स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी परिवारों को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करे सरकार

रमाकांत मोरे *संगठन विस्तार और अधिकारों पर बनी कार्य योजना**नई दिल्ली।* स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी परिवार समिति की सितंबर 2026 की अर्धवार्षिक राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, रायसीना रोड, सेन्ट्रल सेक्रटरी क्षेत्र नई दिल्ली में भव्य रूप से संपन्न हुई। बैठक में देश के 21 राज्यों से 42 राष्ट्रीय एवं प्रादेशिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया।समिति के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष *सुनील गोपाल दास गुजराती* ने बताया कि बैठक की अध्यक्षता समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष *श्री देशबंधु जी* ने की। मंच पर राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष *श्री द्विजेंद्र मोहन शर्मा*, राष्ट्रीय महासचिव *श्री जितेंद्र रघुवंशी*, कार्यकारी महासचिव *श्री चंद्रप्रकाश बाजपेई (पूर्व विधायक)* तथा राष्ट्रीय संगठन सचिव *श्री कपूर सिंह दलाल* विराजित थे।*मातृशक्ति और युवा शक्ति को मिली नई जिम्मेदारी*स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी परिवारों की प्रथम पीढ़ी की वर्तमान आयु अवस्था को देखते हुए संगठन ने मातृशक्ति और युवा शक्ति को आगे लाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया। जमीनी स्तर पर संगठन को और अधिक मजबूत एवं सक्रिय बनाने के उद्देश्य से मातृशक्ति मंच, युवा मंच के नए पदाधिकारियों तथा विभिन्न प्रदेश पदाधिकारियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा असम यूनिट की ओर से असम का परंपरागत अंग वस्त्र ‘पटका’ पहनाकर सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों का सम्मान किया गया।*राष्ट्रीय महासचिव का उद्बोधन*राष्ट्रीय महासचिव जितेंद्र रघुवंशी ने मातृशक्ति एवं युवा शक्ति को संगठन की सबसे महत्वपूर्ण सक्रिय शक्ति बताया। उन्होंने कहा कि देश के प्रत्येक राज्य और प्रत्येक स्वतंत्रता सेनानी परिवार तक संगठन की पहुंच कैसे सुनिश्चित की जाए तथा लगभग दो करोड़ उत्तराधिकारियों को एक सूत्र में कैसे पिरोया जाए, इस पर गंभीरता से विचार करना होगा। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा – “इस लोकतंत्र में हमारा अस्तित्व धीरे-धीरे समाप्त किया जा रहा है। एक ओर प्रधानमंत्री घोषणा करते हैं कि स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों का भारत बनाएंगे, वहीं दूसरी ओर उनके स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी परिवारों को राष्ट्रीय उत्सव अवसरों पर सम्मानित करना तो दूर विभिन्न शासकीय कार्यक्रमों में आमंत्रण पत्र देकर ससम्मान आमंत्रित से वंचित कर दरकिनार किया जाकर ‘अछूत’ की श्रेणी में रखा जा रहा है।”रघुवंशी ने बताया कि संगठन वर्तमान में 23 राज्यों में सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। संगठन द्वारा स्वतंत्रता सेनानी परिवारों के सम्मान, अधिकारों एवं हितों के साथ-साथ सामाजिक एवं जनहित के कार्यों में भी निरंतर सहयोग किया जा रहा है। प्रत्येक माह के प्रथम रविवार प्रातः 10 बजे आयोजित होने वाले संगठन के निर्धारित कार्यक्रम को देशभर से मिल रहे सहयोग पर भी विस्तृत चर्चा हुई।