हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी इस बार एक ही दिन, शिव-पार्वती व गणेश की होगी पूजा, प्रतिमाओं को अंतिम रूप दे रहे मूर्तिकार

नरेन्द्र राय रायसेन रायसेन।भाद्रपद मास शुक्ल पक्ष की तृतीया और चतुर्थी तिथि के अद्भुत संयोग के बीच इस वर्ष 14 सितंबर सोमवार को हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का पर्व एक साथ मनाया जाएगा। कई वर्षों के बाद ऐसा दुर्लभ योग बन रहा है।शास्त्रों में अत्यंत शुभ माना गया है। इस पावन अवसर पर जहां सुहागिन महिलाएं और कुंवारी कन्याएं अखंड सौभाग्य और मनचाहे वर के लिए निर्जला व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करेंगी।वहीं दूसरी ओर प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश की स्थापना व आराधना का महापर्व भी पूर्व हर्षोल्लास के साथ शुरू होगा।जैसे-जैसे गणेशोत्सव का पर्व नजदीक आ रहा है, मूर्तिकार प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुट गए हैं।पंडित मुकेश भार्गव के अनुसार,तृतीया तिथि 13 सितंबर सुबह 7.15 बजे से शुरू होकर 14 सितंबर सुबह 7.19 बजे तक रहेगी। इसके तुरंत बाद चतुर्थी तिथि का प्रवेश हो जाएगा। शास्त्रों के अनुसार, जब तृतीया तिथि चतुर्थी से युक्त होती है और साथ ही हस्त नक्षत्र का योग बनता है

। तो वह व्रत अत्यंत फलदायी सिद्ध होता है। इसी कारण 14 सितंबर को ही तीज और गणेश चतुर्थी दोनों का व्रत मान्य रहेगा।*क्यों खास है यह महाव्रत*…पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता पार्वती को सखियां उन्हें घने जंगल में ले गई थीं.जहां उन्होंने गुफा में हस्त नक्षत्र के दौरान बालू (रेत) के शिवलिंग की स्थापना कर कठोर तप किया था। इसी तप से प्रसन्न होकर शिवजी ने उन्हें वरदान दिया था।*मिटेंगे ग्रह दोष*…इस दिन गणेश चतुर्थी का योग होने से भगवान गणेश की आराधना का भी विशेष महत्व रहेगा। जिन जातकों की कुंडली में बुध ग्रह जनित दोष हो या सूर्य शाप योग के कारण संतान प्राप्ति में अड़चन आ रही हो।उनके लिए यह दिन वरदान समान है। ऐसे जातकों को इस दिन गणेश चतुर्थी का व्रत रखकर गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ और अनुष्ठान करना चाहिए, जिससे समस्त बाधाएं दूर होती हैं।