मध्य प्रदेश में तबादला सीजन के बीच पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने पंचायत सचिवों के स्थानांतरण को लेकर नई गाइडलाइन जारी

मध्य प्रदेश में तबादला सीजन के बीच पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने पंचायत सचिवों के स्थानांतरण को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है। सरकार का कहना है कि इस नई व्यवस्था का उद्देश्य पंचायतों में पारदर्शिता बढ़ाना, प्रशासनिक निष्पक्षता सुनिश्चित करना और रिश्तेदारी आधारित प्रभाव को समाप्त करना है। नई नीति का असर प्रदेश के 23 हजार से अधिक पंचायत सचिवों पर पड़ेगा।नई गाइडलाइन के अनुसार अब कोई भी पंचायत सचिव अपने गृहग्राम या ससुराल की ग्राम पंचायत में पदस्थ नहीं रह सकेगा। इतना ही नहीं, यदि किसी पंचायत में सचिव का कोई नजदीकी रिश्तेदार सरपंच या उपसरपंच निर्वाचित होता है, तो संबंधित सचिव को वहां से हटाकर दूसरी पंचायत में पदस्थ किया जाएगा। विभाग का मानना है कि इससे हितों के टकराव की स्थिति कम होगी और पंचायतों में निष्पक्ष कार्यप्रणाली को बढ़ावा मिलेगा।सरकार ने लंबे समय से एक ही पंचायत में कार्यरत सचिवों को लेकर भी सख्त रुख अपनाया है। नई नीति के तहत जो पंचायत सचिव 10 वर्ष या उससे अधिक समय से एक ही पंचायत में जमे हुए हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर स्थानांतरित किया जाएगा। यदि ऐसे कर्मचारियों की संख्या अधिक हुई तो सबसे अधिक अवधि से पदस्थ सचिवों को पहले हटाया जाएगा।विभाग के अनुसार अतीत में कई शिकायतें सामने आई थीं, जिनमें पंचायत सचिवों और जनप्रतिनिधियों की मिलीभगत से वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोप लगे थे। इन्हीं शिकायतों और अनुभवों को ध्यान में रखते हुए तबादला नीति में यह बदलाव किया गया है।नई गाइडलाइन में यह भी प्रावधान किया गया है कि भ्रष्टाचार, वित्तीय गड़बड़ी, गंभीर शिकायत, अनुशासनहीनता, लोकायुक्त या ईओडब्ल्यू जांच जैसे मामलों में तबादला प्रतिबंध अवधि के दौरान भी पंचायत सचिवों का स्थानांतरण किया जा सकेगा। इसके लिए विभागीय मंत्री की स्वीकृति आवश्यक होगी।विभाग ने सभी जिलों को निर्देश दिए हैं कि निर्धारित समयसीमा में नई नीति के अनुसार स्थानांतरण प्रक्रिया पूरी कर पंचायत प्रशासन को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जाए।