विद्यार्थियों में बढ़ी हलचल हाई कोर्ट के निर्देश के बाद छात्र नेताओं ने किया स्वागत लिंगदोह समिति की सिफारिशों के अनुसार प्रत्यक्ष चुनाव कराने की मांग

शकील खान मनावर 9755 49 8752*मनावर। जिला धार।। मध्यप्रदेश के महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में लंबे समय से बंद छात्रसंघ चुनाव फिर शुरू होने की उम्मीद जगी है। छात्रसंघ चुनाव कराए जाने को लेकर हाई कोर्ट के निर्देश के बाद विद्यार्थियों और छात्र नेताओं में हलचल बढ़ गई है। छात्र नेताओं ने न्यायालय के निर्देश का स्वागत करते हुए इसे युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पूर्व तहसील संयोजक, महाविद्यालय चुनाव संचालक समिति प्रमुख, एडवोकेट, पत्रकार दिलीप कुमरावत ने कहा कि छात्रसंघ चुनाव केवल प्रतिनिधि चुनने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थियों के लिए लोकतंत्र की पहली पाठशाला है। चुनाव के माध्यम से विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता, जिम्मेदारी, संवाद कौशल, संगठन क्षमता और जनसेवा की भावना विकसित होती है। ऐसे में लंबे अंतराल के बाद चुनाव की संभावना युवाओं के लिए महत्वपूर्ण अवसर है।*2017 के बाद से नहीं हुए चुनाव* मध्यप्रदेश के महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में वर्ष 2017 के बाद से छात्रसंघ चुनाव नहीं हुए हैं। करीब आठ वर्ष से चुनाव नहीं होने के कारण विद्यार्थियों को अपने प्रतिनिधि चुनने और छात्र हितों से जुड़े मुद्दों को लोकतांत्रिक मंच पर उठाने का अवसर नहीं मिल पाया है। छात्र नेताओं का कहना है कि महाविद्यालय और विश्वविद्यालय केवल शिक्षा प्राप्त करने के केंद्र नहीं हैं, बल्कि युवाओं के व्यक्तित्व और नेतृत्व निर्माण के महत्वपूर्ण संस्थान भी हैं। छात्रसंघ चुनाव विद्यार्थियों को संगठन संचालन, समस्याओं को समझने, प्रशासन के समक्ष अपनी बात रखने और सामूहिक निर्णय लेने का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करते हैं।*लोकतंत्र की बुनियाद मजबूत करने वाला मंच* छात्र नेताओं के अनुसार लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूत नींव विद्यार्थी जीवन से ही तैयार होती है। अपने विचार व्यक्त करना, सहमति-असहमति दर्ज कराना और प्रतिनिधि का लोकतांत्रिक तरीके से चयन करना युवाओं को लोकतंत्र की प्रक्रिया समझने में मदद करता है। छात्रसंघ को विद्यार्थियों के नेतृत्व विकास और छात्र हितों से जुड़ा मंच बताते हुए कहा गया कि यदि चुनाव पारदर्शी और निर्धारित नियमों के अनुसार कराए जाएं तो महाविद्यालयों में स्वस्थ लोकतांत्रिक वातावरण विकसित हो सकता है।*लिंगदोह समिति की सिफारिशों के अनुसार चुनाव की मांग* छात्र नेताओं ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि छात्रसंघ चुनाव लिंगदोह समिति की सिफारिशों के अनुरूप कराए जाएं। साथ ही प्रत्यक्ष निर्वाचन प्रणाली के माध्यम से विद्यार्थियों को अपने प्रतिनिधि चुनने का अवसर दिया जाए। निर्धारित नियमों और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत चुनाव होने से योग्य, सक्षम, अनुशासित और छात्र हितों के प्रति प्रतिबद्ध नेतृत्व सामने आ सकता है। छात्रसंघ के माध्यम से परीक्षा, पुस्तकालय, छात्रावास, खेल सुविधाएं, परिवहन, छात्रवृत्ति और अन्य शैक्षणिक समस्याओं को प्रभावी तरीके से प्रशासन के सामने रखा जा सकेगा।*समस्याओं को मिलेगा संगठित मंच* महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों से जुड़े कई विषय सामने आते रहते हैं। निर्वाचित छात्र प्रतिनिधि इन समस्याओं को व्यवस्थित रूप से संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। छात्रसंघ विद्यार्थियों और महाविद्यालय प्रशासन के बीच संवाद का प्रभावी माध्यम भी बन सकता है।*युवाओं में विकसित होगी नेतृत्व क्षमता* छात्रसंघ चुनाव के समर्थकों का कहना है कि कॉलेज जीवन में नेतृत्व का अवसर मिलने से युवाओं में निर्णय लेने की क्षमता और जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है। चुनाव प्रक्रिया के दौरान विद्यार्थियों को संवाद, जनसंपर्क और संगठन संचालन का अनुभव मिलता है। निर्वाचित प्रतिनिधियों के सामने विद्यार्थियों की अपेक्षाओं को पूरा करने और अपने कार्यों के प्रति जवाबदेह रहने की जिम्मेदारी भी होती है।*छात्रसंघ चुनाव से संभावित लाभ* विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता का विकास। लोकतांत्रिक मूल्यों और प्रक्रियाओं की समझ मजबूत होगी।छात्र हितों से जुड़े मुद्दों को संगठित मंच मिलेगा। योग्य और जवाबदेह युवा नेतृत्व सामने आएगा। विद्यार्थियों और महाविद्यालय प्रशासन के बीच संवाद बढ़ेगा। महाविद्यालयों में लोकतांत्रिक वातावरण मजबूत होगा। युवाओं में सामाजिक जिम्मेदारी और जनसेवा की भावना विकसित होगी। राष्ट्र निर्माण में युवाओं की सक्रिय भागीदारी को बढ़ावा मिलेगा।*छात्र नेताओं की प्रमुख मांग* लिंगदोह समिति की अनुशंसाओं के अनुरूप पारदर्शी एवं निर्धारित नियमों के तहत छात्रसंघ चुनाव कराए जाएं और विद्यार्थियों को अपने प्रतिनिधि का लोकतांत्रिक तरीके से चयन करने का अधिकार दिया जाए।