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Alirajpur

केंद्र-राज्य सरकार और प्रशासन को घेरते हुए हजारों ग्रामीणों का प्रदर्शनमहेश पटेल एवं जोबट विधायक सेना महेश पटेल के नेतृत्व में आंदोलन

By Mohan Sharma
August 25, 2026 5 Min Read
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अलीराजपुर से महेश गणावा की खबर मो =9179189851 | एसडीएम-अपर कलेक्टर के बाद कलेक्टर को खुद आकर जमीन पर बैठकर सुननी पड़ी ग्रामीणों की बातआलीराजपुर। जमीन अधिग्रहण, प्रस्तावित खनिज ब्लॉकों की प्रक्रिया और किसानों को खाद वितरण में आ रही परेशानियों को लेकर मंगलवार को आलीराजपुर में आदिवासी विकास परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष महेश पटेल एवं जोबट विधायक सेना महेश पटेल के नेतृत्व में हजारों ग्रामीणों और किसानों ने जोरदार धरना-प्रदर्शन किया।आंदोलन में आलीराजपुर-जोबट विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न ग्रामों के सरपंच, कांग्रेस के प्रतिनिधि, जनपद प्रतिनिधि सहित हजारों ग्रामीण, किसान एवं बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हुईं। आंदोलन की शुरुआत आलीराजपुर के रामदेव मंदिर परिसर में सभा के साथ हुई। सभा के बाद हजारों ग्रामीण और किसान हाथों में तख्तियां लेकर रैली के रूप में कलेक्टर कार्यालय पहुंचे।

रास्तेभर ग्रामीण नारे लगाते हुए केंद्र एवं राज्य सरकार तथा प्रशासन के सामने अपनी मांगें रखते रहे।तख्तियां लेकर सड़कों पर उतरे ग्रामीण, गूंजे जोरदार नारेरैली के दौरान ग्रामीणों के हाथों में “जल-जंगल-जमीन हमारा है”, “जमीन हमारी—फैसला हमारा”, “ग्राम सभा का निर्णय मानना होगा” और “जल-जंगल-जमीन बचाना है” जैसी तख्तियां दिखाई दीं।प्रदर्शन के दौरान “जय जोहार”, “जय आदिवासी”, “आदिवासी एकता जिंदाबाद”, “ग्राम सभा जिंदाबाद” और “लड़ेंगे-लड़ेंगे, हक के लिए लड़ेंगे” जैसे नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।ग्रामीणों ने “जय जोहार का नारा है, भारत देश हमारा है” का उद्घोष करते हुए आदिवासी एकता का संदेश दिया। रैली में पारंपरिक उत्साह के साथ “लहंगी-लहंगी” के जयघोष भी सुनाई दिए।पहले एसडीएम, फिर अपर कलेक्टर पहुंचे—ग्रामीणों ने ज्ञापन देने से किया इनकारकलेक्टर कार्यालय पहुंचने के बाद ज्ञापन लेने के लिए पहले एसडीएम मौके पर पहुंचे। आंदोलनकारियों ने एसडीएम को ज्ञापन देने से इनकार करते हुए कहा कि वे अपनी मांगें और ग्राम सभा के प्रस्ताव सीधे कलेक्टर को सौंपेंगे।इसके बाद अपर कलेक्टर भी प्रदर्शनकारियों के बीच पहुंचे और ज्ञापन लेने का प्रयास किया, लेकिन आंदोलनकारियों ने उनसे भी ज्ञापन लेने से इनकार कर दिया।ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि वे अपनी मांगें सीधे कलेक्टर के सामने रखना चाहते हैं और ग्राम सभा के प्रस्ताव भी उन्हीं को सौंपेंगे।आखिरकार कलेक्टर को खुद आना पड़ालगातार धरना-प्रदर्शन के बाद कलेक्टर स्वयं मौके पर पहुंचीं। उन्होंने प्रदर्शनकारियों के बीच जमीन पर बैठकर ग्रामीणों की बात सुनी और उनकी मांगों पर चर्चा की।इस दौरान जमीन अधिग्रहण एवं खनिज ब्लॉक से संबंधित प्रक्रिया को लेकर प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच विस्तार से बातचीत हुई।प्रशासन ने स्वीकार किया—भारत और मध्यप्रदेश सरकार की ओर से पत्र जारी हुए हैंचर्चा के दौरान प्रशासन की ओर से बताया गया कि भारत सरकार और मध्यप्रदेश सरकार की ओर से संबंधित पत्र जारी हुए हैं। इन्हीं पत्रों के आधार पर प्रशासन ने ग्राम सभाओं से प्रस्ताव मांगे थे।कलेक्टर ने बताया कि प्रशासन ने ग्राम सभाओं से प्रस्ताव मांगे थे। अब आंदोलनकारियों द्वारा सौंपे गए ग्राम सभा के प्रस्तावों में जमीन नहीं देने का निर्णय दर्ज है।

