ओपीडी में मरीजों की भीड़… 700-800 तक पहुंची संख्या, बच्चों में वायरल से निमोनिया तक के केस15 दिन में तेजी से बढ़े मरीज; रोज 200 बच्चे पहुंच रहे, 52-55 को भर्ती करने की नौबत, शिशु वार्ड के बेड फुल

नरेन्द्र राय रायसेन रायसेन। लगातार बारिश और मौसम में बदलाव के बीच शहर सहित जिले में मौसमी बीमारियों का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। इसका असर जिला अस्पताल की ओपीडी में साफ दिखाई दे रहा है। पिछले करीब 15 दिनों से मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। पिछले दो दिनों से जिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 700 से 800 से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें सर्दी-खांसी, वायरल फीवर, उल्टी-दस्त के साथ मलेरिया और डेंगू की आशंका वाले मरीज भी शामिल हैं।सिविल सर्जन डॉ. अनिल ओढ़ के मुताबिक मौसमी बीमारियों के कारण अस्पताल में मरीजों का दबाव बढ़ा है। सबसे ज्यादा भीड़ मेडिसिन, महिला-पुरुष वार्ड और शिशु रोग विभाग में दिखाई दे रही है। मरीजों की संख्या बढ़ने के साथ अस्पताल के वार्डों में उपलब्ध बेड पर भी दबाव बढ़ गया है। कई जगह एक बेड पर दो से तीन मरीजों को रखने की स्थिति बन रही है।बच्चों में वायरल से निमोनिया तक के केसशिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. आलोक राय के अनुसार बच्चों में भी मौसमी संक्रमण के मामले बढ़े हैं। रोजाना करीब 200 बच्चे इलाज के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। इनमें से लगभग 52 से 55 बच्चों को भर्ती करने की जरूरत पड़ रही है। शिशु रोग विभाग में बेड की क्षमता पर इसका सीधा असर पड़ा है।डॉक्टरों के अनुसार बच्चों में सामान्य सर्दी-खांसी के मामले भी सामने आ रहे हैं, लेकिन कुछ बच्चों में संक्रमण बढ़कर निमोनिया तक पहुंच रहा है। तेज बुखार, लगातार खांसी, सांस लेने में परेशानी, सांस तेज चलना, कमजोरी और खाना-पीना कम होना जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करने की सलाह दी जा रही है।जांचों का दबाव भी बढ़ा, रोज 5-6 हजार टेस्टमरीजों की संख्या बढ़ने के साथ जिला अस्पताल की पैथोलॉजी में जांचों का दबाव भी बढ़ गया है

। सामान्य दिनों में जहां रोजाना करीब 2 से 3 हजार जांचें होती थीं, वहीं इस सप्ताह यह संख्या बढ़कर 5 से 6 हजार से अधिक प्रतिदिन पहुंच गई है।इनमें सबसे ज्यादा ब्लड से जुड़ी करीब 18 प्रकार की जांचें शामिल हैं। मलेरिया, सीबीसी, टाइफाइड और एचआईवी सहित अन्य जांचों के लिए सैंपल की संख्या बढ़ी है। शनिवार को ओपीडी, जांच केंद्र और दवा काउंटर पर मरीजों की लंबी कतारें देखने को मिलीं।मेडिसिन ओपीडी में 30% तक इजाफामेडिसिन विभाग के डॉ. अभिषेक सागर के मुताबिक कुछ ही दिनों में विभाग की ओपीडी करीब 30 प्रतिशत तक बढ़ी है। सर्दी-खांसी, वायरल फीवर और उल्टी-दस्त के मरीज ज्यादा आ रहे हैं। गंभीर स्थिति वाले मरीजों को भर्ती कर उपचार दिया जा रहा है।वहीं पाटनदेव स्थित शासकीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. प्रतीक शर्मा ने बताया कि इन दिनों केंद्र की ओपीडी में भी मरीजों की संख्या बढ़ी है। रोजाना दोनों समय मिलाकर करीब 70 से 100 मरीज वायरल फीवर, सर्दी-जुकाम और उल्टी-दस्त की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं।20-25 पुराने पलंगों की मरम्मत कर वार्डों में लगाएमरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए जिला अस्पताल प्रबंधन पुराने पलंगों की मरम्मत करा रहा है। करीब 20 से 25 पलंगों को वार्डों में एडजस्ट किया गया है, ताकि मरीजों की संख्या बढ़ने पर अतिरिक्त व्यवस्था की जा सके। हालांकि कई वार्डों में बेड की उपलब्धता सीमित होने से दबाव बना हुआ है।