RTE भुगतान न होने पर निजी स्कूल संचालकों की अंतिम चेतावनी: 25 जून तक राशि न मिली, तो 1 जुलाई को भोपाल जाकर सरकार को सौंप देंगे बच्चे

मोहन शर्मा म्याना गुना
गुना | राइट टू एजुकेशन (RTE) के तहत प्रवेशित बच्चों की पिछले दो सत्रों की फीस प्रतिपूर्ति राशि (Fees Reimbursement) न मिलने से आक्रोशित निजी स्कूल संचालक अब आर-पार की लड़ाई के मूड में आ गए हैं। प्राईवेट स्कूल वेलफेयर संचालक मंच मध्य प्रदेश के आह्वान पर मंगलवार को गुना जिले के निजी स्कूल संचालक कलेक्टोरेट पहुंचे और जनसुनवाई में मुख्यमंत्री व राज्य शिक्षा केंद्र के नाम एक तीखा शिकायती आवेदन सौंपा।सौंपे गए ज्ञापन में स्कूल संचालकों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि आरटीई योजना के तहत उनके विद्यालयों में पढ़ रहे बच्चों के दो सत्र पूरे हो चुके हैं, लेकिन शासन स्तर से अभी तक भुगतान जारी नहीं किया गया है। लगातार दो वर्षों से राशि न मिलने के कारण सभी अशासकीय स्कूल गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। संचालकों का कहना है कि शिक्षकों का वेतन, बिजली, किराया और स्कूल के अन्य दैनिक खर्चों का वहन करना अब उनके लिए पूरी तरह असंभव हो चुका है। आगामी 1 जुलाई से नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने जा रहा है और इस भारी आर्थिक तंगी के बीच वे इन बच्चों को आगे की शिक्षा देने में पूरी तरह असमर्थ हैं।निजी स्कूल संचालकों ने विभाग को 25 जून 2026 तक की अंतिम समय-सीमा (डेडलाइन) दी है। उन्होंने घोषणा की है कि यदि इस अवधि तक लंबित आरटीई भुगतान का पूर्ण निराकरण नहीं किया गया, तो प्रदेश भर के संचालक आंदोलन के लिए विवश होंगे। इसके तहत 1 जुलाई 2026 को मध्य प्रदेश के समस्त प्रभावित स्कूल संचालक इन बच्चों को लेकर सीधे राज्य शिक्षा केंद्र भोपाल पहुंचेंगे और उन्हें विभाग को सौंप देंगे। संचालकों ने स्पष्ट किया कि चूंकि ये बच्चे सरकारी तंत्र के माध्यम से आवंटित किए गए थे, इसलिए विभाग इन्हें अपने संरक्षण में ले और तय करे कि इन्हें कहां पढ़ाना है। इसके बाद बच्चों की पढ़ाई में होने वाले किसी भी व्यवधान की पूरी जिम्मेदारी शासन की होगी।