मुख्यमंत्री से महज़ 5 दिन में ₹75 हजार की स्वीकृति, भाजपा नेता मुकेश कावड़िया के प्रयास फिर आए रंग50 से अधिक जरूरतमंदों को दिला चुके हैं सहायता, क्षेत्र में हो रही सराहना

सरदारपुर (धार), कमल सोलंकी।सरदारपुर विधानसभा क्षेत्र में जरूरतमंदों के लिए लगातार सक्रिय रहने वाले भाजपा के पूर्व मंडल अध्यक्ष एवं जिला कार्यसमिति सदस्य श्री मुकेश कावड़िया के प्रयास एक बार फिर सफल रहे। उनके विशेष आग्रह पर मुख्यमंत्री श्री मोहन यादव ने मुख्यमंत्री बीमारी सहायता निधि से ₹75,000 की आर्थिक सहायता स्वीकृत की है। इस त्वरित निर्णय से क्षेत्र में खुशी का माहौल है और श्री कावड़िया की जनसेवा की सराहना की जा रही है।भाजपा मंडल उपाध्यक्ष महेश शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि 23 जुलाई 2026 को मुख्यमंत्री श्री मोहन यादव के भाबरा प्रवास के दौरान श्री मुकेश कावड़िया ने लाबरिया निवासी श्री राजेंद्र कैलाशचंद कोठारी के गंभीर उपचार हेतु अस्पताल द्वारा तैयार लगभग ₹4 लाख के उपचार अनुमान (एस्टीमेट) के साथ मुख्यमंत्री को मांग-पत्र सौंपा था। इस दौरान श्री कावड़िया ने स्वयं मुख्यमंत्री से चर्चा कर बीमारी सहायता निधि से आर्थिक सहयोग देने का आग्रह किया।इसका सकारात्मक परिणाम मात्र 5 दिनों में सामने आया। 28 जुलाई 2026 को मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा एसएमएस के माध्यम से ₹75,000 की राशि स्वीकृत होने की सूचना प्राप्त हुई, जिससे मरीज के उपचार एवं ऑपरेशन में महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी।श्री मुकेश कावड़िया ने बताया कि वे लंबे समय से जरूरतमंद मरीजों को विभिन्न राहत योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान, प्रधानमंत्री राहत कोष तथा मुख्यमंत्री श्री मोहन यादव के समक्ष अनेक जरूरतमंदों के आवेदन प्रस्तुत कराए हैं। उनके प्रयासों से अब तक 50 से अधिक जरूरतमंद लोगों को आर्थिक सहायता का लाभ मिल चुका है।राशि स्वीकृत होने पर श्री मुकेश कावड़िया ने मुख्यमंत्री श्री मोहन यादव तथा भारतीय जनता पार्टी, धार के जिलाध्यक्ष श्री निलेश भारती के प्रति आभार व्यक्त किया। वहीं श्री कावड़िया द्वारा लगातार जरूरतमंदों को राहत दिलाने के इस अनुकरणीय कार्य पर भाजपा पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं, इष्ट-मित्रों, स्नेहीजनों एवं नगरवासियों ने उन्हें बधाई देते हुए उनके जनसेवा कार्यों की मुक्तकंठ से प्रशंसा की।जनसेवा को समर्पित श्री मुकेश कावड़िया का यह प्रयास एक बार फिर साबित करता है कि जनप्रतिनिधि यदि संवेदनशील और सक्रिय हों, तो जरूरतमंदों तक सरकारी सहायता समय पर पहुँच सकती है।