महिला एवं प्रसूति वार्ड में भी बढ़ा दबावजिला अस्पताल के महिला एवं प्रसूति विभाग में भी मरीजों की संख्या अधिक है। शहर सहित जिले से रोजाना 45 से अधिक प्रसव होने के कारण वार्ड में भीड़ बनी रहती है। प्रसूताओं को भर्ती करने के लिए बेड की कमी की स्थिति भी सामने आ रही है। भीड़ के कारण संक्रमण का खतरा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। कई मरीजों को बेड उपलब्ध नहीं होने पर निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।बारिश के बाद नमी ने बढ़ाई त्वचा और पेट की परेशानीलगातार बारिश और कई दिनों तक धूप नहीं निकलने से वातावरण में नमी बढ़ गई है। इसका असर त्वचा और पेट से जुड़ी समस्याओं के रूप में भी दिखाई दे रहा है। अस्पताल में खुजली, दाद, फंगल इंफेक्शन, लाल चकत्ते और त्वचा संबंधी शिकायतों वाले मरीज बढ़ रहे हैं।नमी के कारण घर और कपड़ों में सीलन रहने से फंगल इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। डॉक्टरों ने शरीर और कपड़ों को सूखा रखने तथा घर में हवा का पर्याप्त आवागमन बनाए रखने की सलाह दी है।पेट से जुड़ी समस्याओं में गैस, पेट फूलना, उल्टी और डायरिया के मरीज भी बढ़े हैं। विशेषज्ञों के अनुसार मौसम में लगातार बदलाव और खान-पान में लापरवाही से भी ऐसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।सांस के मरीजों की परेशानी भी बढ़ीनमी और सीलन का असर अस्थमा तथा सांस से संबंधित बीमारियों से पीड़ित मरीजों पर भी पड़ रहा है। ऐसे मरीजों में खांसी, सांस लेने में परेशानी, सीने में जकड़न और एलर्जी जैसे लक्षण बढ़ने की शिकायत सामने आ रही है। डॉक्टरों ने धूल, सीलन, फफूंद और धुएं से बचने की सलाह दी है।मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है असरविशेषज्ञों के मुताबिक लगातार उदास मौसम और धूप की कमी का असर लोगों के मूड और दिनचर्या पर भी पड़ सकता है। पहले से तनाव या मानसिक परेशानी से जूझ रहे लोगों में बेचैनी, चिड़चिड़ापन और नींद में बदलाव जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। नियमित दिनचर्या, पर्याप्त नींद और घर के अंदर हल्की शारीरिक गतिविधियां मददगार हो सकती हैं।विशेषज्ञों की सलाह”बच्चों में तेज बुखार, लगातार खांसी, सांस लेने में परेशानी, सांस तेज चलना, कमजोरी या खाना-पीना कम होना जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। मौसमी बीमारियों से पीड़ित कुछ बच्चे गंभीर स्थिति में पहुंच रहे हैं, हालांकि उपचार के बाद अधिकांश बच्चे जल्द रिकवर भी हो रहे हैं।”— डॉ. आलोक राय, विशेषज्ञ शिशु रोग विभाग”मेडिसिन विभाग की ओपीडी कुछ दिनों में करीब 30 प्रतिशत बढ़ी है। सर्दी-खांसी, उल्टी-दस्त और वायरल फीवर के मरीज ज्यादा आ रहे हैं। गंभीर मरीजों को भर्ती कर उपचार दिया जा रहा है।”— डॉ. अभिषेक सागर, मेडिसिन विभाग”मरीजों के निशुल्क इलाज और जांच के लिए अस्पताल प्रबंधन लगातार प्रयास कर रहा है। मरीजों की संख्या बढ़ने से स्टाफ पर काम का बोझ बढ़ा है, लेकिन व्यवस्थाओं में कमी नहीं होने दी जाएगी।”— डॉ. दिनेश खत्री, सीएमएचओ”नमी वाले मौसम में त्वचा और फंगल इंफेक्शन के मरीज बढ़ते हैं। शरीर और कपड़ों को सूखा रखना चाहिए तथा घर में हवा का पर्याप्त आवागमन बनाए रखना चाहिए।”— डॉ. एमएल अहिरवार, मेडिसिन विशेषज्ञ”लगातार कई दिनों तक धूप नहीं निकलने से पेट की समस्याओं के साथ अस्थमा और सांस संबंधी मरीजों की परेशानी भी बढ़ सकती है। किसी तरह की समस्या होने पर समय पर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।”— डॉ. सौरभ जैन, मेडिसिन विशेषज्ञ