अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 थीम ‘योग फॉर हेल्दी एजिंग (स्वस्थ एवं सक्रिय वृद्धावस्था के लिए योग)” का संदेश दे रहा है गायत्री मंदिर गुना का विशेष योग अभियान* सही मार्गदर्शन में किया गया योग से वैज्ञानिक, स्वास्थ्य संबंधी, सामाजिक और आध्यात्मिक लाभ हमें पूर्ण रूप से मिलते हैं:- योगाचार्य महेश पाल गुना

। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून 2026 के उपलक्ष्य में भारत सरकार के आयुष मंत्रालय द्वारा जारी किए गए कॉमन योग प्रोटोकॉल (CYP) के अनुसार गायत्री मंदिर गुना में प्रतिदिन विशेष योग प्रशिक्षण एवं जागरूकता सत्रों का आयोजन किया जा रहा है। इस विशेष योग अभियान का संचालन प्रतिष्ठित योगाचार्य महेश पाल द्वारा किया जा रहा है, जिसमें बच्चों, युवाओं, महिलाओं एवं वरिष्ठ नागरिकों को योग के वैज्ञानिक, शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक लाभों के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी जा रही है। योगाचार्य महेश पाल ने बताया कि इस 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 की थीम ‘योग फॉर हेल्दी एजिंग (स्वस्थ एवं सक्रिय वृद्धावस्था के लिए योग)’ है, जो योग के माध्यम से जीवनभर स्वास्थ्य, संतुलन और गुणवत्ता पूर्ण जीवन का संदेश देती है, यह थीम इस बात पर केंद्रित है कि योग केवल युवाओं के लिए नहीं, बल्कि जीवन के प्रत्येक चरण में स्वास्थ्य, संतुलन, गतिशीलता, मानसिक शांति और आत्मनिर्भरता बनाए रखने का प्रभावी माध्यम है। विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों के लिए योग स्वस्थ, सक्रिय और सम्मानजनक जीवन जीने में सहायक है। है। योग केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य का माध्यम नहीं बल्कि संपूर्ण समाज और विश्व के कल्याण का मार्ग है। उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली, अनियमित भोजन, तनाव, प्रदूषण, मोबाइल और कंप्यूटर पर अत्यधिक निर्भरता के कारण मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा, थायरॉयड, पीसीओडी, अवसाद, अनिद्रा और हृदय रोग जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। योग इन सभी समस्याओं के नियंत्रण और रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। अगर योग अभ्यास को एक सही मार्गदर्शन में किया जाए, भारत सरकार के आयुष मंत्रालय द्वारा जारी कॉमन योग प्रोटोकॉल में शरीर, मन और प्राण के संतुलित विकास के लिए विभिन्न योग अभ्यासों को सम्मिलित किया गया है। इसमें प्रार्थना, सूक्ष्म व्यायाम, ताड़ासन, वृक्षासन, त्रिकोणासन, भद्रासन, वज्रासन, भुजंगासन, शलभासन, सेतुबंधासन, अर्ध हलासन, शवासन, कपालभाति शोधन क्रिया, अनुलोम-विलोम, नाड़ी शोधन, भ्रामरी तथा ध्यान जैसे अभ्यास शामिल हैं। इन अभ्यासों से शरीर की मांसपेशियों में लचीलापन बढ़ता है, रीढ़ मजबूत होती है, फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ती है, रक्त संचार बेहतर होता है तथा मानसिक तनाव में कमी आती है। नियमित योगाभ्यास शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाकर जीवनशैली जनित रोगों से सुरक्षा प्रदान करता है। आधुनिक शोधों में यह सिद्ध हो चुका है कि नियमित योगाभ्यास से शरीर में तनाव उत्पन्न करने वाले हार्मोन कॉर्टिसोल का स्तर कम होता है तथा सेरोटोनिन और एंडोर्फिन जैसे सकारात्मक हार्मोन बढ़ते हैं। इससे मानसिक