विसर्जन नहीं, पुनः स्थापना की पहल! गुजराती गणेश मंडल ने पेश की पर्यावरण संरक्षण की मिसाल

रमाकांत मोरे *ताप्ती सेवा समिति ने गुजराती गणेश मंडल जड़ियावाड़ा की पहल का किया अभिनंदन*बुरहानपुर। गणेश उत्सव हमारी धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। समय के साथ उत्सव का स्वरूप बदला है, ऐसे में अपनी धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाते हुए पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी निभाना भी आवश्यक है। इसी भावना के साथ गुजराती गणेश मंडल, जड़ियावाड़ा ने इस वर्ष गणेश प्रतिमा का विसर्जन करने के बजाय उसे दूसरे गणेश मंडल को सौंपकर एक प्रेरणादायी पहल की है। इससे अगले वर्ष भी इस प्रतिमा की स्थापना कर श्रद्धालु दर्शन कर सकेंगे और प्रतिमा का पुनः उपयोग हो सकेगा । इस सराहनीय पहल के लिए ताप्ती सेवा समिति, बुरहानपुर द्वारा मंडल के पदाधिकारियों एवं सदस्यों का सम्मान कर उन्हें प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया । मंडल के सदस्यों ने बताया कि इस निर्णय से पहले उन्होंने अपने वरिष्ठजनों और पंडितजी से विचार-विमर्श किया था। उन्हें बताया गया कि बड़ी गणेश प्रतिमा दर्शनीय होती है, जबकि घरों एवं मंडलों में विराजित छोटी प्रतिमा को मंगलमूर्ति के रूप में पूजन के बाद विसर्जित किया जा सकता है। बड़ी प्रतिमा को किसी अन्य मंडल को सौंपकर अगले वर्ष पुनः स्थापना करने में कोई धार्मिक बाधा नहीं है। इसी मार्गदर्शन और पर्यावरण संरक्षण की भावना से मंडल ने यह निर्णय लिया। ताप्ती सेवा समिति की अध्यक्ष सरिता भगत ने कहा कि गणेश उत्सव हमारी धार्मिक परंपरा का अभिन्न अंग है, जिसे हम कई वर्षों से श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाते आ रहे हैं। समय के साथ उत्सव का स्वरूप बदलता गया है। लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने जिस उद्देश्य से सार्वजनिक गणेश उत्सव की परिकल्पना की थी, उस समय अंग्रेजों के शासन में सामाजिक एकता और स्वतंत्रता की भावना को मजबूत करने के लिए धार्मिक आयोजनों का माध्यम अपनाया गया था।उन्होंने कहा कि उस दौर में स्थापित गणेश प्रतिमाएं मिट्टी की ही रही होंगी, ऐसा हमारा मानना है। आज हम उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए मिट्टी की प्रतिमाओं के स्थान पर पीओपी की प्रतिमाओं की स्थापना करने लगे हैं। ऐसे में हमें अपनी परंपराओं के मूल भाव को समझते हुए पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी सकारात्मक बदलाव लाने की आवश्यकता है। गुजराती गणेश मंडल की यह पहल समाज को एक नई दिशा देने वाली है। समिति सदस्य राजेश भगत ने कहा कि बुरहानपुर का गणेश उत्सव देश और प्रदेश में अपनी विशेष पहचान रखता है। सोशल मीडिया पर गणेश स्थापना से लेकर विशाल प्रतिमाओं और आकर्षक झांकियों तक की चर्चा होती रही है। लेकिन इस बार गुजराती गणेश मंडल की यह पहल विसर्जन के बाद भी पूरे शहर में चर्चा का विषय बनी हुई है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार उत्सव के दौरान भव्यता और आकर्षण की चर्चा होती है, उसी प्रकार पर्यावरण संरक्षण के लिए किए गए । इस सकारात्मक प्रयास की चर्चा भी समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचनी चाहिए। यह पहल दूसरे गणेश मंडलों को भी प्रेरित करेगी। इस सराहनीय निर्णय के लिए मंडल के सभी सदस्य बधाई के पात्र हैं।इस अवसर पर ताप्ती सेवा समिति के संरक्षक राजीव खेडकर ने समिति के प्रमुख एवं वरिष्ठ सदस्यों का सम्मान करते हुए गुजराती गणेश मंडल की इस प्रेरणादायी पहल के लिए प्रशस्ति पत्र प्रदान किया तथा सभी को बधाई दी । समिती सदस्य विजय राठौर ने उपस्थित सभी लोगों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में राजकुमार वच्छानी सहित समिति के अन्य सदस्य भी उपस्थित रहे। यह पहल केवल एक प्रतिमा के पुनः उपयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संदेश देती है कि आस्था के साथ प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाकर भी धार्मिक परंपराओं को पूरे उत्साह से आगे बढ़ाया जा सकता है।