चिलवाहा गांव की 500 से अधिक आबादी, फिर भी ग्रामीणों को पक्की सड़क नसीब नहीं, बारिश में निकलना मुश्किल भरा सफर दिक्कत : चिलवाहा सहित अन्य गांवों के ग्रामीणों की कलेक्टर से लगाई गुहार, करीब 3 किमी कच्चा रास्ता बना मुसीबत

नरेन्द्र राय रायसेन*रायसेन। जनपद पंचायत सांची की ग्राम पंचायत हिनोतिया के चिलवाहा गांव की आबादी 500 से ज्यादा है।लेकिन सड़क के नाम पर आज भी 3 किलोमीटर कच्चा पगडंडी रास्ता ही नसीब है। रायसेन तहसील के ग्राम पंचायत हिनोतिया के अंतर्गत आने वाले ग्राम चिलवाहा के ग्रामीण इसी कच्चे रास्ते कीचड़ दलदल भरे रास्ते से रोजाना आवागमन करने को मजबूर हैं। बारिश शुरू होते ही रास्ते पर कीचड़ और पानी जमा हो जाता है और गांव तक पहुंचना बड़ा मुश्किल हो जाता है। स्कूली बच्चों से लेकर बुजुर्गों और मरीजों तक को परेशानी उठानी पड़ती है। सड़क की इस समस्या से परेशान ग्रामीणों ने कलेक्टर के नाम आवेदन सौंपकर पक्की सड़क निर्माण की गुहार लगाई है।*दोपहिया वाहन निकालना मुश्किल हो जाता है*…..ग्रामीणों कैलाश बंजारा मंजू बाई बंजारा द्रोपदी बाई नैना देवी के अनुसार ग्राम चिलवाहा ग्राम पंचायत हिनोतिया मुख्य सड़क से से करीब 3 किलोमीटर दूर है। गांव तक पहुंचने वाला रास्ता लंबे समय से कच्चा है। सामान्य दिनों में धूल, गड्ढे और उबड़खाबड़ मार्ग के कारण परेशानी होती है।जबकि बारिश में हालात और बिगड़ जाते हैं। कीचड़ और पानी के बीच दोपहिया वाहन निकालना मुश्किल हो जाता है। चारपहिया वाहनों को गांव तक पहुंचने में परेशानी आती है।

ग्रामीणों का कहना है कि खराब सड़क का सीधा असर स्कूली बच्चों पर पड़ता है। बारिश के दिनों में बच्चों को कीचड़ और पानी से होकर स्कूल जाना पड़ता है। बुजुर्गों के लिए भी फिसलन भरे रास्ते पर चलना जोखिम भरा रहता है। जरूरी काम के लिए मुख्य मार्ग तक पहुंचने में ग्रामीणों को अतिरिक्त समय और परेशानी उठानी पड़ती है।*मरीजों को अस्पताल ले जाने में बढ़ जाती हैं मुश्किलें….*चिलवाहा महुआखेड़ा मार्ग के गांव में किसी व्यक्ति की तबीयत बिगड़ने पर समस्या और गंभीर हो जाती है। डिलीवरी वाली महिलाओं को चारपाई पर लिटाकर मुख्य सड़क पर बमुश्किल लेकर आते हैं परिजन। एंबुलेंस भी गांव तक नहीं पहुंच पाती।बारिश के दौरान खराब रास्ते के कारण वाहन गांव तक पहुंचने में परेशानी होती है। मरीज को मुख्य मार्ग तक ले जाने के लिए परिजनों को ग्रामीणों की मदद लेनी पड़ती है। ग्रामीणों का कहना है कि आपात स्थिति में यह कच्चा रास्ता बड़ी बाधा बन जाता है। कलेक्टर से जल्द कार्रवाई की उम्मीद….ग्रामीणों ने कलेक्टर अरूण विश्वकर्मा के नाम दिए आवेदन में कहा है कि गांव की आबादी 500 से अधिक है और इसके बावजूद पीएम सड़क परियोजना की पक्की डामर सड़क नहीं होने से उन्हें मूलभूत सुविधा के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। ग्रामीणों ने करीब 3 किलोमीटर मार्ग का पक्कीकरण कराने की मांग की है। उनका कहना है कि सड़क बन जाने से गांव का आवागमन सुगम होगा और बारिश के दिनों में होने वाली परेशानी से भी स्थायी राहत मिलेगी। ग्रामीणों ने प्रशासन से सड़क निर्माण की प्रक्रिया जल्द शुरू कराने की मांग की है।