बुरहानपुर पुलिस द्वारा एनडीपीएस एक्ट विषय पर विशेष प्रशिक्षण संपन्न

एनडीपीएस प्रकरणों की गुणवत्तापूर्ण विवेचना, प्रभावी कार्रवाई एवं सफल अभियोजन हेतु अधिकारियों को दिया गया विशेष प्रशिक्षण**विवेचना में होने वाली सामान्य त्रुटियों, वैधानिक प्रावधानों एवं न्यायालयीन अपेक्षाओं पर दिया गया विस्तृत मार्गदर्शन**प्रशिक्षण में सहायक उप निरीक्षक से निरीक्षक स्तर के 49 अधिकारी हुए सम्मिलित*पुलिस मुख्यालय भोपाल के आदेशानुसार पुलिस अधीक्षक बुरहानपुर श्री आशुतोष बागरी के मार्गदर्शन में भारत सरकार द्वारा संचालित “Drug Free India – Say No To Drugs” अभियान के अंतर्गत जिला बुरहानपुर पुलिस द्वारा एनडीपीएस एक्ट विषयक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन जिला पंचायत सभागृह में किया गया। *”प्रशिक्षण का उद्देश्य”* मादक पदार्थों से संबंधित अपराधों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई, गुणवत्तापूर्ण विवेचना, सुदृढ़ अभियोजन एवं दोषसिद्धि (Conviction) की दर में वृद्धि सुनिश्चित करना रहा।प्रशिक्षण कार्यक्रम में एसडीओपी नेपानगर श्री निर्भय सिंह सहित जिले के सहायक उप निरीक्षक से निरीक्षक स्तर के लगभग 49 पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे। एनडीपीएस प्रकरणों में गुणवत्तापूर्ण विवेचना एवं सफल अभियोजन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विशेष रूप से आमंत्रित *श्री नितेश गुप्ता अभिभाषक न्यायालय बुरहानपुर* एवं *श्री मोहनलाल प्रजापति अधिवक्ता न्यायालय* जिला बुरहानपुर द्वारा अधिकारियों एवं कर्मचारियों को विस्तृत प्रशिक्षण प्रदान किया गया।_प्रशिक्षण के दौरान *निरीक्षक श्री कमल पवार* एवं *निरीक्षक श्री अखिलेश मिश्रा* द्वारा एनडीपीएस प्रकरणों की विवेचना के व्यावहारिक पहलुओं पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया गया। उन्होंने विवेचकों को घटनास्थल निरीक्षण, सूचना प्राप्ति से लेकर तलाशी, जब्ती, नमूना संकलन, सीलिंग, मालखाना जमा, एफएसएल परीक्षण एवं केस डायरी लेखन तक प्रत्येक चरण में बरती जाने वाली सावधानियों , 52 ए की कार्यवाही की जानकारी दी। उन्होंने न्यायालय में प्रकरण कमजोर होने के प्रमुख कारणों, विवेचना के दौरान होने वाली सामान्य त्रुटियों, साक्ष्य संकलन में सावधानियों तथा दस्तावेजीकरण की शुद्धता पर विशेष जोर देते हुए बताया कि एनडीपीएस प्रकरणों में प्रत्येक वैधानिक प्रक्रिया का अक्षरशः पालन ही सफल अभियोजन की आधारशिला है।_*श्री नितेश गुप्ता अभिभाषक न्यायालय बुरहानपुर* द्वारा एन.डी.पी.एस. प्रकरणों में साक्षी का मुख्य परीक्षण एवं सामान्य त्रुटियों के संबंध में जानकारी दी गई जैसे–एन.डी.पी.एस. (NDPS) प्रकरणों में साक्षी का मुख्य परीक्षण (Examination-in-Chief) अभियोजन पक्ष की सफलता का महत्वपूर्ण आधार होता है।मुख्य परीक्षण के दौरान साक्षी द्वारा घटना, तलाशी, जप्ती, गिरफ्तारी एवं अन्य कार्यवाहियों का क्रमबद्ध एवं तथ्यात्मक विवरण प्रस्तुत किया जाना आवश्यक है।