बैंकिंग व्यवस्था में उपभोक्ता परेशान, जिम्मेदारी तय करने की जरूरत- प्रदेश अध्यक्ष अरूण तिवारी

रमाकांत मोरे*खाते से कटौती से लेकर ऋण, डिजिटल ट्रांजेक्शन और शिकायतों के निपटारे तक बढ़ रहीं समस्याएं**उपभोक्ता अधिकार संगठन के प्रदेश अध्यक्ष अरुण कुमार तिवारी ने RBI और शासन से प्रभावी हस्तक्षेप की मांग*मध्य प्रदेश। बैंकिंग व्यवस्था को अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है, लेकिन बैंकिंग सेवाओं का इस्तेमाल करने वाले आम उपभोक्ताओं को यदि अपनी ही राशि, खाते और बैंकिंग सेवाओं से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए बार-बार शाखाओं और अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ें, तो यह गंभीर चिंता का विषय है।उपभोक्ता अधिकार संगठन के प्रदेश अध्यक्ष अरुण कुमार तिवारी ने बैंकिंग व्यवस्था में उपभोक्ताओं को होने वाली परेशानियों पर सवाल उठाते हुए कहा है कि बैंकिंग सेवा केवल व्यावसायिक गतिविधि नहीं बल्कि उपभोक्ता सेवा भी है। इसलिए बैंकिंग संस्थानों की जवाबदेही, पारदर्शिता और शिकायतों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाना चाहिए।कहां-कहां परेशान हो रहा है उपभोक्ता?उपभोक्ताओं की शिकायतों में बैंक खाते से अनधिकृत या संदिग्ध राशि की कटौती, विभिन्न प्रकार के शुल्क, एटीएम एवं डेबिट कार्ड संबंधी विवाद, डिजिटल भुगतान में राशि अटकना, ऋण खाते में ब्याज एवं अन्य शुल्क को लेकर विवाद, चेक भुगतान में देरी, खाते पर रोक, गलत बैंकिंग प्रविष्टियां तथा शिकायतों के समाधान में देरी जैसी समस्याएं प्रमुख रूप से सामने आती हैं।कई मामलों में उपभोक्ता का कहना रहता है कि शिकायत करने के बावजूद उसे स्पष्ट जवाब नहीं मिलता। कभी उसे शाखा स्तर से कस्टमर केयर भेजा जाता है तो कभी कस्टमर केयर से शाखा में संपर्क करने को कहा जाता है। इस तरह उपभोक्ता एक ही समस्या के समाधान के लिए अलग-अलग स्तरों पर भटकता रहता है!“बैंक ग्राहक को सिर्फ खाता नंबर नहीं, सम्मान भी दें” — बैंकिंग संस्थानों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उपभोक्ता को अपनी समस्या के समाधान के लिए बार-बार शाखा, कस्टमर केयर और अधिकारियों के चक्कर न लगाने पड़ें।“बैंकिंग सेवा व्यापार से आगे, उपभोक्ता विश्वास का विषय”श्री तिवारी ने कहा कि बैंकिंग व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत उपभोक्ता का विश्वास है। यदि ग्राहक को अपनी जमा राशि, लेनदेन और बैंकिंग सेवाओं के संबंध में बार-बार असुविधा या अस्पष्टता का सामना करना पड़े तो इससे बैंकिंग व्यवस्था के प्रति विश्वास प्रभावित होता है।उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक, केंद्र एवं मध्यप्रदेश शासन तथा सभी संबंधित बैंकिंग संस्थानों से मांग की कि बैंकिंग उपभोक्ताओं की शिकायतों को केवल आंकड़ों के रूप में नहीं बल्कि वास्तविक उपभोक्ता समस्या के रूप में देखा जाए और शिकायत निवारण व्यवस्था को अधिक सरल, पारदर्शी, जवाबदेह और समयबद्ध बनाया जाए।उपभोक्ता अधिकार संगठन ने स्पष्ट किया है कि बैंकिंग सेवा में उपभोक्ता का सम्मान, उसकी राशि की सुरक्षा और उसकी शिकायत का समयबद्ध समाधान किसी भी मजबूत बैंकिंग व्यवस्था की पहचान होना चाहिए।