2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से राहत देने संसद में संशोधन की मांगअध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा जिला बुरहानपुर ने प्रधानमंत्री के नाम सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल को सौंपा ज्ञापन, सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर जताई चिंता

बुरहानपुर वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य किए जाने के संबंध में आए न्यायिक निर्णय के बाद अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा जिला बुरहानपुर ने केंद्र सरकार से शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम में संशोधन कर ऐसे शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त करने की मांग की है। इसी मांग को लेकर संघ के प्रदेश संयोजक शालिकराम चौधरी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन, खंडवा लोकसभा क्षेत्र के सांसद को सौंपा। ज्ञापन में कहा गया है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए मूल अधिनियम में शिक्षक पात्रता परीक्षा अनिवार्य नहीं थी। बाद में हुए संशोधनों में भी कहीं यह प्रावधान नहीं जोड़ा गया कि वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी लागू होगी। इसके बावजूद 1 सितंबर 2025 से प्रभावी स्थिति के आधार पर सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय से हजारों शिक्षकों के सामने सेवा संबंधी अनिश्चितता की स्थिति बन गई है। संघ ने ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया कि वर्ष 2017 में संसद में संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान तत्कालीन मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जवडेकर जी ने स्पष्ट किया था कि संशोधन का उद्देश्य उन शिक्षकों को अवसर देना है जिनकी नियुक्ति हो चुकी है, लेकिन उनके पास निर्धारित शैक्षणिक अथवा व्यावसायिक योग्यता नहीं है। इसलिए यदि अधिनियम की किसी व्याख्या के कारण वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षक भी इसके दायरे में आ रहे हैं, तो संसद में संशोधन कर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। संघ ने यह भी बताया कि टीईटी के लिए पहले वर्ष 2015 तक और बाद में संशोधन कर वर्ष 2019 तक छूट प्रदान की गई थी। वर्ष 2019 के बाद न तो केंद्र सरकार और न ही राज्य सरकार द्वारा ऐसे शिक्षकों के विरुद्ध कोई कार्रवाई की गई तथा न ही परीक्षा संबंधी कोई निर्देश जारी हुए। इससे स्पष्ट है कि सरकार की मंशा पूर्व नियुक्त शिक्षकों को पुनः टीईटी के दायरे में लाने की नहीं थी। प्रतिनिधिमंडल ने सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल से आग्रह किया कि वे इस विषय को संसद में उठाकर आरटीई अधिनियम में आवश्यक संशोधन कराने की पहल करें, ताकि वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को न्याय मिल सके तथा उन्हें अनावश्यक मानसिक तनाव और असमंजस से राहत मिले। ज्ञापन सौंपने के दौरान एस.आर. चौधरी, संतोष निंभोरे, विजेश राठोड, नंदकिशोर मोरे, कमलेश लोखंडे, अतुल उइके, जयराम निराले सहित बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे। सभी ने केंद्र सरकार से शीघ्र विधायी संशोधन कर इस विषय का स्थायी समाधान करने की मांग की । उक्त जानकारी जिला संयोजक संतोष निम्भोरे ने दी|