चिराखान मे तेजा दशमी हर्षोल्लास के साथ मनाई गई,तेजाजी को चढ़ाएं गये निशान

संवाददाता जिला ब्यूरो ग्रामीण धार बदनावर से माही राठौड़ /*चिराखान। ग्रामीण क्षेत्रों में लोक देवता, जन जन के आराध्य, गौरक्षक, सर्पदंश पीड़ितों को जीवन दान देने वाले कलयुग के साक्षात देवता श्री सत्यवादी वीर तेजाजी महाराज के निर्वाण दिवस तेजा दशमी का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाई गया।गांव में स्थित श्री वीर तेजाजी महाराज मंदिर पर आकर्षक विद्युत सज्जा की गई ।अलसुबह से ही तेजाजी मंदिर पर श्रद्धालुओं का जन सैलाब उमड़ा यहां दर्शन का सिलसिला अलसुबह से देर शाम तक चलता रहा श्रद्धालुओं ने अपनी मन्नत पूरी होने पर ढोल ढमाको के साथ निशान (छतरियो) का चल समारोह निकाला गया एवं निशान चड़ाये गये।चल समारोह मे सरेआम सीताराम अखाड़े के कलाकारो द्वारा हेरतअंगेज करतब दिखाये गये।जिसमे बालिकाओं ने भी हैरत अंगेज करतब दिखाए जब नन्हीं-नन्हीं वीर बालिकाएं मैदान में उतरीं तो पूरा अखाड़ा जयकारों से गूंज उठा।हाथों में चमचमाती तलवारें, लाठी और बनेठी लेकर इन बालिकाओं ने जो शौर्य दिखाया, उसे देख हर दर्शक दंग रह गया। कभी बिजली की गति से बनेठी घुमाई, तो कभी तलवारबाजी के हैरतअंगेज करतब दिखाकर तलवार को ऐसे घुमाया जैसे हवा में आग की लकीरें खिंच रही हों।फुर्ती, साहस और आत्मविश्वास का ऐसा संगम कि बड़े-बड़ो को हैरान कर दिया। नन्हीं उम्र में इतना अद्भुत कौशल, ऐसा लगा जैसे स्वयं वीर तेजाजी महाराज का आशीर्वाद इन बालिकाओं पर बरस रहा हो।इन वीर बालिकाओं ने साबित कर दिया कि बेटियां अबला नहीं, सबला हैं – रणचंडी का रूप हैं।समस्त दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट और तेजाजी के जयकारों से इन नन्हीं वीरांगनाओं का उत्साहवर्धन किया।अखाड़े का विभिन्न मंचो द्वारा अंगवस्त्र भेट कर सम्मान किया गया। चल समारोह में ग्रामीणो द्वारा पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया।श्रद्धालुओं ने पूजन अर्चन कर निशान चढ़ाए। चल समारोह में तेजाजी महाराज की झांकी के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर आस्था प्रकट की।क्षेत्रभर से सैकड़ों श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और दर्शन वंदन किया जहा तेजाजी महाराज के पण्डे गोपाल सिंह तंवर द्वारा जतरा कर तांतीयां तोड़ने का दौर शुरू हुआ। जिसमे सर्प दंश से पीड़ित को बंधी हुई तांती तोड़ी गई।जहा उपस्थित श्रद्धालुओ को 101 किलो साबुदाने की खीर वितरित की गई जिसके लाभार्थी गोरिशंकर जायसवाल, गोविन्द मुकाती एवं नंदराम कतीजा रहे।तत्पशचात् महाआरती एवं महाप्रसादी वितरित की गई।महाप्रसादी के लाभार्थी तेजाजी मित्र मंडल रहे।