Skip to content
-
Subscribe to our newsletter & never miss our best posts. Subscribe Now!
SJ News MP SJ News MP

आम जनता की खबर

SJ News MP SJ News MP

आम जनता की खबर

  • Home
  • Contact Us
  • My account
  • Privacy Policy
  • Terms And Conditions
  • Home
  • Contact Us
  • My account
  • Privacy Policy
  • Terms And Conditions
  • https://www.facebook.com/
  • https://twitter.com/
  • https://t.me/
  • https://www.instagram.com/
  • https://youtube.com/
Alirajpur

आदिवासी जमीन और खनिज ब्लॉकों के विरोध में हजारों ग्रामीणों का प्रदर्शन

By Mohan Sharma
September 5, 2026 7 Min Read
0

महेश पटेल का भाजपा सरकार पर हमला—“जल, जंगल और जमीन हमारी पहचान, कागज और सरकारी आदेश दिखाए सरकार”सेना महेश पटेल बोलीं—“आदिवासी समाज की एक इंच जमीन भी नहीं जाने देंगे, जरूरत पड़ी तो विधानसभा से सड़क तक लड़ेंगे”जोबट/ आदिवासी किसानों की जमीन, प्रस्तावित खनिज ब्लॉकों, ग्रामसभा के अधिकार, पेसा कानून और जल-जंगल-जमीन के मुद्दे को लेकर आदिवासी समाज ने जोरदार आवाज बुलंद की। आदिवासी विकास परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष महेश पटेल एवं जोबट विधायक सेना महेश पटेल के नेतृत्व में हजारों ग्रामीणों ने धरना-प्रदर्शन कर सरकार से आदिवासी किसानों की जमीन से जुड़ी पूरी प्रक्रिया स्पष्ट करने और लिखित आदेश जारी करने की मांग की। हाल के प्रदर्शनों में ग्रामीणों ने ग्रामसभाओं के जमीन नहीं देने संबंधी प्रस्ताव भी प्रशासन को सौंपे हैं।धरना-प्रदर्शन में विभिन्न गांवों से किसान, सरपंच, जनपद प्रतिनिधि, महिलाएं, युवा, कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति अथवा राजनीतिक दल के खिलाफ मात्र नहीं है, बल्कि आदिवासी समाज के जल, जंगल और जमीन के अधिकारों की लड़ाई है।“हम दूसरों के अधिकार की बात करने नहीं, अपने अधिकार की बात करने आए हैं”

जनसभा को संबोधित करते हुए आदिवासी विकास परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष महेश पटेल ने कहा कि आज हम यहां अपने अधिकारों की बात करने के लिए एकत्रित हुए हैं। हमारी जमीन, हमारा जंगल और हमारे प्राकृतिक संसाधन हमारी पहचान हैं।उन्होंने कहा कि आदिवासी क्षेत्र के लोगों को अपने संवैधानिक अधिकारों की जानकारी होना जरूरी है। संविधान की पांचवीं अनुसूची के तहत अनुसूचित क्षेत्रों के लिए विशेष संरक्षण की व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि यदि इन प्रावधानों की भावना के अनुसार प्रशासन चलता तो आदिवासी किसानों को अपनी जमीन को लेकर इस प्रकार आंदोलन करने की जरूरत नहीं पड़ती।महेश पटेल ने ग्रामीणों से कहा कि वे अपने अधिकारों को पहचानें और अपनी जमीन से संबंधित प्रत्येक दस्तावेज की जानकारी रखें।“मुख्यमंत्री ने सर्वे की बात मानी, फिर भाजपा नेता क्या जवाब देंगे?”महेश पटेल ने जमीन और खनिज ब्लॉकों के मुद्दे पर भाजपा नेताओं को घेरते हुए कहा कि जब कांग्रेस और आदिवासी समाज ने इस मामले को उठाया तो इसे भ्रम और षड्यंत्र बताने का प्रयास किया गया।उन्होंने सवाल किया कि यदि जमीन से संबंधित कोई सर्वे, टेंडर या प्रक्रिया हुई ही नहीं तो फिर विवाद किस बात का है?महेश पटेल ने कहा कि मुख्यमंत्री की ओर से सर्वे और प्रक्रिया होने की बात कही गई है। ऐसे में अब सरकार को जनता के सामने पूरी जानकारी रखनी चाहिए।उन्होंने कहा—“अगर सर्वे हुआ है तो बताइए किस जमीन का हुआ। अगर टेंडर हुआ है तो बताइए किस सर्वे नंबर का हुआ। अगर प्रक्रिया आगे बढ़ी है तो उसकी पूरी जानकारी जनता को दीजिए। केवल भाषण से काम नहीं चलेगा, कागज और सरकारी आदेश सामने आने चाहिए।

