भगवान झूलेलाल जी का 40 दिवसीय चालिहा उत्सव भव्य रूप से संपन्न
सुरज दहे

पारंपरिक भंडारे में 5 हजार श्रद्धालुओं ने ग्रहण की प्रसादीबुरहानपुर। सिंधी समाज के आराध्य देव भगवान झूलेलाल जी की भक्ति, श्रद्धा एवं आस्था का प्रतीक 40 दिवसीय चालिहा उत्सव मंगलवार को सिंधी बस्ती स्थित श्री झूलेलाल जल मंदिर में धार्मिक उत्साह एवं भक्तिमय वातावरण में भव्य रूप से संपन्न हुआ। समापन अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना, आरती एवं सामूहिक प्रार्थना का आयोजन किया गया। इसके पश्चात आयोजित पारंपरिक भंडारे में लगभग 5,000 श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण की।समाजसेवी धीरज नावानी ने जानकारी देते हुए बताया कि सिंधी समाज में भगवान झूलेलाल जी का चालिहा उत्सव विशेष धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व रखता है। ‘चालिहा’ का अर्थ 40 दिनों की साधना एवं आराधना से है। इस दौरान श्रद्धालु संयम एवं नियम का पालन करते हुए व्रत रखते हैं तथा भगवान झूलेलाल जी की पूजा, आरती एवं प्रार्थना करते हैं। यह उत्सव श्रद्धा, त्याग, तपस्या, अनुशासन और भगवान के प्रति अटूट विश्वास का प्रतीक है। साथ ही यह समाज की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ ही एकता, सेवा एवं सामाजिक समरसता का संदेश देता है। उन्होंने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार सिंध प्रदेश में मिर्खशाह के शासनकाल में हिंदू समाज पर धर्म परिवर्तन का दबाव बढ़ने लगा था। अत्याचार से परेशान समाजजनों ने भगवान वरुणदेव से रक्षा एवं मुक्ति के लिए प्रार्थना की। लगातार 40 दिनों तक उपवास, पूजा-अर्चना एवं प्रार्थना के बाद भगवान वरुणदेव ने उन्हें आश्वासन दिया कि उनके बीच एक दिव्य अवतार जन्म लेगा, जो समाज को अत्याचार से मुक्ति दिलाएगा। मान्यता है कि इसी तपस्या के फलस्वरूप नसरपुर में माता देवकी एवं पिता रतनचंद के घर भगवान झूलेलाल जी का अवतार हुआ। भगवान झूलेलाल जी ने समाज को सनातन की रक्षा, समरसता एवं धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। सुरेश आडवानी ने बताया कि बुरहानपुर में इस वर्ष भी 40 दिनों तक श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक व्रत रखे। श्री झूलेलाल जल मंदिर में नियमित रूप से धार्मिक आयोजन हुए तथा देश एवं समस्त मानव समाज के सुख-शांति, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की गई। चालिहा उत्सव के दौरान गुजरात के विख्यात संत शेहरा वाले सांई का विशेष सानिध्य समाजजनों को प्राप्त हुआ। संतश्री के सानिध्य में भजन एवं प्रवचन आयोजित किए गए, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। संतश्री ने श्रद्धालुओं को भक्ति, सेवा, सदाचार एवं धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। उत्सव के अंतिम चरण में भगवान झूलेलाल जी की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। बड़ी संख्या में समाजजन एवं श्रद्धालु जयघोष एवं भजनों के साथ शोभायात्रा में शामिल हुए। शोभायात्रा में धार्मिक आस्था के साथ समाज की एकता एवं सांस्कृतिक परंपराओं की मनोहारी झलक देखने को मिली। मंगलवार को समापन अवसर पर श्री झूलेलाल जल मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना एवं आरती की गई। आरती के दौरान भगवान झूलेलाल जी के जयकारों से मंदिर परिसर गूंज उठा। आयोजन में युवाओं, महिलाओं एवं समाज के विभिन्न वर्गों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए व्यवस्थाओं में सहयोग किया। कार्यक्रम के अंत में समरसता एवं सेवा भाव के साथ भव्य भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें लगभग 5,000 श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण की। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति के बावजूद भंडारा व्यवस्थित रूप से संपन्न हुआ। पूरे आयोजन ने धार्मिक आस्था के साथ सेवा, संस्कार, सामाजिक एकता एवं भाईचारे का संदेश दिया। कार्यक्रम में बलराज नावानी, सुरेश आडवानी, डॉ. गोपीचंद जग्यासी, राजलदास सूखेजा, अमर लालवानी, हरीश चंचलानी, मनोज फुलवानी, सुदामा नावानी, टेकचंद नावानी, श्रीचंद पोहानी, माणक खटवानी, नारू वासवानी, दिलीप बलवानी, विनोद वाधवानी, विनोद पंजवानी, रवि जगनानी, दीपक रामचंदानी, भारत रोचलानी, अनिल छाबड़ा एवं प्रकाश गगवानी, राजकुमार गुरबानी सहित बड़ी संख्या में समाजजन एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।