इसलिए इन प्रस्तावों से शासन के उच्च स्तर को अवगत कराया जाएगा।तीन पंचायतों के ग्राम सभा प्रस्ताव भी सौंपेकलेक्टर को ज्ञापन के साथ सेमलाया पंचायत, मोटाउमर पंचायत एवं जुवारी पंचायत की ग्राम सभाओं द्वारा पारित प्रस्ताव भी सौंपे गए।इन प्रस्तावों में ग्राम सभाओं ने जमीन अधिग्रहण के खिलाफ और जमीन नहीं देने का निर्णय लिया है। ग्रामीणों ने मांग की कि इन प्रस्तावों को प्रशासनिक रिकॉर्ड में शामिल किया जाए और ग्राम सभा के निर्णय का सम्मान किया जाए।सेना महेश पटेल—ग्राम सभा के अधिकारों से समझौता नहींजोबट विधायक सेना महेश पटेल ने कहा कि जल, जंगल और जमीन आदिवासी समाज के जीवन, संस्कृति और पहचान का आधार है। उन्होंने कहा कि ग्राम सभा के अधिकारों का सम्मान होना चाहिए और ग्रामीणों की सहमति के बिना उनकी जमीन से संबंधित कोई निर्णय नहीं लिया जाना चाहिए।उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान प्रशासन ने स्वयं स्पष्ट किया है कि संबंधित पत्र सरकारों की ओर से जारी हुए हैं और उन्हीं के आधार पर ग्राम सभाओं से प्रस्ताव मांगे गए थे।विधायक ने कहा कि अब ग्राम सभाओं ने जमीन नहीं देने के प्रस्ताव प्रशासन को सौंप दिए हैं। प्रशासन को इन प्रस्तावों से शासन को अवगत कराना चाहिए।महेश पटेल बोले—“जल, जंगल और जमीन हमारी मां है”आदिवासी विकास परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष महेश पटेल ने कहा कि ग्राम सभाओं में ग्रामीणों ने एकमत होकर अपनी जमीन नहीं देने का निर्णय लिया है।उन्होंने कहा, “जल, जंगल और जमीन हमारी मां है। ग्राम सभा के निर्णय और आदिवासी समाज के अधिकारों का सम्मान होना चाहिए। हम अपनी जमीन किसी को नहीं देंगे और अपने अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेंगे।”उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की कि आदिवासी क्षेत्रों में जमीन एवं खनिज से संबंधित किसी भी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से पहले ग्राम सभा के अधिकारों और पेसा कानून के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित किया जाए।खाद की समस्या को लेकर भी किसानों ने उठाई आवाजधरना-प्रदर्शन में किसानों की खाद समस्या भी प्रमुख मुद्दा रही। किसानों ने टोकन व्यवस्था समाप्त करने, आधार एवं खसरा नकल के आधार पर आवश्यकता के अनुसार खाद उपलब्ध कराने तथा पर्याप्त मात्रा में खाद की व्यवस्था करने की मांग की।प्रदर्शनकारियों ने कहा कि खाद के लिए किसानों को परेशान नहीं किया जाना चाहिए और वितरण व्यवस्था को सरल बनाया जाना चाहिए।हजारों ग्रामीणों ने दिया संदेश—“जल, जंगल, जमीन हमारी है”महेश पटेल एवं जोबट विधायक सेना महेश पटेल के नेतृत्व में हुए इस आंदोलन में आलीराजपुर-जोबट विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न गांवों के सरपंच, कांग्रेस प्रतिनिधि, जनपद प्रतिनिधि, किसान, ग्रामीण एवं बड़ी संख्या में महिलाएं सहित हजारों लोगों ने अपनी आवाज बुलंद की।हाथों में तख्तियां, जुबान पर नारे और ग्राम सभा के प्रस्तावों के साथ ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने अपनी मांगें रखीं। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट संदेश दिया कि जल, जंगल, जमीन, किसान और ग्राम सभा के अधिकारों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।कलेक्टर द्वारा ग्रामीणों की बात जमीन पर बैठकर सुनने और ग्राम सभाओं से प्राप्त “जमीन नहीं देने” के प्रस्तावों से शासन के उच्च स्तर को अवगत कराने की बात कहने के बाद आंदोलनकारियों ने कहा कि मांगों पर ठोस कार्रवाई होने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

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Mohan Sharma

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