”सरकारी रिकॉर्ड में भी जोबट तहसील के छोटी खट्टाली ग्रेफाइट ब्लॉक के 599.76 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए 9 जुलाई 2024 को ई-नीलामी और कोल इंडिया लिमिटेड की 150.55 प्रतिशत की उच्चतम बोली का उल्लेख है। विधानसभा के उत्तर में यह भी कहा गया कि वर्तमान में भूमि अधिग्रहण का कोई प्रस्ताव नहीं है।“माइनिंग वेबसाइट पर पूरी जानकारी सार्वजनिक करें”महेश पटेल ने सरकार से मांग की कि क्षेत्र के सभी खनिज ब्लॉकों की जानकारी सार्वजनिक की जाए।उन्होंने कहा कि ग्रामीणों को यह बताया जाए कि उनके गांव में किस खनिज का सर्वे हुआ है, कितने क्षेत्र में हुआ है, संबंधित प्रक्रिया किस स्तर पर है और आगे सरकार की क्या योजना है।उन्होंने कोयला/ग्रेफाइट, चूना पत्थर, ग्रेनाइट और अन्य खनिजों से संबंधित क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि ग्रामीणों के बीच कई प्रकार की आशंकाएं हैं। इन आशंकाओं को दूर करने की जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की है।“किसानों को डराने की नहीं, सच्चाई बताने की जरूरत”महेश पटेल ने कहा कि आदिवासी किसान भोला हो सकता है, लेकिन अब वह अपने अधिकारों के प्रति जागरूक है।उन्होंने कहा कि किसानों को किसी भी राजनीतिक बयानबाजी से भ्रमित करने के बजाय सरकार को आधिकारिक दस्तावेजों के माध्यम से स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।“अगर सरकार कहती है कि आदिवासी की जमीन नहीं जाएगी, तो सरकार लिखकर दे। अगर जमीन पर कोई अधिग्रहण नहीं होना है, तो लिखित आदेश जारी करे। फिर ग्रामीणों की चिंता अपने आप समाप्त हो जाएगी।”भाजपा नेताओं के धरने पर भी उठाए सवालमहेश पटेल ने भाजपा नेताओं द्वारा किए गए धरना-प्रदर्शनों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब प्रदेश में भाजपा की सरकार है, मुख्यमंत्री भाजपा के हैं, कैबिनेट मंत्री भाजपा के हैं और प्रशासन भी सरकार के अधीन है, तो भाजपा नेताओं को अपनी ही सरकार के खिलाफ धरना देने की जरूरत क्यों पड़ रही है?उन्होंने कहा कि यदि सरकार में ही उनकी बात नहीं सुनी जा रही है तो आम आदिवासी, किसान और गरीब व्यक्ति अपनी समस्या लेकर कहां जाएगा।“सरकार आपकी, मुख्यमंत्री आपके, कैबिनेट आपका और प्रशासन आपका—फिर धरना किसके खिलाफ और ज्ञापन किसको?”उन्होंने भाजपा नेताओं से कहा कि कांग्रेस पर आरोप लगाने के बजाय वे अपनी सरकार से सवाल करें और किसानों को वास्तविक जवाब दिलाएं।सेना महेश पटेल—“आदिवासी समाज की एक इंच जमीन भी नहीं जाने देंगे”धरना-प्रदर्शन को संबोधित करते हुए जोबट विधायक सेना महेश पटेल ने कहा कि आदिवासी समाज की जमीन केवल जमीन का टुकड़ा नहीं है। यह उसकी पहचान, आजीविका, संस्कृति और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य है।उन्होंने कहा कि वे अपने क्षेत्र के किसानों के साथ खड़ी हैं और उनकी जमीन के अधिकारों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होने देंगी।“आदिवासी समाज की एक इंच जमीन भी उसके अधिकारों और कानूनों की अनदेखी करके नहीं ली जानी चाहिए। सरकार को किसानों की चिंता दूर करनी होगी।”उन्होंने कहा कि यदि सरकार का दावा है कि किसानों की जमीन प्रभावित नहीं होगी, तो इस संबंध में स्पष्ट लिखित जवाब दिया जाए।“बयान नहीं, लिखित आदेश चाहिए”सेना महेश पटेल ने कहा कि सरकार की ओर से यदि खनन प्रक्रिया रोकने अथवा किसानों की जमीन सुरक्षित रखने की बात कही जा रही है तो उसका लिखित आदेश भी सामने आना चाहिए।उन्होंने कहा—“कहना अलग बात है और लिखकर देना अलग बात है। हम सरकार से कागज मांग रहे हैं। किसानों को मौखिक आश्वासन नहीं, लिखित सुरक्षा चाहिए।”उन्होंने कहा कि सरकार को संबंधित सभी सर्वे नंबर, खनिज ब्लॉक, टेंडर और आगे की प्रक्रिया की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए।ग्रामसभा और पेसा कानून के पालन की मांगविधायक सेना महेश पटेल ने कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में ग्रामसभा की भूमिका महत्वपूर्ण है। सरकार और प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जमीन और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े मामलों में लागू कानूनों और ग्रामसभा के अधिकारों का पालन हो।हालिया आंदोलन में भी ग्रामीणों ने सेमलाया, मोटाउमर और जुवारी पंचायतों की ग्रामसभाओं के जमीन नहीं देने संबंधी प्रस्ताव प्रशासन को सौंपे हैं।