विधानसभा में किसानों की समस्याओं पर गरजीं जोबट विधायक सेना महेश पटेल, सरकार को घेरा

भोपाल, 20 जुलाई। मध्यप्रदेश विधानसभा में किसानों की समस्याओं को लेकर जोबट विधायक सेना महेश पटेल ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जो किसान पूरे देश का पेट भरता है, वही आज सबसे अधिक कर्जदार, परेशान और उपेक्षित है।विधायक सेना महेश पटेल ने कहा कि सरकार कृषि विकास दर और रिकॉर्ड उत्पादन के दावे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। किसान आज खाद, बीज, बिजली और अपनी उपज के उचित मूल्य के लिए संघर्ष कर रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसान वास्तव में खुशहाल है तो वह खाद के लिए लंबी कतारों में क्यों खड़ा है, टोकन के लिए दर-दर क्यों भटक रहा है और कर्ज के बोझ तले दबकर आत्महत्या करने को मजबूर क्यों हो रहा है।सदन में बोलते हुए सेना महेश पटेल ने प्रदेश में डीएपी और यूरिया खाद की कमी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुसार खाद उपलब्ध कराने के बजाय कई जगहों पर सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP) और अन्य खाद जबरन थोपे जा रहे हैं। साथ ही खाद की कालाबाजारी और किसानों के शोषण की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।उन्होंने कहा कि किसान सुबह 4 बजे से खाद केंद्रों पर लाइन में लग जाता है, लेकिन शाम तक उसे यह कहकर लौटा दिया जाता है कि स्टॉक खत्म हो गया है। दूसरी ओर निजी विक्रेताओं के पास पर्याप्त खाद उपलब्ध रहती है। उन्होंने पूछा कि आखिर किसानों को खाद उपलब्ध कराने में बाधा क्यों आ रही है।विधायक सेना महेश पटेल ने गेहूं खरीदी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए और कहा कि टोकन, सर्वर और पोर्टल की समस्याओं ने किसानों को परेशान कर रखा है। उन्होंने गेहूं खरीदी में सामने आए भ्रष्टाचार और फर्जी खरीदी-भुगतान मामलों की एसआईटी जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि व्यवस्था पारदर्शी है तो बार-बार उपार्जन घोटाले क्यों सामने आते हैं।किसानों को बिजली संकट का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों को सिंचाई के लिए रात 12 बजे और 2 बजे बिजली दी जाती है, जिससे उन्हें पूरी रात खेतों में काम करना पड़ता है। जोबट एवं अलीराजपुर क्षेत्र में ट्रांसफार्मरों की कमी और सिंचाई सुविधाओं के अभाव का मुद्दा भी उन्होंने सदन में उठाया।विधायक सेना महेश पटेल ने सरकार से मांग की कि अलीराजपुर सहित कम वर्षा वाले सभी जिलों का तत्काल सर्वे कराया जाए, प्रभावित क्षेत्रों को तुरंत सूखाग्रस्त घोषित किया जाए, किसानों को प्रति हेक्टेयर पर्याप्त मुआवजा दिया जाए, कृषि ऋण की वसूली पर रोक लगाई जाए तथा किसानों के ब्याज माफ किए जाएं। साथ ही डीएपी और यूरिया की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने, खाद की कालाबाजारी पर कठोर कार्रवाई करने और टोकन व्यवस्था को सरल बनाने की मांग भी उन्होंने सदन में रखी।उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याओं का समाधान केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई से होगा और सरकार को किसानों के हित में तत्काल निर्णय लेना चाहिए।