आत्मउत्थान वर्षावास 2026 मैं गुरुदेव ने श्रद्धालुओं को दिया आत्म चिंतन का संदेश
। रिपोर्टर नवीन रायली चातुर्मास काल मे धर्म आराधना मे जुड़े श्रावक श्राविका गण मिथ्यात्व से सम्यक्त्व की ओर — मोक्ष की यात्रा का गुरु संदेश कसरावद। जैन श्वेतांबर श्री संघ, कसरावद के तत्वावधान में चल रहे आत्म उत्थान वर्षावास–2026 के अंतर्गत जैन महावीर भवन में परम पूज्य श्री हेमंतमुनिजी म.सा., श्री आदित्यमुनिजी म.सा., श्री सुहासमुनिजी म.सा. एवं श्री संजीवमुनिजी म.सा. आदि ठाणा–4 सुख-शाता पूर्वक विराजमान हैं।वर्षावास के दौरान आयोजित प्रवचन में गुरुदेव ने “मिथ्यात्व से सम्यक्त्व की ओर — मोक्ष की यात्रा” विषय पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि जीव अनादि काल से संसार में जन्म-मरण के चक्र में भटक रहा है। संसार में जीव के दुःखों का मूल कारण मिथ्यात्व है।गुरुदेव ने समझाया कि मिथ्यात्व का अर्थ है—जो वास्तविक है, उसमें श्रद्धा न रखना तथा जो अवास्तविक है, उसे वास्तविक मान लेना। मनुष्य शरीर, सांसारिक वस्तुओं और रिश्तों को अपना मान लेता है, जबकि अपने वास्तविक स्वरूप आत्मा और चेतन तत्व को भूल जाता है। यही जीव के संसार में भटकने का प्रमुख कारण है।उन्होंने कहा कि भगवान महावीर स्वामी ने मोक्षमार्ग की नींव सम्यक् दर्शन को बताया है। जब जीव की श्रद्धा सही दिशा में होती है तो उसका ज्ञान और आचरण भी सही दिशा में आगे बढ़ता है। सम्यक् दर्शन, सम्यक् ज्ञान और सम्यक् चारित्र—इन तीनों के समन्वय से मोक्षमार्ग प्रशस्त होता है।गुरुदेव ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि “आत्म उत्थान वर्षावास” के इस पावन अवसर पर संसार को बदलने से पहले अपनी दृष्टि और विचारों को बदलने का प्रयास करें। मिथ्यात्व का त्याग कर सम्यक्त्व को अपनाते हुए आत्मा के वास्तविक स्वरूप को पहचानने की दिशा में आगे बढ़ें।प्रतिदिन श्रावक श्राविका प्रवचन ज्ञान चर्चा एवं प्रतिक्रमण मे पापो की आलोचना कर अच्छी उपस्थिति मे आकर चातुर्मास को सफल कर लाभ लें रहे है