*अधिकारों के लिए रणनीति*बैठक में कार्यकारी अध्यक्ष द्विजेंद्र मोहन शर्मा ने विभिन्न राज्यों में स्वतंत्रता सेनानी परिवारों को उपलब्ध सम्मान एवं सुविधाओं की स्थिति पर विचार-विमर्श किया। विशेष रूप से पंजाब, उत्तराखंड, असम और छत्तीसगढ़ में लागू सरकारी प्रावधानों एवं अधिसूचना के संदर्भ में चर्चा हुई और अन्य राज्यों में भी समान सम्मान-सुविधाएं लागू करवाने के लिए भावी रणनीति तैयार करने पर जोर दिया गया।राष्ट्रीय अध्यक्ष देशबंधु जी ने कहा कि “स्वतंत्रता सेनानियों की विरासत केवल इतिहास का हिस्सा नहीं है, बल्कि उनके त्याग, संघर्ष, राष्ट्र प्रेम और सामाजिक जिम्मेदारी की भावनाओं को वर्तमान एवं आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना भी संगठन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।”राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुनील गुजराती ने युवा वर्ग को जोड़ने पर विशेष जोर दिया और बताया कि उन्होंने विद्यालयों में जागरूकता कार्यक्रम प्रारंभ कर दिया है तथा अब महाविद्यालयों के विद्यार्थियों को भी जोड़कर उन्हें स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदानों से अवगत कराया जाएगा।*बैठक में उपस्थित रहे**राष्ट्रीय उपाध्यक्ष* – मृगांक शेखर आनंद (उत्तरप्रदेश), चंद्रप्रकाश वाजपेई (छत्तीसगढ़), सुनील गोपालदास गुजराती (मध्य प्रदेश), सूबेदार विजेन्द्र सिंह (हरियाणा), ए. वेद रत्नम (तमिलनाडु), ओमप्रकाश मांझी (झारखंड), कमलचंद्र लहकर (असम), मोनोतोष दास (पश्चिम बंगाल), माल रेड्डी राजशेखर (तेलंगाना), संगठन सचिव कपूर सिंह दलाल (हरियाणा), संयुक्त सचिव अनुराग सिंह गौतम (उत्तराखंड), कोषाध्यक्ष आदित्य कुमार गहलोद (उत्तराखंड), प्रांतीय अध्यक्ष राजेश प्रताप सिंह (उत्तर प्रदेश), परमजीत सिंह टीवाना (पंजाब), सुषमा शर्मा (हरियाणा), नीलेश भाई कोठारी (महाराष्ट्र), डॉ. अमरनाथ (बिहार), दिव्याकांत झा (झारखंड), मातृशक्ति प्रदेश अध्यक्ष डॉ. उषा किरण बाजपेई (छत्तीसगढ़), शशि शर्मा (उत्तराखंड), परिणीता झा (झारखंड), कार्यकारिणी सदस्य राजा भैया मिश्रा (मध्य प्रदेश), सुरेश चंद्र बबेले (उत्तर प्रदेश), सुरेश चंद्रा सुयाल (उत्तराखंड), अरुण प्रताप सिंह (मध्य प्रदेश), महंत प्रजापति (उत्तर प्रदेश), कृष्ण प्रताप बघेल, अरुण प्रताप सिंह (मध्य प्रदेश), विजय कुमार तोमर (दिल्ली), आकाश खंडेलवाल (छत्तीसगढ़ अध्यक्ष प्रतिनिधि), अध्यक्ष हीरापुरी (झारखंड), डॉ. चंदन जायसवाल, योगेश कुमार (हरियाणा), सौमित्र तिवारी, संजय चौबे, अवधेश सिंह, अखिलेश पांडे, कबीर मोहम्मद तंबोली, मातृशक्ति मंच की राष्ट्रीय अध्यक्ष दीपा दास (पश्चिम बंगाल), युवा शक्ति राष्ट्रीय अध्यक्ष आदित्य प्रताप सिंह रघुवंशी (नई दिल्ली) सहित संगठन के सम्मानित सदस्य उपस्थित रहे।इसी दौरान कार्यकारिणी बैठक में उत्कृष्ट कार्य के लिए *सुनील गुजराती को सम्मान पत्र देकर सम्मानित* किया गया।बैठक का समापन राष्ट्रगान *जन-गण-मन* के साथ सभी का आभार व्यक्त करते हुए *26 अक्टूबर को अमरकंटक में आयोजित होने वाले स्वतंत्रता सेनानी सम्मेलन* में उपस्थिति के आह्वान के साथ किया गया।