फूड सेफ्टी कागजों पर… स्वाद के नाम पर दुकानदार परोस रहे धीमा जहर,होटल, चौपाटी और हाथ ठेले-गुमठियों में काले तेल से तली जा रही सामग्री; बार-बार गर्म हो रहे तेल से सेहत पर खतरा

नरेन्द्र राय / रायसेन। शहर के युवाओं में इन दिनों में फास्ट फूड खाने का चलन बढ़ रहा है। जो उनकी सेहत के लिए खतरनाक भी है।शहर में फूड सेफ्टी के नियमों की अनदेखी लोगों की सेहत पर भारी पड़ रही है। होटल, चौपाटी, हाथ ठेले और टपरों पर चाट पकौड़े, समोसे, चाउमीन मोमोस भजिए और अन्य खाद्य सामग्री तलने के लिए एक ही तेल को बार-बार गर्म कर इस्तेमाल किया जा रहा है। कई जगह तेल इतना काला पड़ चुका है कि उसमें तली सामग्री का रंग और स्वाद तक बदल जाता है। इसके बावजूद जिला खाद्य सुरक्षा एवं औषधीय प्रशासन विभाग की कार्रवाई का असर जमीन पर नजर नहीं आ रहा।खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के नियमों के अनुसार एक ही तेल को बार-बार गर्म करना सुरक्षित नहीं माना जाता। बार-बार गर्म करने पर तेल में ट्रांस फैट और अन्य हानिकारक तत्व बढ़ सकते हैं। इससे लंबे समय में हृदय और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।तेल कितनी बार कर सकते हैं इस्तेमाल…फूड सेफ्टी के प्रावधानों के मुताबिक खाना तलने वाले तेल को बार-बार गर्म करने से उसकी गुणवत्ता खराब होती है। इस्तेमाल किए गए तेल में टीपीसी (टोटल पोलर कंपाउंड्स) की मात्रा 25 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। इससे अधिक होने पर तेल मानव उपभोग के लिए असुरक्षित माना जाता है। ऐसे तेल का दोबारा इस्तेमाल करने के बजाय उसे बायोडीजल बनाने वाली अधिकृत एजेंसी को दिया जाना चाहिए।काला तेल जन स्वास्थ्य के लिए खतरा…बार-बार गर्म किए गए तेल का रंग धीरे-धीरे काला पड़ने लगता है और उसमें झाग बनने लगता है। ऐसे तेल में बनी सामग्री जल्दी खराब भी नहीं होती, जिससे दुकानदारों को लागत कम करने में फायदा दिखता है। लेकिन इसका सीधा असर ग्राहकों की सेहत पर पड़ सकता है।नियमतो हैं, लेकिन निगरानी कमजोर…शहर में बड़ी संख्या में होटल, चौपाटी, फुटपाथों पर पानीपुरी चाट के हाथ ठेले और छोटी खाद्य दुकानें संचालित हो रही हैं। इनमें से कई जगहों पर खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और इस्तेमाल किए जा रहे तेल की नियमित जांच नहीं होती। शिकायत मिलने पर ही जांच और सैंपलिंग की कार्रवाई किए जाने से मिलावट और खराब तेल के इस्तेमाल पर प्रभावी रोक नहीं लग पा रही है।बीमार पड़ने पर लोगों ने बाहर का खाना छोड़ा….बार-बार बाहर का तला-भुना खाना खाने से पेट खराब होने और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की शिकायतें भी सामने आती हैं। कई लोगों का कहना है कि बीमारी के बाद उन्होंने होटल और हाथ ठेलों का तला हुआ खाना छोड़ दिया है। लोगों की मांग है कि जिला खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम नियमित जांच करे और काला पड़ चुके तेल का इस्तेमाल करने वाले दुकानदारों पर सख्त कार्रवाई की जाए।इनका कहना है….आगामी रक्षाबंधन के त्यौहार पर होटल रेस्टोरेंट सहित किराना दुकानों की जांच के नमूने लिए जा रहे हैं। वहीं कड़ाई में काले तेल का इस्तेमाल करने वाले दुकानदारों की भी अब खैर नहीं। इनके विरुद्ध भी जांच की जाएगी।कल्पना अर्शिया जिला फूड अधिकारी