हरतालिका तीज पर बन रहा ब्रह्म योग-चित्रा नक्षत्र का संयोग, 14 सितंबर को होगा शिव-पार्वती का विशेष पूजन

नरेन्द्र राय रायसेन रायसेन।भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर मनाया जाने वाला हरतालिका तीज पर्व इस वर्ष 14 सितंबर, सोमवार को श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाएगा। इस दिन तृतीया तिथि के साथ चित्रा नक्षत्र और ब्रह्म योग का संयोग रहेगा।धार्मिक मान्यता के अनुसार हरतालिका तीज भगवान शिव और माता पार्वती के अटूट प्रेम, तपस्या, संकल्प और दांपत्य जीवन का प्रतीक है। सौजना के धर्मशास्त्री एवं ज्योतिषाचार्य पं. ओमप्रकाश शुक्ला राममोहन चतुर्वेदी ने बताया कि हरतालिका तीज पर महिलाएं पति की दीर्घायु, अखंड सौभाग्य, सुखी दांपत्य और परिवार की मंगलकामना से व्रत रखती हैं। वहीं अविवाहित कन्याएं योग्य एवं मनोवांछित जीवनसाथी की कामना से यह व्रत करती हैं। पं. शुक्ला के अनुसार इस बार हरतालिका तीज सोमवार को ब्रह्म योग और चित्रा नक्षत्र में पड़ रही है। पंचांग गणना के अनुसार दोनों का प्रभाव दिन के प्रथम भाग में रहेगा। तृतीया तिथि पर शिव-पार्वती की पूजन और व्रत संकल्प इस पर्व में विशेष महत्व रखता है।*मिट्टी से शिव-पार्वती की प्रतिमा बनाकर पूजा की परंपरा*—व्रतधारी महिलाएं सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद निराहार व्रत का संकल्प लेंगी। पूजा स्थल को स्वच्छ कर भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश का पूजन किया जाएगा। परंपरा के अनुसार मिट्टी अथवा बालू से शिव-पार्वती की प्रतिमा बनाकर भी पूजा की जाती है। भगवान शिव को जल, बेलपत्र, अक्षत, पुष्प और धतूरा अर्पित किए जाते हैं। जबकि माता पार्वती को कुमकुम, अक्षत, पुष्प, फल, वस्त्र और सुहाग सामग्री चढ़ाई जाती है। इसके बाद हरतालिका तीज व्रत कथा, मंत्र जाप और आरती की जाती है।*निर्जला व्रत की भी परंपरा—*हरतालिका तीज को कठिन व्रतों में माना जाता है। अनेक महिलाएं श्रद्धानुसार निर्जला व्रत रखती हैं और अगले दिन विधि-विधान से पारण करती हैं। पं. शुक्ला ने कहा कि स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर अपनी शारीरिक क्षमता और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ही व्रत रखना चाहिए। व्रत का उद्देश्य केवल उपवास नहीं, बल्कि श्रद्धा, संयम और शिव-पार्वती के आदर्श दांपत्य का स्मरण करना है।इस मंत्र का करें जाप ….हरतालिका तीज पर भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करते हुए ॐ नमः शिवाय और ॐ उमायै नमः मंत्र का जाप किया जा सकता है। रात्रि में शिव-पार्वती का स्मरण, भजन-कीर्तन और रात्रि जागरण की भी परंपरा है। पं. शुक्ला चतुर्वेदी ने कहा कि हरतालिका तीज श्रद्धा, तपस्या, संकल्प और विश्वास का पर्व है। इस दिन परिवार में सुख-शांति, प्रेम, सौहार्द और मंगल की कामना से शिव-पार्वती की आराधना करनी चाहिए।