वर्षावास के तृतीय रविवार पर पराभव सुत्त की धम्म देशना छिंदवाड़ा समता बुद्ध विहार

, आंबेडकर नगर, छिंदवाड़ा में वर्षावास के तृतीय रविवार के अवसर पर बुद्ध धम्म वंदना, त्रिशरण-पंचशील एवं धम्म देशना का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पूज्य भंते शुभमचित्त जी ने पराभव सुत्त पर विस्तृत धम्म देशना देते हुए उपासक-उपासिकाओं को जीवन में उन्नति तथा पराभव के कारणों को समझाया।धम्म देशना में बताया गया कि भगवान बुद्ध ने पराभव के प्रमुख कारणों के रूप में दुश्चरित्र एवं दुस्सील आचरण, दुष्ट संगति, आलस्य, माता-पिता की उपेक्षा, छल-कपट, अहंकार, व्यसन, अनैतिक आचरण, लालच तथा धन का दुरुपयोग आदि को बताया है। इसके विपरीत धम्म के प्रति अनुराग, सदाचार, विवेकपूर्ण आचरण एवं कुशल कर्म व्यक्ति के जीवन में उन्नति और मंगल का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

पूज्य भंते जी शुभमचित्त ने कहा कि व्यक्ति के पराभव का प्रमुख कारण अकुशल कर्म एवं दुश्चरित्र है। यदि मनुष्य बुद्ध के बताए धम्म मार्ग पर चलते हुए अपने आचरण को शील, प्रज्ञा और सदाचार से परिपूर्ण करे, तो वह अपने जीवन को सुखी, शांत, सदाचारी एवं मंगलमय बना सकता है।कार्यक्रम में डॉ. अंबेडकर समता विकास समिति के अध्यक्ष संदीप बोरकर, वरिष्ठ उपाध्यक्ष मीना ठवरे, महासचिव कमलेश चौरासे, कोषाध्यक्ष डॉ. प्रमोद वासनिक, एस. बी. सोनटक्के, सुभाष गोंडाने, भीमराव सोमकुंवर, आशाराम मेश्राम, एस. एल. गेडाम, वसन्ता सोमकुंवर, यू. आर. बागड़े, दीपकराज बागड़े, एस. आर. सोमकुंवर, संध्या वाहने, प्रहलाद मालवीय, देवेंद्र खांडेकर,शिरीष कोचे , ओर शुभम सहारे मीडिया प्रभारी संदीप गायकवाड़, बाबूलाल चौहान सहित बड़ी संख्या में उपासक-उपासिकाओं की सक्रिय भागीदारी रही।कार्यक्रम का उद्देश्य भगवान बुद्ध के धम्म संदेश को जन-जन तक पहुँचाना तथा समाज में शील, सदाचार, मैत्री, प्रज्ञा और नैतिक जीवन-मूल्यों को बढ़ावा देना रहा।