ताप्ती सेवा समिति ने लिया संकल्प, इस वर्ष माँ ताप्ती में नहीं किया जाएगा गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन
रमाकांत मोरे बुरहानपुर।

ताप्ती सेवा समिति, बुरहानपुर की बैठक आज प्रतापुरा स्थित देवचरण शर्मा के निवास पर संपन्न हुई। बैठक में आगामी त्योहारी आयोजनों को लेकर विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई। इसी दौरान समिति द्वारा माँ ताप्ती को प्रदूषणमुक्त रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और अनुकरणीय निर्णय सर्वसम्मति से पारित किया गया। समिति ने निर्णय लिया कि इस वर्ष समिति के सदस्य अपने घरों में स्थापित की जाने वाली भगवान गणेश की प्रतिमाओं का विसर्जन माँ ताप्ती नदी में नहीं करेंगे। समिति सदस्यों द्वारा विधि-विधान एवं श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना के बाद गणेश प्रतिमाओं को संबंधित मूर्तिकारों को सौंपा जाएगा, ताकि इन प्रतिमाओं का आगामी वर्ष पुनः उपयोग किया जा सके।इस निर्णय की जानकारी देते हुए समिति के सचिव धर्मेंद्र सोनी ने कहा कि भगवान गणेश हमारी आस्था और श्रद्धा के केंद्र हैं। हम पूरी श्रद्धा से उनकी पूजा-अर्चना करते हैं, लेकिन पूजा के बाद प्रतिमा के विसर्जन से यदि नदी का जल प्रदूषित होता है और जलीय जीव-जंतुओं एवं मछलियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, तो हमें इस विषय पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में अनेक प्रतिमाओं के निर्माण एवं रंग-रोगन में ऐसे रासायनिक पदार्थों का उपयोग होता है, जो पानी में घुलकर नदी के पर्यावरण को नुकसान पहुँचा सकते हैं। इससे माँ ताप्ती का जल, उसमें रहने वाले जलीय जीव और पूरा नदी पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित होता है। एक ओर हम भगवान गणेश की आराधना करते हैं और दूसरी ओर उन्हीं की प्रतिमा के माध्यम से प्रकृति एवं जलीय जीवन को नुकसान पहुँचाएँ, यह हमारी धार्मिक भावना और पर्यावरण संरक्षण दोनों के अनुरूप नहीं है।विजय राठौर ने अपनी बात में कहा कि समिति का उद्देश्य किसी की धार्मिक आस्था को ठेस पहुँचाना नहीं, बल्कि आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण को जोड़ना है। यदि हम भगवान गणेश की प्रतिमा का सम्मानपूर्वक पूजन करने के बाद उसे नदी में विसर्जित करने के बजाय मूर्तिकार को वापस सौंप दें, तो एक प्रतिमा का पुनः उपयोग किया जा सकता है और माँ ताप्ती को प्रदूषण से बचाने में भी योगदान दिया जा सकता है।समिति सदस्य विनय पुनीवाला ने कहा, “हमारा प्रयास छोटा है, लेकिन इसका उद्देश्य बहुत बड़ा है। हम चाहते हैं कि समाज के अधिक से अधिक लोग इस पहल से जुड़ें और भगवान गणेश की भक्ति के साथ माँ ताप्ती की सेवा का संकल्प भी लें।”समिति सदस्य नंदकुमार वाणे ने गणेश गौरव प्रतियोगिता को लेकर जानकारी देते हुए बताया कि ताप्ती सेवा समिति द्वारा प्रतिवर्ष गणेश गौरव पुरस्कार के माध्यम से उत्कृष्ट गणेश मंडलों को सम्मानित किया जाता है। इस वर्ष प्रतियोगिता में पर्यावरण संरक्षण को भी विशेष महत्व दिया जाएगा।उन्होंने कहा कि इस वर्ष समिति का उद्देश्य ऐसे गणेश मंडलों को विशेष रूप से सम्मानित करना रहेगा, जो गणेश प्रतिमाओं का माँ ताप्ती या अन्य जलस्रोतों में विसर्जन करने के बजाय विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद प्रतिमाओं को मूर्तिकारों को सौंपेंगे। इससे प्रतिमाओं का पुनः उपयोग संभव होगा और नदी को प्रदूषण से बचाने में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।नंदकुमार वाणे ने कहा कि गणेश उत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को सकारात्मक संदेश देने का भी अवसर है। यदि गणेश मंडल आगे आकर पर्यावरण संरक्षण का उदाहरण प्रस्तुत करते हैं, तो इससे बड़ी संख्या में नागरिक प्रेरित होंगे।समिति ने नागरिकों एवं गणेश मंडलों से अपील की कि “बप्पा की भक्ति भी करें और माँ ताप्ती की रक्षा भी करें।” गणेश उत्सव को पर्यावरण हितैषी बनाकर हम अपनी आस्था के साथ प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी भी निभा सकते हैं।बैठक में डॉक्टर यूसुफ खान, अजय राठौर, राजिक अंसारी सहित समिति के सदस्य एवं समाजसेवी उपस्थित रहे।