कसरावद ,नर्मदा परिक्रमावासी व धर्म जागरण के क्षेत्र में योगदान देने वाले तीन श्रद्धालुओं का हुआ सम्माननर्मदा परिक्रमा से मिलता है मां का सानिध्य, जीवन में एक बार जरूर करें यात्रा: श्रद्धालु

।। रिपोर्टर नवीन रायली कसरावद। जीवन में एक बार मां नर्मदा की परिक्रमा अवश्य करनी चाहिए। जब कोई श्रद्धालु पूरी श्रद्धा, लगन और सेवा भाव के साथ परिक्रमा करता है तो उसे हर पल मां नर्मदा के सानिध्य का अनुभव होता है। चाहे यात्रा पैदल की जाए या दोपहिया एवं चारपहिया वाहन से, मां नर्मदा के प्रति समर्पित श्रद्धालुओं की भक्ति और आस्था निराली होती है। यह बात नर्मदा परिक्रमा कर चुके श्रद्धालुओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए कही।बुधवार को नगर के प्राचीन श्री चिंतामणि हनुमान मंदिर एवं श्री राधाकृष्ण गोपाल मंदिर में आयोजित धर्म जागरण कार्यक्रम में नर्मदा परिक्रमा करने वाले श्रद्धालुओं ने अपने संस्मरण सुनाए। कार्यक्रम के दौरान नवगठित श्री चिंतामणि हनुमान मंदिर सेवा समिति द्वारा धर्म, भक्ति एवं समाज जागरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले तीन श्रद्धालुओं का सामूहिक सम्मान किया गया।कार्यक्रम में पूर्व जिला सहकारी केंद्रीय बैंक प्रबंधक रमेश तारे सेवानिवृत्ति के बाद पिछले 15 वर्षों से नर्मदा तट स्थित नावडाटौड़ी में मां नर्मदा की आराधना एवं साधना कर रहे हैं। उन्होंने अपने जीवनकाल में तीन बार संपूर्ण नर्मदा परिक्रमा की है। वर्तमान में वे परिवार से दूर रहकर प्रतिदिन मां नर्मदा की सेवा और साधना में समय व्यतीत कर रहे हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं को बताया कि नर्मदा परिक्रमा केवल यात्रा नहीं बल्कि आत्मिक शुद्धि और ईश्वर से जुड़ने का माध्यम है।वहीं नगर सहित क्षेत्र में पिछले चार दशकों से धर्म जागरण की अलख जगा रहे श्री चिंतामणि सुंदरकांड भजन मंडल के प्रमुख शंकरराव सराफ गुरुजी का भी सम्मान किया गया

। सराफ गुरुजी वर्षों से संगीतबद्ध सुंदरकांड पाठ के माध्यम से लोगों में धार्मिक चेतना का संचार कर रहे हैं। उनके प्रयासों से बड़ी संख्या में युवा और बुजुर्ग धार्मिक गतिविधियों से जुड़ रहे हैं। श्रद्धालुओं ने कहा कि उनका योगदान समाज में भक्ति और संस्कारों को मजबूत करने वाला है।कार्यक्रम में 78 वर्षीय बुजुर्ग किसान गजु दादा पावटे का सम्मान विशेष रूप से किया गया। गजु दादा ने साढ़े तीन वर्षों में पैदल नर्मदा परिक्रमा पूर्ण की। उन्होंने बताया कि कठिन परिस्थितियों और बढ़ती उम्र के बावजूद मां नर्मदा की कृपा से उनकी यात्रा सफल हुई। अकेले पैदल परिक्रमा कर उन्होंने अटूट श्रद्धा, दृढ़ संकल्प और भक्ति का परिचय दिया। उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं को भी जीवन में एक बार नर्मदा परिक्रमा करने की प्रेरणा दी।वक्ताओं ने कहा कि नर्मदा परिक्रमा भारतीय संस्कृति की अनूठी आध्यात्मिक परंपरा है, जो श्रद्धालुओं को संयम, सेवा, त्याग और आत्मविश्वास का संदेश देती है। परिक्रमा के दौरान मिलने वाले अनुभव व्यक्ति के जीवन को नई दिशा प्रदान करते हैं।इसी क्रम में श्री बालकृष्ण हनुमान मंदिर एवं सनातन धर्म सेवा समिति द्वारा भी नर्मदा भक्तों एवं धर्म जागरण में सक्रिय श्रद्धालुओं का सम्मान किया गया।कार्यक्रम में मंदिर पुजारी पंडित राजकुमार गावशिंदे, पंडरी कुशवाह, जगदीश राठौड़, हेमंत पालीवाल, डॉ. राजेश तारे, विक्रांत मंडलोई, रंजीत पाटीदार, संजय शर्मा, दीपक चौरे, राजू कुशवाह, अमित कोठारी, महेश चौहान, विशाल महाजन, जगदीश वर्मा यशवंत राठौर, महेंद्र चौहान, सुनील कुमरावत, रवि राठौर सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।