दादाजी धूनी दरबार में डेढ़ किलो सोना और 4 किलो चांदी चढ़ाने का दावा,51 दिन चले यज्ञ में 1.51 लाख किलो हवन सामग्री आहुति देने का दावा; संत शिवानंद महाराज को इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स का प्रमाण पत्र

नरेन्द्र राय रायसेन रायसेन/उदयपुरा। उदयपुरा के दादा धूनीवाले दरबार में चल रहे अनोखे धार्मिक आयोजन को लेकर इन दिनों चर्चा है। आयोजकों के मुताबिक 51 दिन चले यज्ञ के दौरान धूनी में करीब 1 लाख 51 हजार किलो हवन सामग्री अर्पित की गई। इसमें फल-फूल, मिठाई, कपड़े और 251 प्रकार की जड़ी-बूटियां शामिल थीं। इसके अलावा करीब डेढ़ किलो सोने और 4 से 5 किलो चांदी के आभूषण भी धूनी में चढ़ाए जाने का दावा किया गया है।

आयोजकों के अनुसार इस धार्मिक आयोजन की शुरुआत 29 जुलाई 2026 को गुरु पूर्णिमा से हुई थी।जो 17 सितंबर तक चला। इसके बाद 21 दिवसीय नर्मदा संकीर्तन का आयोजन 8 अक्टूबर तक चलने की बात कही गई है। आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और 24 घंटे प्रसादी वितरण चलता रहा।संत शिवानंद को विश्व रिकॉर्ड का प्रमाण पत्र….आयोजन के दौरान संत शिवानंद महाराज को इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स की ओर से प्रमाण पत्र दिए जाने की जानकारी दी गई। आयोजकों का दावा है कि 51 दिन में इतनी बड़ी मात्रा में सामग्री धूनी हवन में अर्पित किए जाने का यह विश्व रिकॉर्ड है। हालांकि रिकॉर्ड संस्था की ओर से दर्ज किए गए मानदंड और सत्यापन की विस्तृत जानकारी आयोजकों ने सार्वजनिक रूप से नहीं बताई है।हम‘किसी से चंदा नहीं लेते’…संत शिवानंद महाराज का कहना है कि वे यह धार्मिक आयोजन किसी व्यक्ति से चंदा या आर्थिक सहयोग लेकर नहीं करते। उन्होंने आयोजन को दादा धूनी वाले महाराज और मां नर्मदा की असीम कृपा बताया

। संत श्री महाराज के मुताबिक बचपन से ही वे इस तरह के धार्मिक आयोजन करते आ रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे।महाराज ने दावा किया कि अलग-अलग स्थानों पर सालभर में चार से पांच ऐसे आयोजन होते हैं और बड़े स्तर पर प्रसादी वितरण के बावजूद भोजन कभी कम नहीं पड़ता।

उन्होंने यह भी कहा कि धूनी में अर्पित किए गए सोने-चांदी के आभूषण जलकर भस्म स्वरूप में परिवर्तित होते हैं, जिसे बाद में मां नर्मदा में विसर्जित किया जाता है।‘ऐसा आयोजन कोई और कराए तो 21 करोड़ दूंगा’….संत शिवानंद महाराज ने आयोजन को लेकर चुनौती भी दी। उन्होंने कहा कि यदि दुनिया में कोई व्यक्ति इसी तरह का आयोजन कराकर दिखाता है तो वे उसे 21 करोड़ रुपए का नकद पुरस्कार देंगे। संत श्री महाराज ने कहा कि उनके लिए धूनी केवल अग्नि नहीं, बल्कि साक्षात मां नर्मदा का स्वरूप है और श्रद्धालु इसमें कपड़ा,

सोना-चांदी आदि श्रृंगार के रूप में अर्पित करते हैं।आयोजन से जुड़े लोगों ने इसे धार्मिक आस्था और दादा धूनी वाले महाराज की कृपा से जोड़कर देखा है। वहीं, सोने-चांदी की मात्रा, हवन सामग्री के कुल वजन और विश्व रिकॉर्ड से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं हो सकी है। यह आयोजन श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय है, इसलिए इसमें किए गए धार्मिक दावों की वैज्ञानिक या स्वतंत्र मीडिया पुष्टि नहीं की गई है।
