शिक्षा का उद्देश्य चरित्र निर्माण और मानवीय मूल्यों का विकास – अरुण यादव , प्रियदर्शिनी स्कूल में वैज्ञानिक अध्ययन तकनीक, पर्यावरण संरक्षण एवंजीवन मूल्यों पर विशेष कार्यशाला का आयोजन

। रिपोर्टर नवीन रायली ‘जॉय ऑफ गिविंग’ के संस्थापक डॉ. दिलीप कर्पे ने विद्यार्थियों को दिएस्मार्ट स्टडी, पर्यावरण संरक्षण और बेहतर जीवनशैली के प्रेरक सूत्र विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास के साथ-साथ उनमें पर्यावरण संरक्षण, नैतिक मूल्यों, सामाजिक जिम्मेदारी एवं जीवन कौशल की भावना विकसित करने के उद्देश्य से प्रियदर्शिनी पब्लिक हायर सेकेंडरी स्कूल, बोरावां में संस्था ‘जॉय ऑफ गिविंग’ के सानिध्य में विशेष जागरूकता एवं प्रेरक कार्यशाला का आयोजन किया गया। 5 अगस्त को आयोजित इस कार्यशाला में कक्षा 6 से 12 तक के 450 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। विद्यालय परिवार की ओर से मुख्य अतिथि एवं रिसोर्स पर्सन डॉ. दिलीप कर्पे, पूर्व प्राचार्य, प्रसिद्ध शिक्षाविद्, प्रेरक वक्ता एवं ‘जॉय ऑफ गिविंग’ के संस्थापक का पुष्पगुच्छ भेंट कर आत्मीय स्वागत किया गया।मेधावी विद्यार्थियों एवं अभिभावकों का सम्मानकार्यशाला के प्रारंभ में सत्र 2025-26 की विद्यालय प्रावीण्य सूची में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले मेधावी विद्यार्थियों एवं उनके अभिभावकों का सम्मान किया गया। विद्यार्थियों को सम्मान एवं प्रगति के प्रतीक स्वरूप पौधे भेंट कर उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी गईं। इस अवसर पर विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ प्रकृति संरक्षण का संदेश भी दिया गया।छोटी आदतों से बड़े बदलाव का संदेशकार्यशाला के प्रथम चरण में ‘बड़े काम की छोटी बातें’ अभियान के अंतर्गत विद्यार्थियों को दैनिक जीवन की छोटी-छोटी आदतों में सकारात्मक बदलाव लाकर बेहतर जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।

संवादात्मक गतिविधियों एवं रोचक उदाहरणों के माध्यम से पानी और बिजली की बचत, प्लास्टिक के उपयोग में कमी, स्वच्छता, प्रदूषण नियंत्रण तथा स्वस्थ दिनचर्या जैसे विषयों पर व्यावहारिक जानकारी दी ।शिक्षा का उद्देश्य चरित्र निर्माण और मानवीय मूल्यों का विकास – अरुण यादवसंस्था अध्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री अरुण यादव ने अपने प्रेषित संदेश में कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में चरित्र निर्माण, सामाजिक जिम्मेदारी एवं मानवीय मूल्यों का विकास करना है। उन्होंने प्रकृति संरक्षण, संसाधनों के सदुपयोग एवं समाज के प्रति संवेदनशीलता को आज की शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने ‘जॉय ऑफ गिविंग’ संस्था की पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों में सेवा, सहयोग एवं सकारात्मक सोच की भावना को मजबूत करते हैं।‘टेन स्मॉल टिप्स फॉर बिग रिजल्ट’ से सीखी स्मार्ट स्टडीकार्यशाला के दूसरे चरण में ‘बड़े नतीजों के लिए 10 छोटे टिप्स’ विषय पर विद्यार्थियों को वैज्ञानिक एवं परिणामोन्मुख अध्ययन तकनीकों की जानकारी दी गई। डॉ. दिलीप कर्पे ने विद्यार्थियों को बताया कि कम समय में अधिक प्रभावी एवं गुणवत्तापूर्ण अध्ययन कैसे किया जा सकता है। उन्होंने एकाग्रता, समय प्रबंधन, नियमित पुनरावृत्ति, छोटे अध्ययन लक्ष्य, सकारात्मक सोच और स्मार्ट स्टडी तकनीकों को परीक्षा में सफलता का महत्वपूर्ण आधार बताया। अपने प्रेरक उद्बोधन में डॉ. कर्पे ने कहा कि किसी भी कार्यशाला की वास्तविक सफलता उसके निरंतर अभ्यास और फॉलो-अप में निहित होती है। यदि विद्यार्थी छोटी-छोटी अच्छी आदतों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लें, तो वे बेहतर विद्यार्थी बनने के साथ-साथ जिम्मेदार नागरिक भी बन सकते हैं। उन्होंने ‘आओ बच्चों के बीच फिर से चलें’ की भावना के साथ शिक्षा को आनंदमय, व्यवहारिक एवं जीवनोपयोगी बनाने पर विशेष जोर दिया।शिक्षा के साथ चरित्र निर्माण भी जरूरी – डॉ. नितिन मिश्राविद्यालय के प्राचार्य डॉ. नितिन मिश्रा ने कहा कि आज की शिक्षा केवल पाठ्यपुस्तकों और परीक्षा के अंकों तक सीमित नहीं रह सकती। विद्यार्थियों में पर्यावरणीय चेतना, अनुशासन, सकारात्मक सोच, सामाजिक संवेदनशीलता, वैज्ञानिक अध्ययन पद्धति एवं जीवन कौशल विकसित करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से कार्यशाला में बताए गए सकारात्मक बदलावों को अपने दैनिक जीवन का स्थायी हिस्सा बनाने का आह्वान किया।भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करती हैं ऐसी कार्यशालाएं – संजीत यादवसंस्था के वरिष्ठ संचालक संजीत यादव ने कहा कि प्रियदर्शिनी पब्लिक हायर सेकेंडरी स्कूल विद्यार्थियों के शैक्षणिक, नैतिक, सामाजिक एवं व्यवहारिक विकास के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण, स्मार्ट अध्ययन पद्धति एवं जीवन मूल्यों पर आधारित कार्यशालाएं विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने के साथ उनमें नेतृत्व क्षमता, अनुशासन एवं आत्मविश्वास विकसित करती हैं।लगभग चार घंटे तक चली इस कार्यशाला में विद्यार्थियों के साथ विद्यालय के शिक्षक भी सक्रिय रूप से उपस्थित रहे। शिक्षकों की सहभागिता से यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया कि कार्यशाला में बताई गई अच्छी आदतों एवं अध्ययन तकनीकों को विद्यालय तथा घर, दोनों स्तरों पर नियमित रूप से अपनाया जा सके।कार्यक्रम के समापन पर संस्था उप प्राचार्य संजेश वर्मा ने मुख्य वक्ता डॉ. दिलीप कर्पे, अतिथियों, विद्यालय प्रबंधन, शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए इस प्रकार के ज्ञानवर्धक, वैज्ञानिक एवं प्रेरणादायी कार्यक्रम निरंतर आयोजित किए जाना आवश्यक है। अंत में संस्था वरिष्ठ विभाग समन्वयक श्री चेतन पटेल ने विश्वास व्यक्त किया कि यह कार्यशाला विद्यार्थियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने, पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी विकसित करने तथा स्मार्ट अध्ययन पद्धतियों को अपनाकर बेहतर शैक्षणिक परिणाम प्राप्त करने की दिशा में प्रभावी एवं प्रेरणादायी सिद्ध होगी।