रूफटॉप सोलर के बावजूद बिजली बिल का बोझ क्यों? उपभोक्ताओं की परेशानी पर प्रदेश अध्यक्ष अरुण तिवारी ने मध्यप्रदेश शासन से संज्ञान लेने की अपील की

सोलर उपभोक्ताओं का दर्द: सोचा था जीरो बिल आएगा, अब किस्तों के साथ बिजली का बिल भी भरना पड़ रहा — फिक्स चार्ज और अन्य शुल्कों को लेकर उठे सवाल* मध्यप्रदेश/ में रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने वाले अनेक उपभोक्ताओं के सामने बिजली बिल को लेकर नई चिंता खड़ी हो रही है। उपभोक्ताओं ने यह सोचकर सोलर सिस्टम लगवाया था कि बिजली उत्पादन के बाद उनके बिजली खर्च में बड़ी कमी आएगी और कई मामलों में बिल लगभग शून्य तक पहुंच सकता है। लेकिन सोलर सिस्टम की खरीद एवं स्थापना की किस्तें चुकाने के साथ-साथ बिजली बिल में फिक्स चार्ज, मीटर से संबंधित शुल्क तथा अन्य देयकों के कारण उपभोक्ताओं को अपेक्षित राहत नहीं मिल पा रही है।इस मुद्दे को लेकर उपभोक्ता अधिकार संगठन के *प्रदेश अध्यक्ष अरुण तिवारी* ने मध्यप्रदेश शासन एवं संबंधित बिजली वितरण कंपनियों से उपभोक्ताओं की समस्या का गंभीरता से संज्ञान लेने की अपील की है। *सोलर लगाने के बाद भी बिल क्यों?* रूफटॉप सोलर लगाने का उद्देश्य उपभोक्ताओं को बिजली खर्च में राहत देना और पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम करना है। लेकिन सोलर सिस्टम लगवाने के बाद भी बिजली कनेक्शन पूरी तरह समाप्त नहीं होता। ऐसे में बिजली बिल में ऊर्जा खपत के अतिरिक्त कुछ स्थायी/निश्चित शुल्क और अन्य मदों में राशि जुड़ सकती है।यही स्थिति उन उपभोक्ताओं के लिए चिंता का कारण बन रही है जिन्होंने सोलर सिस्टम लगवाने के लिए ऋण या किस्त का सहारा लिया है। उनका कहना है कि एक तरफ सोलर सिस्टम की मासिक किस्त चुकानी पड़ रही है और दूसरी तरफ बिजली कंपनी का बिल भी आ रहा है। ऐसे में जिस “बिजली खर्च में बड़ी बचत” की उम्मीद के साथ सोलर लगाया गया था, वह कई उपभोक्ताओं को अपेक्षा के अनुरूप महसूस नहीं हो रही। *उपभोक्ताओं की मांग—व्यवस्था हो पारदर्शी* उपभोक्ता अधिकार संगठन का कहना है कि सोलर उपभोक्ताओं को बिल की प्रत्येक मद की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराई जानी चाहिए। बिल में ऊर्जा शुल्क, फिक्स चार्ज, मीटर शुल्क, अन्य शुल्क, समायोजन तथा सोलर से संबंधित क्रेडिट/समायोजन को अलग-अलग और सरल भाषा में दर्शाया जाए, ताकि आम उपभोक्ता यह समझ सके कि उसके खाते में कितनी बिजली खपत हुई और कितनी बिजली ग्रिड को दी गई।संगठन का मानना है कि सोलर अपनाने वाले उपभोक्ताओं को बिलिंग व्यवस्था में किसी प्रकार की अस्पष्टता या अनावश्यक आर्थिक बोझ का सामना नहीं करना चाहिए। *शासन से विशेष हस्तक्षेप की अपील* प्रदेश अध्यक्ष *अरुण तिवारी* ने मध्यप्रदेश शासन से अपील की है कि प्रदेश में रूफटॉप सोलर उपभोक्ताओं की वास्तविक स्थिति की समीक्षा कराई जाए। साथ ही बिजली वितरण कंपनियों की बिलिंग व्यवस्था, फिक्स चार्ज तथा सोलर से जुड़े समायोजन की प्रक्रिया को उपभोक्ता हित की दृष्टि से पारदर्शी बनाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य यदि अधिक से अधिक परिवारों को सौर ऊर्जा अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है, तो उपभोक्ताओं का भरोसा कायम रखना भी उतना ही जरूरी है। सोलर लगाने वाले उपभोक्ता स्वयं को बिजली बचत की दिशा में योगदान देने वाला मानते हैं; इसलिए उन्हें ऐसी बिलिंग व्यवस्था मिलनी चाहिए जिसमें उन्हें अपने खर्च और लाभ की स्पष्ट तस्वीर दिखाई दे।“ *सोलर अपनाने वालों को मिले वास्तविक राहत”* अरुण तिवारी ने कहा कि सौर ऊर्जा को बढ़ावा देना पर्यावरण और ऊर्जा सुरक्षा दोनों के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ उपभोक्ता हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। यदि किसी उपभोक्ता ने अपनी जमा पूंजी लगाकर या ऋण लेकर रूफटॉप सोलर लगाया है, तो उसे यह समझने का अधिकार है कि उसकी बिजली खपत, सोलर उत्पादन, ग्रिड को भेजी गई बिजली और अंतिम देय राशि की गणना किस प्रकार हुई है।उन्होंने शासन से मांग की कि *रूफटॉप सोलर उपभोक्ताओं के लिए सरल, पारदर्शी और उपभोक्ता-अनुकूल बिलिंग व्यवस्था* सुनिश्चित की जाए तथा फिक्स चार्ज एवं अन्य शुल्कों के संबंध में स्पष्ट सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध कराई जाए।उपभोक्ताओं के लिए जागरूकता भी जरूरीउपभोक्ता अधिकार संगठन ने यह भी कहा कि सोलर सिस्टम लगाने से पहले उपभोक्ताओं को केवल संभावित बिजली बचत ही नहीं, बल्कि फिक्स चार्ज, नेट मीटरिंग/बिलिंग व्यवस्था, रखरखाव, ऋण की किस्त और अन्य संभावित देयकों की पूरी जानकारी दी जानी चाहिए।संगठन का कहना है कि “ *जीरो बिल” को लेकर उपभोक्ताओं में किसी भी प्रकार की गलतफहमी नहीं रहनी चाहिए।* वास्तविक बिल सोलर उत्पादन, खपत, नियमों और लागू शुल्कों पर निर्भर करता है। इसलिए कंपनियों और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है कि उपभोक्ता को सिस्टम खरीदने से पहले ही सभी आर्थिक पहलुओं की स्पष्ट जानकारी दी जाए। *उपभोक्ता अधिकार संगठन ने उम्मीद जताई है कि मध्यप्रदेश शासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सोलर उपभोक्ताओं के हित में आवश्यक कदम उठाएगा, ताकि सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ-साथ उपभोक्ताओं को वास्तविक आर्थिक राहत और पारदर्शी बिलिंग का लाभ मिल सके।*