शांति, सकारात्मक सोच और भावनात्मक संतुलन प्राप्त होता है। प्राणायाम के अभ्यास से फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है और शरीर की प्रत्येक कोशिका तक पर्याप्त ऑक्सीजन पहुंचती है। इससे हृदय रोग, अस्थमा, एलर्जी तथा श्वसन संबंधी समस्याओं में लाभ मिलता है। ध्यान अभ्यास मस्तिष्क की कार्यक्षमता को बढ़ाकर स्मरण शक्ति, एकाग्रता और निर्णय क्षमता को बेहतर बनाता है। आज के बच्चों का अधिकांश समय मोबाइल, टीवी और डिजिटल उपकरणों में व्यतीत हो रहा है, जिससे शारीरिक गतिविधियां कम हो रही हैं। योग बच्चों के शारीरिक विकास, स्मरण शक्ति, एकाग्रता, आत्मविश्वास और अनुशासन को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। नियमित योगाभ्यास से बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है और वे मानसिक तनाव एवं परीक्षा संबंधी दबाव का बेहतर सामना कर पाते हैं। युवा वर्ग आज तनाव, प्रतिस्पर्धा, अनियमित दिनचर्या और गलत खानपान की समस्याओं से जूझ रहा है। योग शरीर में ऊर्जा, सहनशक्ति, मानसिक स्पष्टता और भावनात्मक संतुलन विकसित करता है।नियमित योगाभ्यास मोटापा, पीसीओडी, थायरॉयड, मधुमेह तथा उच्च रक्तचाप जैसी समस्याओं को नियंत्रित करने में सहायक है। योग युवाओं को नशामुक्त जीवन, सकारात्मक सोच और स्वस्थ जीवनशैली की ओर प्रेरित करता है बढ़ती आयु के साथ शरीर की मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं तथा जोड़ों में जकड़न, कमर दर्द, गठिया, उच्च रक्तचाप और हृदय संबंधी समस्याएं बढ़ने लगती हैं। योग वरिष्ठ नागरिकों को शारीरिक और मानसिक रूप से सक्रिय बनाए रखने में मदद करता है। सरल आसन, प्राणायाम और ध्यान के माध्यम से वरिष्ठ नागरिक बेहतर संतुलन, लचीलापन, मानसिक शांति और आत्मनिर्भरता प्राप्त कर सकते हैं योगाचार्य महेश पाल ने बताया कि केवल योगाभ्यास पर्याप्त नहीं है, बल्कि संतुलित आहार और उचित दिनचर्या भी आवश्यक है। आयुर्वेद और योग दोनों ही सात्विक भोजन को स्वास्थ्य का आधार मानते हैं। भोजन में ताजे फल, हरी सब्जियां, अंकुरित अनाज, मोटे अनाज, पर्याप्त पानी तथा प्राकृतिक खाद्य पदार्थों का समावेश करना चाहिए। अत्यधिक तला-भुना, जंक फूड, शीतल पेय और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए। वैज्ञानिक दृष्टि से संतुलित भोजन शरीर को आवश्यक विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट प्रदान करता है, जिससे रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है और शरीर की कोशिकाओं का बेहतर विकास होता है। योग केवल व्यायाम नहीं बल्कि जीवन जीने की एक समग्र पद्धति है। यह शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करता है। योग के माध्यम से व्यक्ति स्वयं स्वस्थ रहता है और परिवार, समाज तथा राष्ट्र के स्वास्थ्य में भी योगदान देता है गायत्री मंदिर गुना में चल रहे विशेष योग सत्र में नगर के सभी योग प्रेमियों, विद्यार्थियों, महिलाओं एवं वरिष्ठ नागरिकों से अधिक से अधिक संख्या में सहभागिता करने का आह्वान किया गया है। योगाचार्य महेश पाल ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे 21 जून अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर सामूहिक योग कार्यक्रम में शामिल होकर “एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य” के संकल्प को साकार करें तथा योग को अपनी दैनिक जीवनशैली का अभिन्न अंग बनाएं।