शकर के बढ़ते दाम से महंगाई बढ़ने की चिंतासेवादल जिलाध्यक्ष डॉ. चैन सिंह चौधरी बोले—शकर महंगी होने का असर कई रोजमर्रा की चीजों पर पड़ता है

उज्जैन। शकर के बढ़ते भाव को लेकर सेवादल के जिला अध्यक्ष डॉ. चैन सिंह चौधरी ने चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि शकर की कीमत बढ़ने का असर केवल सीधे तौर पर शकर खरीदने वाले उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ता, बल्कि मिठाई, बिस्कुट, टॉफी, चॉकलेट, आइसक्रीम, पेय पदार्थ और अन्य खाद्य उत्पादों की लागत भी प्रभावित होती है।डॉ. चौधरी ने कहा कि मिठाई, पेड़े, बर्फी, गुलाब जामुन, बिस्कुट, जैम-जेली सहित कई खाद्य पदार्थों के निर्माण में शकर का महत्वपूर्ण उपयोग होता है। ऐसे में शकर महंगी होने पर होटल, मिठाई दुकानदारों और खाद्य उत्पाद बनाने वाली कंपनियों की लागत बढ़ सकती है, जिसका असर अंततः उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ सकता है।उन्होंने कहा कि पैकेज्ड फूड उद्योग में भी शकर की कीमत बढ़ने से उत्पादन लागत प्रभावित होती है। ऐसी स्थिति में कंपनियां उत्पादों के दाम बढ़ाने या पैकेट का वजन कम करने जैसे कदम उठा सकती हैं।डॉ. चौधरी के अनुसार, शकर आधारित कुछ सिरप और टॉनिक जैसी दवाओं की लागत भी प्रभावित हो सकती है। वहीं गन्ने से जुड़े उप-उत्पादों की कीमत में बदलाव का असर पशुपालन और दूध उत्पादन की लागत पर भी पड़ सकता है।उन्होंने कहा कि शकर रोजमर्रा की जरूरत से जुड़ी वस्तु है। इसलिए इसके भाव में बढ़ोतरी का व्यापक असर पड़ने की संभावना रहती है। उन्होंने सरकार से आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर निगरानी रखने और आम उपभोक्ताओं को राहत देने की दिशा में कदम उठाने की मांग की।डॉ. चौधरी ने कहा कि शकर के दाम में लगातार बढ़ोतरी होने पर इसका असर केवल एक वस्तु तक सीमित नहीं रहता, बल्कि खाद्य एवं पेय पदार्थों की पूरी श्रृंखला की लागत पर दिखाई दे सकता है।