बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य के लिए योग है सबसे प्रभावी माध्यम: योगाचार्य महेश पाल

गुना। वर्तमान समय में बच्चों की बदलती जीवनशैली, अत्यधिक मोबाइल उपयोग, शारीरिक निष्क्रियता और बढ़ते मानसिक दबाव को देखते हुए गायत्री मंदिर, गुना में बच्चों के उत्तम शारीरिक, मानसिक एवं बौद्धिक विकास के उद्देश्य से एक विशेष योग सत्र का आयोजन किया गया। इस अवसर पर योगाचार्य महेश पाल ने बच्चों को उनकी आयु के अनुरूप विशेष योगाभ्यास कराए तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया।योगाचार्य महेश पाल ने बताया कि आज का बच्चा पहले की अपेक्षा अधिक समय मोबाइल, टीवी और अन्य डिजिटल उपकरणों पर व्यतीत कर रहा है। वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार अत्यधिक स्क्रीन टाइम से बच्चों में मोटापा, आंखों की समस्याएं, गर्दन एवं रीढ़ की तकलीफ, नींद की कमी, तनाव, चिड़चिड़ापन, एकाग्रता में कमी तथा मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। वहीं नियमित योगाभ्यास शरीर और मस्तिष्क के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर बच्चों की स्मरण शक्ति, एकाग्रता, आत्मविश्वास तथा भावनात्मक संतुलन को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।उन्होंने बच्चों को संतुलित एवं पौष्टिक आहार, नियमित दिनचर्या, पर्याप्त नींद, शारीरिक सक्रियता तथा सकारात्मक सोच के महत्व के बारे में वैज्ञानिक तथ्यों के साथ जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि एक संपूर्ण जीवन पद्धति है, जो बिना दवा के स्वास्थ्य संरक्षण और रोगों की रोकथाम का प्रभावी माध्यम है। यदि बचपन से ही योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाया जाए तो भविष्य में मधुमेह, मोटापा, उच्च रक्तचाप, तनाव और अन्य जीवनशैली संबंधी अनेक रोगों के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।योग सत्र के दौरान बच्चों को ताड़ासन, वृक्षासन, भुजंगासन, वज्रासन सहित आयु के अनुरूप विभिन्न योगासनों का अभ्यास कराया गया। साथ ही योग प्रार्थना, ध्यान एवं एकाग्रता बढ़ाने वाले विशेष अभ्यास भी कराए गए, जिससे बच्चों में मानसिक शांति, अनुशासन और सकारात्मक ऊर्जा का विकास हो सके।इस अवसर पर बच्चों को योगासन प्रतियोगिताओं एवं योग के खेल स्वरूप की भी जानकारी दी गई तथा उन्हें नियमित अभ्यास कर जिला, राज्य ओर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए प्रेरित किया गया।योगाचार्य महेश पाल ने कहा कि स्वस्थ, संस्कारित और आत्मविश्वासी बच्चे ही सशक्त भारत की नींव हैं। प्रत्येक अभिभावक और विद्यालय का दायित्व है कि बच्चों को प्रतिदिन योग के लिए प्रेरित करें। जब बच्चे शारीरिक रूप से स्वस्थ, मानसिक रूप से संतुलित और चरित्रवान बनेंगे, तभी वे परिवार, समाज और राष्ट्र निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेंगे।कार्यक्रम के अंत में सभी बच्चों ने प्रतिदिन योग करने का संकल्प लिया तथा उपस्थित अभिभावकों ने भी बच्चों के स्वस्थ भविष्य के लिए नियमित योगाभ्यास को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने का संकल्प व्यक्त किया।