साक्षी को अपने कथनों में स्पष्टता, सुसंगतता एवं आत्मविश्वास बनाए रखना चाहिए।विवेचना के दौरान तैयार किए गए दस्तावेजों, जप्ती पंचनामा, नोटिस, गिरफ्तारी मेमो एवं अन्य अभिलेखों के संबंध में साक्षी को पूर्ण जानकारी होना आवश्यक है।एन.डी.पी.एस. अधिनियम के अंतर्गत वैधानिक प्रावधानों, विशेषकर तलाशी एवं जप्ती से संबंधित धाराओं के पालन का उल्लेख मुख्य परीक्षण में स्पष्ट रूप से किया जाना चाहिए।मुख्य परीक्षण के दौरान होने वाली सामान्य त्रुटियों जैसे घटना का सही समय एवं स्थान स्पष्ट न बता पाना, दस्तावेजों के संबंध में भ्रमित होना, तथ्यों में विरोधाभास उत्पन्न करना तथा आवश्यक कानूनी प्रक्रिया का उल्लेख न कर पाना आदि से बचने पर विशेष बल दिया गया। उन्होंने बताया कि साक्षी का मुख्य परीक्षण जितना सशक्त एवं तथ्यपरक होगा, अभियोजन का पक्ष उतना ही मजबूत रहेगा।*श्री मोहनलाल प्रजापति अधिवक्ता न्यायालय जिला बुरहानपुर* द्वारा एन.डी.पी.एस. प्रकरणों में साक्षी के प्रतिपरीक्षण एवं सामान्य त्रुटियों के संबंध में जानकारी दी गई जैसे–प्रतिपरीक्षण (Cross Examination) न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण है, जिसमें बचाव पक्ष द्वारा साक्षी के कथनों की सत्यता एवं विश्वसनीयता की जांच की जाती है।साक्षी को प्रतिपरीक्षण के दौरान केवल पूछे गए प्रश्नों का ही उत्तर देना चाहिए तथा अनावश्यक जानकारी देने से बचना चाहिए।साक्षी को शांत, संयमित एवं आत्मविश्वासपूर्ण व्यवहार बनाए रखते हुए तथ्यात्मक उत्तर देना चाहिए। यदि किसी तथ्य की जानकारी न हो या स्मरण न हो तो स्पष्ट रूप से बताना चाहिए, अनुमान या कल्पना के आधार पर उत्तर नहीं देना चाहिए।प्रतिपरीक्षण के दौरान पूर्व कथनों एवं न्यायालय में दिए जा रहे कथनों में सामंजस्य बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।सामान्य त्रुटियों जैसे जल्दबाजी में उत्तर देना, प्रश्न को पूर्ण रूप से समझे बिना जवाब देना, अनुमानित उत्तर देना, पूर्व कथनों से भिन्न बयान देना तथा दस्तावेजों के संबंध में अस्पष्ट जानकारी देना अभियोजन पक्ष को कमजोर कर सकता है। उन्होंने बताया कि प्रभावी प्रतिपरीक्षण का सामना करने के लिए साक्षी को प्रकरण के तथ्यों, दस्तावेजों एवं अपनी भूमिका की पूर्ण जानकारी होना आवश्यक है।प्रशिक्षण के दौरान यह भी समझाया गया कि न्यायालय में साक्षी का आचरण, प्रस्तुतीकरण एवं तथ्यात्मक सटीकता प्रकरण के अंतिम परिणाम को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।प्रशिक्षण कार्यक्रम में एनडीपीएस एक्ट के प्रावधानों, मादक पदार्थों की पहचान, डिजिटल एवं तकनीकी साक्ष्यों के उपयोग, जब्त सामग्री के सुरक्षित संरक्षण, अभियोजन को सुदृढ़ बनाने हेतु आवश्यक दस्तावेजीकरण तथा न्यायालयीन अपेक्षाओं के संबंध में भी विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।