जनसहयोग से संवर रहा तिरला का मुक्तिधाम, पौधारोपण के साथ संरक्षण की अनूठी पहल

तिरला। पर्यावरण संरक्षण तभी सार्थक होता है, जब लगाए गए पौधों का संरक्षण भी किया जाए। इसी सोच को साकार करते हुए मुक्तिधाम समिति तिरला ने इस वर्ष भी मुक्तिधाम परिसर में व्यापक स्तर पर पौधारोपण किया। समिति ने पौधों की नियमित देखभाल और सुरक्षा का संकल्प लेते हुए समाज के सामने जनभागीदारी का प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है।समिति के सदस्यों ने बताया कि पिछले वर्ष लगाए गए पौधों की पूरे वर्ष नियमित सिंचाई और देखभाल की गई। परिणामस्वरूप अधिकांश पौधे सुरक्षित हैं और अब वृक्ष का स्वरूप लेने लगे हैं। इसी सफलता से प्रेरित होकर इस वर्ष भी बड़ी संख्या में छायादार एवं पर्यावरण हितैषी पौधे लगाए गए हैं।तिरला का मुक्तिधाम आज जनसहयोग से विकसित होने वाली एक अनुकरणीय पहल बन चुका है। परिसर में मोरम भराव, विभिन्न निर्माण कार्य, पेयजल के लिए हैंडपंप, बैठने के लिए कुर्सियों की व्यवस्था तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं ग्रामवासियों के आर्थिक सहयोग और श्रमदान से विकसित की गई हैं। गांव के सभी समाजों ने बिना किसी भेदभाव के मुक्तिधाम के विकास में अपना योगदान दिया है।समिति ने समाज में सेवा और सहयोग की एक प्रेरक परंपरा भी विकसित की है। गांव में किसी वरिष्ठ नागरिक के देवलोकगमन पर उनके परिजन श्रद्धांजलि स्वरूप मुक्तिधाम समिति को कुर्सियां अथवा आर्थिक सहयोग प्रदान करते हैं। इस सहयोग का उपयोग मुक्तिधाम की सुविधाओं के विस्तार, रखरखाव और सौंदर्यीकरण में किया जाता है।समिति का कहना है कि “पौधे लगाना पहला कदम है, लेकिन उन्हें सुरक्षित रखकर वृक्ष बनाना ही वास्तविक पर्यावरण सेवा है।” इसी उद्देश्य के साथ समिति पर्यावरण संरक्षण और मुक्तिधाम के समग्र विकास के लिए लगातार कार्य कर रही है।समिति ने सभी ग्रामवासियों एवं सहयोगकर्ताओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी जनसहयोग बनाए रखने की अपील की है, ताकि तिरला का मुक्तिधाम आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, हरित, व्यवस्थित और प्रेरणादायी स्थल के रूप में विकसित होता रहे। ब्यूरो रिपोर्ट धार बगदीराम चौहान