“संदिग्ध जमीन सौदों की भी जांच हो”सेना महेश पटेल ने आदिवासी जमीन की खरीद-बिक्री से जुड़े मामलों की जांच की मांग भी उठाई। उन्होंने कहा कि यदि किसी आदिवासी की जमीन संदिग्ध परिस्थितियों में खरीदी-बेची गई है तो उसके दस्तावेजों की जांच होनी चाहिए।उन्होंने कहा कि किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए जरूरत पड़ी तो मामला प्रशासन से लेकर न्यायालय और विधानसभा तक ले जाया जाएगा।“175 गांवों की स्थिति स्पष्ट करे सरकार”कार्यक्रम में क्षेत्र के बड़ी संख्या में गांवों और ग्रामीणों की जमीन से संबंधित चिंताओं को सामने रखा गया। नेताओं ने मांग की कि सरकार पूरे क्षेत्र की स्थिति स्पष्ट करे और जिन गांवों पर किसी भी प्रकार की खनिज गतिविधि या सर्वे की बात है, वहां के ग्रामीणों को आधिकारिक जानकारी दी जाए।महेश पटेल ने कहा कि गांव के लोगों को पता होना चाहिए कि उनकी जमीन के संबंध में सरकार के रिकॉर्ड में क्या दर्ज है।विधानसभा से सड़क तक संघर्षसेना महेश पटेल ने कहा कि आगामी विधानसभा सत्र में आदिवासी किसानों की जमीन, खनिज नीलामी और ग्रामसभा के अधिकारों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया जाएगा।उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार सहित कांग्रेस के आदिवासी विधायक इस मामले को विधानसभा में उठाएंगे।“हम किसानों की जमीन की लड़ाई विधानसभा में भी लड़ेंगे और जरूरत पड़ी तो सड़क पर भी उतरेंगे। किसानों को डरने की जरूरत नहीं है।”“विकास का विरोध नहीं, अधिकारों की कीमत पर विकास मंजूर नहीं”महेश पटेल ने कहा कि आदिवासी समाज विकास का विरोधी नहीं है, लेकिन विकास के नाम पर उसकी जमीन और अधिकारों से समझौता नहीं किया जा सकता।उन्होंने कहा कि यदि किसी क्षेत्र में खनिज उपलब्ध है तो भी प्रक्रिया कानून के अनुसार, पारदर्शी तरीके से और प्रभावित ग्रामीणों के अधिकारों का सम्मान करते हुए होनी चाहिए।हजारों ग्रामीणों ने दिखाई एकजुटताधरना-प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने जल, जंगल और जमीन की रक्षा को लेकर एकजुटता दिखाई। जनसभा के बाद ग्रामीणों ने रैली निकालकर प्रशासन के समक्ष अपनी मांगें रखीं और ज्ञापन सौंपा। हालिया प्रदर्शन में प्रशासन की ओर से भी ग्रामीणों की आपत्तियां सुनी गईं और ग्रामसभाओं के प्रस्ताव लिए गए।महेश पटेल और सेना महेश पटेल ने कहा कि यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति या राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के अधिकारों की लड़ाई है।दोनों नेताओं ने सरकार से मांग की कि खनिज ब्लॉकों और आदिवासी जमीन से संबंधित पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक की जाए, किसानों की आशंकाओं को दूर किया जाए, ग्रामसभा एवं लागू संवैधानिक/कानूनी प्रावधानों का पालन सुनिश्चित किया जाए और यदि सरकार ने प्रक्रिया रोकने का निर्णय लिया है तो उसका स्पष्ट लिखित आदेश जारी किया जाए।उन्होंने कहा कि “जब तक आदिवासी किसानों को उनकी जमीन और अधिकारों को लेकर पूरी स्पष्टता और लिखित सुरक्षा नहीं मिलती, तब तक यह संघर्ष लोकतांत्रिक तरीके से जारी रहेगा।”

Author

Mohan Sharma

Follow Me
Other Articles
Previous

अखिल विश्व गायत्री परिवार चेतना केंद्र खामखेड़ा के द्वारा शिक्षक दिवस पर गुरुजनों का सम्मान किया

Next

शिक्षक दिवस को काला दिवस के रूप में मनाया, TET आदेश वापस लेने की मांग राष्ट्रीय शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने कलेक्टर कार्यालय पर किया प्रदर्शन, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

No Comment! Be the first one.

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

  • Agar-Malava
  • Alirajpur
  • Ashoknagar
  • Badvani
  • Bhopal
  • Burhanpur
  • Chhatrpur
  • Chhindvada
  • Devas
  • Dhar
  • Guna
  • Gwaliyar
  • Indore
  • Jhabua
  • Khandva
  • Khargoun
  • Madhypradesh
  • Maihar
  • Mandsour
  • Nimach
  • Rajgadh
  • Ratlam
  • Raysen
  • Shivpuri
  • Ujjain
  • Umariya
  • Uncategorized

Footer Menu

  • Home
  • Contact Us
  • My account
  • Privacy Policy
  • Terms And Conditions
Copyright 2026 — SJ News MP. All rights reserved. SJ COMPUTER CENTER