छात्रों का भविष्य अंधकार में

रमाकांत मोरे बुरहानपुर/ जिले के खकनार क्षेत्र के आदिवासी बाहुल क्षेत्र में शिक्षा मंदिर में एक छात्र अपने ही कक्षा के अन्य छात्रों को पढ़ाते हुए नजर आ रहा हैयह शिक्षा विभाग के लिए बहुत ही शर्मिंदगी की बात है क्लास में से शिक्षक नदारत थे ग्रामीण क्षेत्रों में गांव खेड़े एवं फलिया में मनमानी रूप से संचालित हो रही है स्कूल मास्टर प्रधान पाठक दारू पीकर आकर बच्चों को शिक्षित कर रहे हैं कैसे बनाएंगे आत्मनिर्भर भारत भाड़ाबली चित्रितया फाड़ा ओर देवीफालय में तीन फलिया मिलकर प्राथमिक शाला का निर्माण हुआ है बुरहानपुर जिले के खकनार ब्लाक के अंतर्गत ग्राम पंचायत खकनार खुर्द के भाडाबल्ली देवीपाल्या में प्राथमिक शाला की हालत गंभीर स्थिति में है यह तो पूरी तरह से भवन जजार हो चुके हैं यह कभी भी दुर्घटना हो सकती है और स्कूल को संचालित कर रहे हैं प्रधान पाठक उससे भी बड़ी लापरवाही सामने आई है पहली से पांचवी तक एक की भवन में बच्चों को ठोस ठोस कर भरे हुए हैं मास्टर की बैठक व्यवस्था ही ठीक नहीं है तो बच्चों को क्या सही ढंग से बिठाएंगे ओर पढ़ाई करवाएंगे और सरकार प्रशासन की ओर से इन्हें शिक्षकों को 60 से 80 हज़ार तक तनख्वाह दे रहे हैं

और पहली से पांचवी के बच्चों को आज तक बच्चों को कौन सी स्कूल हे यहाँ पता भी नहीं अपना नाम तक लिखते नहीं आता है स्कूल की यूनिफॉर्म तक बच्चों को पता नहीं है मामी पापा का नाम तक मालूम नहीं और बच्चों को गिनती न अन्नाराम पहाड़े का का खेड़ी तक याद नहीं है कैसे पढ़ा रहे है मास्टर क्या फ्री की तनख्वाह दे रही हैं सरकार खाना बनाने वाला किचन भी सही ढंग से नहीं हे खाना बनाने के लिए भी पानी भी नाले से या हड़प्पा से खींचकर लाना पड़ रहा है यहां देवीपलिया में पहली से पांचवी तक विद्यालय है और गिनती के दो मास्टर हैं शिक्षा समिति के सदस्य मदन रावत ने बताया कि मास्टर शराब पीकर स्कूल में आता है और कुछ पढ़ते नहीं स्कूल में बैठकर शराब पीते हैं ऐसे शिक्षक को सस्पेंड करके दूसरे मास्टर को भेजने चाहिए यहां मदन रावत ने सरकार से गुहार लगाई है ग्रामीण युवक दुर्गेश सोलंकी ने बताया कि पहली से 5 वी के बच्चे को अभी तक एबीसीडी अनाराम गिनती तक नहीं आती जो भी बच्चा यहां पढ़ाई करता है वह फेल ही हो जाता है यहां शिक्षकों की बड़ी लापरवाही है इसलिये ग्रामीण अपने बच्चों को स्कूल तक भेजना पसंद नहीं करते हैं और दूसरी जगह दूर भेज रहे हैं पढ़ने के लिए और गांव की गाँव में स्कूल की हालत को देखकर भेजना नहीं चाहते है और कुछ लोग बाहर पढ़ाई करवाने के लिए भेजते तो है लेकिन आगे खर्चा ज्यादा लगने से पढ़ाई छुड़ा लेते हैं और यहां फिर वहां बच्चे पढ़ाई से वंचित हो जाते हैं और देवीफाल्या में तो मास्टरो को सही ढंग से पढ़ना भी नहीं आता है बिठाना भी नहीं आता है और स्कूल को कैसे संचालित करते हैं वह भी नहीं आता है अपनी मनमानी से चला रहे हैं स्कूल इसमें शासन प्रशासन की भी कहीं ना कहीं बड़ी लापरवाही है एक तरफ प्रधानमंत्री आत्म निर्भर भारत बनाने की बात कर रहे हैं और ग्रामीण क्षेत्र में खुद ही मास्टर आत्मनिर्भर नहीं हो पा रहे हैं ।