धार में शासकीय अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए एक दिवसीय ‘आनंद अल्पविराम’ कार्यशाला संपन्न; तनावमुक्त जीवन जीने और आनंद से रहने के सिखाए गए गुर

**धार, 20 अगस्त 2026।* जिला पंचायत सभागृह, धार में आज शासकीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए एक दिवसीय ‘आनंद अल्पविराम’ कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य शासकीय अमले को कार्य के दबाव से दूर रखकर तनावमुक्त जीवन जीने की कला सिखाना और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाना था। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के लगभग 70 अधिकारियों और कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।*दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ शुभारंभ*कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ अतिथियों द्वारा किया गया। इस अवसर पर जन अभियान परिषद धार के जिला समन्वयक श्री सौरभ शुक्ला, साक्षर भारत मिशन से श्री एफ.सी. जगदाले, उपसंचालक कृषि श्री विजय चौरसिया, सहायक संचालक जनजातीय कार्य विभाग श्री आनंद पाठक, बीईओ श्री प्रवीण शर्मा, जिला संपर्क व्यक्ति डॉ. दुर्गेश नागर, राज्य स्तरीय प्रशिक्षक भोपाल से श्री के.बी. मंसारे, श्री गणेश कानड़े और डॉ. दिनेश कश्यप विशेष रूप से उपस्थित रहे। अतिथियों का स्वागत करने के पश्चात आनंद विभाग के परिचय से संबंधित एक प्रेरणादायक वीडियो भी प्रदर्शित किया गया।

*सत्रों के माध्यम से तनावमुक्ति और आनंद के सूत्र*कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों का परिचय श्री गणेश कानड़े द्वारा लिया गया। इसके बाद ‘आनंद की ओर’ विषय पर मास्टर ट्रेनर श्री के.बी. मंसारे ने सत्र का संचालन किया, जिसमें प्रतिभागियों को आत्म-विश्लेषण के लिए तीन महत्वपूर्ण प्रश्न दिए गए—“मेरे जीवन का आनंद क्या है?” और “मेरे जीवन का आनंद कब बढ़ता व घटता है?”मास्टर ट्रेनर श्री गणेश कानड़े ने ‘CCD’ (Continuous Comprehensive Development) एवं ‘जीवन का लेखा-जोखा’ पर सत्र लेते हुए चार विशेष प्रश्नों पर प्रतिभागियों को शांत समय (Silent Time) दिया। इसके बाद प्रतिभागियों ने अपने जीवन के अनुभवों और घटनाओं को साझा किया।*कृतज्ञता और क्षमा से मिलती है मानसिक शांति* सत्र के दौरान तनावमुक्ति और आनंद प्राप्ति के व्यावहारिक उपाय बताए गए। वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि आनंद से जीने के लिए हमें मदद करने वालों के प्रति कृतज्ञता का भाव रखना चाहिए, उन्हें धन्यवाद देना चाहिए, लोगों की निस्वार्थ मदद करनी चाहिए और जिन लोगों को कभी दुःख पहुँचाया हो, उनसे क्षमा मांगनी चाहिए। इन सकारात्मक आदतों से न केवल तनाव दूर होता है, बल्कि आंतरिक आनंद की अनुभूति भी होती है। कार्यक्रम के सफल आयोजन में श्री अनोखीलाल साठे, श्रीमती सुरेखा परिहार, श्री धर्मेंद्र शर्मा, श्री संजय शर्मा और श्री भूपेंद्र सिंह चौहान का विशेष सहयोग रहा। कार्यशाला के अंत में सभी प्रतिभागियों ने तनावमुक्त और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ कार्य करने का संकल्प लिया। धार से बगदीराम चौहान की रिपोर्ट