कसरावद में जैन संत हेमंत मुनि म,सा, द्वारा मालव केसरी श्री सौभाग्यमलजी म.सा. की 42वीं पुण्यतिथि पर धर्मसभा में किया स्मरण
। रिपोर्टर नवीन रायली कसरावद। परम पूज्य श्री हेमंतमुनिजी म.सा. एवं आदि ठाणा–4 के पावन सान्निध्य में आयोजित मंगल प्रवचन में मालव केसरी पूज्य गुरुदेव श्री सौभाग्यमलजी म.सा. की 42वीं पुण्यतिथि के अवसर पर उनके जीवन एवं व्यक्तित्व का स्मरण किया गया।धर्मसभा में गुरुदेव ने कहा कि सुदेव, सुगुरु एवं सुधर्म के प्रति दृढ़ श्रद्धा रखने वाले जीव विरले होते हैं। मालव केसरी श्री सौभाग्यमलजी म.सा. का जीवन जिनशासन, जिनवाणी एवं गुरु के प्रति अटूट श्रद्धा और समर्पण का उदाहरण रहा। उन्होंने स्वयं धर्म से जुड़कर अनेक श्रावक-श्राविकाओं को धर्म, संयम एवं सद्मार्ग से जोड़ा तथा संघों में एकता, प्रेम एवं सौहार्द स्थापित करने का प्रयास किया।गुरुदेव ने कहा कि धर्म को केवल सुनना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उसे जीवन में आचरण के रूप में उतारना ही सच्ची धर्म-साधना है। उनके जीवन एवं आदर्शों से प्रेरणा लेकर संघ की एकता और धर्म के प्रति समर्पण बनाए रखने का आह्वान किया गया।इस अवसर पर पलक ईशान मंडोत ने 11 उपवास की तपस्या पूर्ण की, जिसकी जैन श्रीसंघ, कसरावद की ओर से अनुमोदना की गई। पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में 7 अगस्त को दोपहर 2 से 3 बजे तक जैन महावीर भवन में शांति महिला मंडल एवं त्रिशला बहू मंडल द्वारा नवकार मंत्र जाप का आयोजन किया जाएगा। श्रीसंघ ने श्रावक-श्राविकाओं से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर धर्मलाभ लेने का आग्रह किया है।