शिक्षा ऋण की प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और समयबद्ध हो — पालक महासंघ

रमाकांत मोरे* /प्रधानमंत्री के नाम डिप्टी कलेक्टर राजेश पाटीदार को सौंपा ज्ञापन*बुरहानपुर। देशभर के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए समय पर शिक्षा ऋण उपलब्ध कराने तथा शिक्षा ऋण की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने की मांग को लेकर पालक महासंघ, जिला इकाई बुरहानपुर ने प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन डिप्टी कलेक्टर राजेश पाटीदार को सौंपा।ज्ञापन के बारे में जानकारी देते हुए राजीव खेडकर ने कहा कि देश के लाखों विद्यार्थी उच्च शिक्षा के लिए शिक्षा ऋण पर निर्भर हैं। लेकिन ऋण स्वीकृति में देरी, जटिल दस्तावेजी प्रक्रिया, बार-बार बैंक के चक्कर और विभिन्न औपचारिकताओं के कारण विद्यार्थियों एवं उनके अभिभावकों को आर्थिक तथा मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई बार ऋण स्वीकृत होने में देरी के कारण विद्यार्थियों के प्रवेश की समय-सीमा भी प्रभावित हो जाती है।महासंघ जिला ईकाई बुरहानपुर अध्यक्ष धर्मेंद्र सोनी ने द इकोनॉमिक टाइम्स में प्रकाशित समाचार का हवाला देते हुए कहा कि वित्त मंत्रालय द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को शिक्षा ऋण आवेदनों का 15 दिनों के भीतर निपटारा करने तथा प्रक्रिया को सरल एवं पारदर्शी बनाने के निर्देश दिए गए हैं। पालक महासंघ ने मांग की कि इन निर्देशों का प्रभावी और सख्ती से पालन पूरे देश में सुनिश्चित किया जाए।

महासंघ वरिष्ठ सदस्य रियाजउल्ल हक़ अंसारी ने कहा कि प्रतिभा आर्थिक स्थिति की मोहताज नहीं होनी चाहिए। यदि किसी प्रतिभाशाली विद्यार्थी को केवल समय पर शिक्षा ऋण नहीं मिलने के कारण उच्च शिक्षा में प्रवेश से वंचित होना पड़ता है, तो यह उस विद्यार्थी और परिवार के साथ-साथ देश के भविष्य के लिए भी नुकसान है।पालक महासंघ की प्रमुख मांगेंदेश के सभी बैंकों में शिक्षा ऋण के लिए एक समान, सरल एवं पारदर्शी प्रक्रिया लागू की जाए।प्रत्येक शिक्षा ऋण आवेदन का अधिकतम 15 दिनों में अनिवार्य रूप से निपटारा किया जाए।ऋण अस्वीकृत होने की स्थिति में विद्यार्थी को लिखित एवं स्पष्ट कारण उपलब्ध कराया जाए।प्रत्येक बैंक शाखा में शिक्षा ऋण के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाए।आर्थिक रूप से कमजोर एवं मध्यमवर्गीय परिवारों के विद्यार्थियों के लिए दस्तावेजी प्रक्रिया सरल की जाए।शिक्षा ऋण संबंधी शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए जिला एवं राज्य स्तर पर प्रभावी शिकायत निवारण व्यवस्था बनाई जाए।पालक महासंघ ने केंद्र सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक, भारतीय बैंक संघ तथा सभी बैंक प्रबंधन से आग्रह किया कि शिक्षा ऋण को महज बैंकिंग सुविधा के रूप में नहीं, बल्कि देश के भविष्य में निवेश के रूप में देखा जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी विद्यार्थी केवल आर्थिक कठिनाइयों अथवा ऋण प्रक्रिया में देरी के कारण उच्च शिक्षा से वंचित न हो।ज्ञापन सौंपने के दौरान अताउल्लाह खान,देवचंद शर्मा, विनय पुनीवाला, राजीक हुसैन अंसारी, बसंत पाल, नंदकिशोर वाने, राजकुमार बचवानी, परेश शाह, नरेश हसनदानी, राजेश भगत सहित पालक महासंघ के पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।