मूक-बधिर विद्यार्थियों को विधिक साक्षरता की जानकारी दी

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, आलीराजपुर (म.प्र.)* द्वारा माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश / अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, आलीराजपुर की अध्यक्षता में शासकीय मूक-बधिर आश्रम, कुण्ड बड़ी में विधिक साक्षरता जन-जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।कार्यक्रम में श्री जय पाटीदार, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं श्रीमती शक्ति रावत, जिला विधिक सहायता अधिकारी द्वारा सहभागिता की गई। श्री जय पाटीदार ने मूक-बधिर विद्यार्थियों को *शिक्षा का अधिकार अधिनियम* के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि शिक्षा प्रत्येक व्यक्ति के लिए आवश्यक है। शिक्षा के बिना कोई भी देश समुचित विकास नहीं कर सकता। सामाजिक न्याय, शांति-सद्भाव, पर्यावरण संरक्षण, सांस्कृतिक जीवन और आर्थिक विकास के लिए शिक्षा अनिवार्य है। भारतीय संसद द्वारा पारित शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत 6 से 18 वर्ष तक के बच्चों को निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार प्राप्त है।जिला विधिक सहायता अधिकारी श्रीमती शक्ति रावत द्वारा

*बाल विवाह* के संबंध में जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की और 21 वर्ष से कम उम्र के लड़के का विवाह बाल विवाह कहलाता है। यह एक सामाजिक बुराई है। भारत के बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के अनुसार विवाह हेतु लड़की की आयु 18 वर्ष और लड़के की आयु 21 वर्ष होना अनिवार्य है। गरीबी, दहेज, शिक्षा का अभाव और रूढ़िवादी मान्यताएँ इसके प्रमुख कारण हैं। इस पर अंकुश लगाने के लिए कानूनों के प्रति जागरूकता और मूल कारणों पर कार्य करना आवश्यक है।कार्यक्रम में *निःशुल्क विधिक सहायता एवं शासन की योजना* की भी जानकारी भी दी गई। इस अवसर पर मूक-बधिर विद्यार्थी एवं विद्यालय के शिक्षकगण उपस्थित रहे।