फ्लोरोसिस जांच शिविर में बच्चों का किया स्वास्थ्य परीक्षण, दांतों में मिले डेंटल फ्लोरिसस के लक्षण

नरेन्द्र राय रायसेन रायसेन। राष्ट्रीय फ्लोरोसिस निवारण एवं नियंत्रण कार्यक्रम के तहत विकासखंड ओबेदुल्लागंज के तजपुरा, करीतलाई, विनायका और बरखेड़ा गांव के प्राथमिक एवं माध्यमिक स्कूलों में जिला स्तरीय फ्लोरोसिस स्वास्थ्य परीक्षण शिविर लगाया गया। कलेक्टर अरूण विश्वकर्मा के निर्देश और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. दिनेश खत्री के मार्गदर्शन में आयोजित शिविर में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बच्चों के आड़े तिरछे दांतों की जांच की।शिविर में जिला फ्लोरोसिस नोडल अधिकारी डॉ. एमडी भारती, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम से डॉ. सुरेंद्र राजपूत और डॉ. पूनम ओड ने बच्चों का परीक्षण किया।

जांच के दौरान कई बच्चों में संभावित डेंटल फ्लोरोसिस के लक्षण मिले। प्रभावित बच्चों के यूरिन सैंपल लिए गए। इसके साथ ही बच्चे जिस स्रोत का पानी पी रहे हैं। उस पानी के भी सैंपल लिए गए हैं। इनकी जांच जिला चिकित्सालय स्थित फ्लोरोसिस लैब में की जाएगी।टीम ने संभावित डेंटल फ्लोरोसिस से प्रभावित बच्चों को चिन्हित कर उन्हें आवश्यक उपचार के लिए कैल्शियम, विटामिन-सी और मल्टीविटामिन की दवाइयां उपलब्ध कराईं। वहीं ग्रामीणों, शिक्षकों और बच्चों को फ्लोरोसिस बीमारी के कारण, लक्षण और बचाव के उपायों की जानकारी दी गई। इसके लिए पंपलेट और पोस्टर के माध्यम से जागरूक किया गया।1 पीपीएम से अधिक फ्लोराइड वाला पानी न पिएं….नोडल अधिकारी डॉ. भारती ने बताया कि फ्लोरोसिस से बचाव के लिए पीने के पानी में फ्लोराइड की मात्रा 1 पीपीएम से अधिक नहीं होनी चाहिए। लोगों को दैनिक आहार में दूध, दही और हरी सब्जियों का अधिक उपयोग करने की सलाह दी गई। लंबे समय तक अधिक फ्लोराइडयुक्त पानी का सेवन करने से डेंटल फ्लोरोसिस, स्केलेटन फ्लोरोसिस और नॉन-स्केलेटन फ्लोरोसिस होने की संभावना रहती है।शिविर के दौरान स्वास्थ्य विभाग के सीएचओ, एएनएम, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और आशा कार्यकर्ता सहित शिक्षक एवं ग्रामीणजन मौजूद रहे।
