आज से पितृपक्ष शुरू: मिश्र तालाब घाट पर गूंजे पितरों के मंत्र, सैकड़ों ने किया तर्पण, 20 दिन के श्रमदान से बदली घाटों की तस्वीर

नरेन्द्र राय रायसेन रायसेन।पितृपक्ष के साथ ही शहर में धार्मिक आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। शनिवार से शुरू हुए सोलह श्राद्ध के पहले दिन ऐतिहासिक मिश्र तालाब घाट पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ रही। सैकड़ों लोगों ने अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए जल से तर्पण किया।सुबह 6 बजे से ही श्रद्धालु मिश्र तालाब घाट पर पहुंचने लगे थे। पंडित राजेंद्र दुबे (सोमवारा) और पंडित अभिषेक चतुर्वेदी ने मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धालुओं से पितरों के निमित्त जल अर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म कराए। कई परिवार पूरे परिवार सहित अपने पितरों को याद करने पहुंचे। दोपहर तक घाटों पर तर्पण करने वालों का तांता लगा रहा।20 दिन के श्रमदान से बदली तस्वीर…इस बार मिश्र तालाब पर तर्पण करने आए लोगों को काफी राहत मिली। पिछले 20 दिनों से चल रहे विशेष श्रमदान और स्वच्छता अभियान के बाद घाटों की सूरत पूरी तरह बदल गई है।पहले मिश्र तालाब घाटों पर कचरे के ढेर लगे रहते थे और तालाब में जलकुंभी, कमल की जड़ें और हरी काई का जाल फैला था।

जिससे पानी में उतरना भी मुश्किल होता था। अब नगर पालिका, समाजसेवियों और युवाओं के संयुक्त प्रयास से जेसीबी और मजदूरों की मदद से जलकुंभी निकाली गई, कचरा हटाया गया और घाटों को व्यवस्थित किया गया।श्रद्धालुओं ने बताया कि पिछले साल तक बदबू और गंदगी के कारण तर्पण में काफी परेशानी होती थी, लेकिन इस बार साफ-सुथरे घाट और स्वच्छ पानी के कारण बिना किसी दिक्कत के तर्पण हो सका। जिला प्रशासन ने घाटों पर सुरक्षा और लाइट की व्यवस्था भी की है।16 दिन तक उमड़ेगी भीड़…पंडितों के अनुसार इस बार पितृपक्ष 16 दिन का है। मान्यता है कि इन दिनों में पितरों के नाम से किया गया दान-पुण्य सीधे पितरों तक पहुंचता है और पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। इस दौरान लोग श्राद्ध, तर्पण और ब्राह्मण भोज कराते हैं। अगले 16 दिनों तक रोजाना सुबह मिश्र तालाब के अलावा बेतवा और नर्मदा घाटों पर भी भीड़ रहेगी।नगर पालिका परिषद अध्यक्ष सविता जमना सेन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि तालाब में पूजन सामग्री, प्लास्टिक और पॉलीथिन न डालें, ताकि स्वच्छता बनी रहे।