डोलारी सरकार का 79वां जन्मोत्सव: गुरुभक्ति से जगमग होगा
खरगोन जिला ब्यूरो चीफ जीतू पटेल लोकेशन बड़वाह / डोलारी आश्रम में,बड़वाह सनावद कुलदीप सिंह अरोरा।बड़वाह। परम पूज्य संत डोलारी वाले बाबा का 79वां जन्मोत्सव 29 जून को उनके भक्तों द्वारा श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाया जाएगा। स्वामी चंद्रबिंदु, विजयानंद, सुभाष चंद जैन और डोलारी सरकार जैसे नामों से प्रसिद्ध बाबा का जीवन आध्यात्मिक साधना और सेवा से जुड़ा रहा है।बाबा का जन्म 29 जून 1947 को जयपुर में हुआ था। युवा अवस्था में ही उन्होंने गृहस्थ जीवन त्यागकर संत मार्ग अपनाया और साधना के लिए नर्मदा तट की ओर आए। वर्ष 1969-71 के बीच बड़वाह क्षेत्र में आगमन के बाद उन्होंने नर्मदा के उत्तर तट स्थित घने जंगलों में साधना स्थल की तलाश की। इसी दौरान उनका संपर्क मुकुंदलाल जी और मालिकराम जी वाधवा जैसे सेवाभावी लोगों से हुआ, जिन्होंने डोलारी आश्रम की स्थापना में सहयोग किया।कोटेश्वर के पीछे पहाड़ी क्षेत्र में बनी कुटिया ही आगे चलकर डोलारी आश्रम के रूप में प्रसिद्ध हुई। वर्षों तक बाबा ने यहां ध्यान-साधना और आध्यात्मिक जीवन व्यतीत किया। बाद में उनका संपर्क आंध्र प्रदेश के आरमोर क्षेत्र के आश्रम से भी हुआ, जहां उन्हें चंद्रबिंदु स्वामी के नाम से जाना जाता था।बाबा आधुनिक विचारों वाले संत माने जाते थे। वे ओशो के विचारों से भी प्रभावित रहे। उनके भक्तों के अनुसार बाबा में अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा थी और वे कई बार ऐसी बातें बता देते थे जो बाद में सच साबित होती थीं। उनके जीवन से जुड़े कई अनुभव आज भी भक्तों के बीच श्रद्धा के साथ बताए जाते हैं।बाबा का सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान भाव था। वे विभिन्न धार्मिक स्थलों से जुड़े रहे और हर वर्ग के लोगों को मार्गदर्शन देते रहे। उनके सरल जीवन, प्रभावी व्यक्तित्व और आध्यात्मिक प्रभाव के कारण बड़ी संख्या में लोग उनसे जुड़े।बाबा के जन्मदिन आयोजन की शुरुआत लगभग वर्ष 1997 से हुई थी, जो बाद में निरंतर परंपरा बन गई। उनके प्रमुख भक्तों में सनावद के प्रवीण सोलंकी सहित कई श्रद्धालु आज भी डोलारी आश्रम से जुड़े हुए हैं।13 जुलाई 2012 को बाबा ने अपना भौतिक शरीर त्याग दिया, लेकिन भक्तों का मानना है कि उनकी आध्यात्मिक उपस्थिति आज भी डोलारी आश्रम में महसूस होती है। आश्रम की व्यवस्थाएं उनके भक्त श्री सी. चंद्रमौली जी द्वारा संभाली जा रही हैं।डोलारी सरकार के जीवन से जुड़े अनुभव और संस्मरण आज भी भक्तों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। जितने भक्त, उतने अनुभव—यही बाबा के आध्यात्मिक जीवन की विशेष पहचान रही है।
