लार्वा पनपने की आशंका बनी हुई है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि जिम्मेदारों द्वारा समय रहते सफाई और पानी निकासी की व्यवस्था नहीं की गई तो मच्छरों की संख्या बढ़ सकती है और संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है।कार्यालय आने वालों को रोज परेशानी..

..जिला शिक्षा केंद्र जिला अस्पताल मत्स्य विभाग में प्रतिदिन कर्मचारी, शिक्षक आम लोगों और विभिन्न शैक्षणिक कार्यों से जुड़े लोग पहुंचते हैं। ऐसे में कार्यालय परिसर और मुख्य रास्ते की बदहाल स्थिति सीधे तौर पर आमजन और कर्मचारियों की परेशानी बढ़ा रही है। लोगों का कहना है कि कार्यालय परिसर में नियमित साफ-सफाई के साथ बारिश के पानी की निकासी के लिए स्थायी व्यवस्था की जरूरत है। केवल बारिश के दौरान सफाई कराने के बजाय पानी जमा होने वाले स्थानों को चिन्हित कर वहां जल निकासी की व्यवस्था की जानी चाहिए।प्रौढ़ साक्षरता शिक्षा केंद्र का रास्ता भी बदहाल….इसी क्षेत्र में स्थित प्रौढ़ साक्षरता शिक्षा केंद्र तक पहुंचने वाला रास्ता भी बारिश के कारण मुश्किल हो गया है। पानी और कीचड़ के कारण यहां आने-जाने वालों को परेशानी उठानी पड़ रही है। कर्मचारियों ने पूरे परिसर की सफाई कराने, गाजर घास हटाने और पानी निकासी की व्यवस्था कराने की मांग की है।मत्स्य विभाग और जिला अस्पताल पीडब्ल्यूडी के सामने भी समस्या…शहर में केवल जिला शिक्षा केंद्र ही नहीं, बल्कि सहायक संचालक मत्स्य विभाग, पीडब्ल्यूडी,जिला अस्पताल के मुख्य गेट और लोक निर्माण विभाग की ओर जाने वाले आम रास्ते पर भी जलभराव की समस्या बनी हुई है। स्थानीय लोगों के अनुसार इन स्थानों पर पिछले करीब एक महीने से पानी बह रहा है। इससे सड़क और आसपास के हिस्सों में कीचड़ फैल गया है।जिला अस्पताल के मुख्य गेट के आसपास कीचड़ और गंदगी की स्थिति से मरीजों और उनके परिजनों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है। वहीं मत्स्य विभाग परिसर के आसपास भी पानी जमा होने से लोगों को आवागमन में दिक्कत हो रही है।कॉलोनीवासियों का कहना है कि पानी लगातार बहने और जमा होने से रास्ता खराब हो रहा है।सफाई और निकासी की व्यवस्था की मांग..

.स्थानीय कर्मचारियों और रहवासियों ने संबंधित विभागों से जलभराव वाले स्थानों की तत्काल सफाई कराने, गाजर घास हटाने और जमा पानी की निकासी कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि बारिश के बाद जलभराव को नजरअंदाज करने के बजाय जिम्मेदार विभागों को नियमित निरीक्षण कर समस्या का स्थायी समाधान करना चाहिए, ताकि कार्यालयों में आने-जाने वाले कर्मचारियों और आम नागरिकों को परेशानी से राहत मिल सके।इनका कहना है….मैने डाइट प्राचार्य को दो तीन बार पूरे परिसर की साफ सफाई के लिए बोला था। क्योंकि परिसर डाइट के तहत आता है। साफ सफाई बेहद अनिवार्य है। जिम्मेदारी भी डाइट के अफसरों की है।प्रदीप चतुर्वेदी डीपीसी जिला शिक्षा केंद्र रायसेनबालक हाई स्कूल परिसर में भरा बारिश का पानी….हाईस्कूल परिसर में जलभराव, कीचड़ में चलकर विद्यार्थियों को जाना पड़ता है कक्षाओं तक सैकड़ों हैं विद्यार्थी स्कूल मेंरायसेन। शासकीय बालक हाई स्कूल पाटनदेव के भी बुरेहाल हैं। स्कूल आने जाने वाले रास्ते पर कीचड़ गंदगी की भरमार बनी हुई है। जिससे इसी कीचड़ दलदल भरे रास्ते से गुज़र कर रोजाना उनकी क्लासों तक जाना पड़ रहा है। स्कूल प्राचार्य को विद्यार्थियों ने कई बार शिकायतें की लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ता। जिससे छात्र बेहद परेशान हैं।शासकीय सांदीपनि हायर सेकेंडरी स्कूल परिसर में हल्की सी भी बारिश होने पर जल भराव की स्थिति निर्मित हो जाती है। ऐसी स्थिति में बच्चों को कक्षाओं तक पहुंचने के लिए कीचड़ से चलकर जाना पड़ता है। हालांकि विद्यालय प्रबंधन द्वारा वैकल्पिक तौर पर पेवर्स लगवाए गए हैं और काली गिट्टी बिछाई गई है, लेकिन विद्यालय का ग्राउंड नीचा होने के कारण जलभराव की स्थिति निर्मित हो जाती है। ठेकेदार त्रिशूल कंट्रक्शन कंपनी भोपाल द्वारा फिलहाल स्कूल भवन का अधूरा निर्माण कराया गया है। बाउंड्रीवल निर्माण होना बाकी है।साथ ही जल निकासी की भी पुख्ता व्यवस्थाएं नहीं हैं। उल्लेखनीय है कि सांदीपनि स्कूल अपने पुराने भवन में संचालित हो रहा था।यह स्थिति स्कूल भवन में काफी समय से निर्मित है। स्थिति यह है कि हल्की सी भी बारिश हो जाए तो विद्यालय के छात्रों को एक स्थान में खड़ा करके प्रेयर कराने की भी जगह नहीं है।विद्यालय के शिक्षकों ने बताया कि अगर विद्यालय के ग्राउंड में फिलिंग हो जाए या फिर पेवर्स लगवा दिए जाएं तो इस समस्या से निजात मिल सकती है। और न ही विद्यालय के ग्राउंड के विषय में कोई ठोस प्रबंध किए गए हैं। जो भी व्यवस्थाएं हो रही हैं, वह स्कूल प्रबंधन ही अपने लेवल पर कर रहा है।इनका कहना है…पानी निकासी की सही व्यवस्था न होने के कारण विद्यालय परिसर में जल भराव की स्थिति निर्मित हो रही है। इसके लिए कई बार विद्यालय स्तर पर गिट्टी काली चूरी और कक्षाओं तक विद्यार्थियों को पहुंचाने के लिए पेवर्स लगवाए गए हैं। अलग से विभाग और प्रशासन स्तर पर कोई व्यवस्था नहीं की गई है। एलएन प्राचार्य, सांदीपनि हासे स्कूल रायसेन —