इंदौर जिले केआईआईएम इंदौर ने शैक्षणिक सत्र 2026–27 के लिए नए बैचों का किया स्वागतपीजीपी, पीजीपी-एचआरएम, आईपीएम-IV और डीपीएम में 634 प्रतिभागियों ने लिया प्रवेश

प्रकाश सिसोदिया इंदौर जिले केआईआईएम इंदौर ने शैक्षणिक सत्र 2026–27 के लिए नए बैचों का किया स्वागतपीजीपी, पीजीपी-एचआरएम, आईपीएम-IV और डीपीएम में 634 प्रतिभागियों ने लिया प्रवेश; उत्कृष्टता की नई यात्रा का हुआ शुभारंभभारतीय प्रबंध संस्थान इंदौर आईआईएम इंदौर ने शैक्षणिक सत्र 2026–27 के लिए अपने नए बैचों का स्वागत किया। इस वर्ष संस्थान के प्रमुख कार्यक्रमों: पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम इन मैनेजमेंट (PGP), पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम इन ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट (PGP-HRM), इंटीग्रेटेड प्रोग्राम इन मैनेजमेंट – चतुर्थ वर्ष (IPM-IV) तथा डॉक्टोरल प्रोग्राम इन मैनेजमेंट DPM में कुल 634 प्रतिभागियों ने प्रवेश लिया।आईआईएम इंदौर के निदेशक प्रो. हिमांशु राय ने नए बैच का उद्घाटन किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि लेफ्टिनेंट जनरल श्री अजय चांदपुरिया, कमांडेंट, आर्मी वॉर कॉलेज, महू, रहे।अपने उद्घाटन संबोधन में प्रो. हिमांशु राय ने नवप्रवेशित प्रतिभागियों को उत्कृष्टता प्राप्त करने, नवाचार को बढ़ावा देने तथा करुणा और समभाव के साथ जीवन में आगे बढ़ने का संदेश दिया। उन्होंने विद्यार्थियों से विनम्र बने रहने, निरंतर सीखते रहने, और सामाजिक अपेक्षाओं के बजाय अपनी आकांक्षाओं के अनुरूप जीवन का मार्ग चुनने का आग्रह किया। तेजी से बदलती दुनिया में अनुकूलन क्षमता के महत्व पर बल देते हुए उन्होंने विद्यार्थियों को उन बातों पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी जो उनके नियंत्रण में हैं तथा आजीवन सीखने के माध्यम से स्वयं को सशक्त बनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने उत्तरदायी नेतृत्व और सतत विकास की आवश्यकता पर भी जोर देते हुए विद्यार्थियों से सामाजिक रूप से संवेदनशील नेतृत्वकर्ता बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “आप यहाँ केवल डिग्री प्राप्त करने के लिए नहीं आए हैं, बल्कि स्वयं को खोजने और समाज में सार्थक परिवर्तन लाने के लिए आए हैं।”मुख्य अतिथि लेफ्टिनेंट जनरल श्री अजय चांदपुरिया ने विद्यार्थियों को बड़े सपने देखने, स्पष्ट दृष्टि विकसित करने तथा निरंतर बदलती दुनिया में प्रभावी नेतृत्व के लिए स्वयं को तैयार करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत का भविष्य उसके युवाओं के हाथों में है और उन्हें सत्यनिष्ठा, नैतिक साहस, अनुकूलन क्षमता, सहानुभूति तथा निर्णायक नेतृत्व जैसे गुणों का विकास करना चाहिए। सैन्य नेतृत्व के अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि एक सच्चा नेता विश्वास अर्जित करता है, स्वयं उदाहरण प्रस्तुत करता है और परिणामों से पहले लोगों को प्राथमिकता देता है। उन्होंने कहा, “एक सच्चा नेता वही है जो मार्ग जानता है, मार्ग दिखाता है और सबसे महत्वपूर्ण, स्वयं उस मार्ग पर चलता है।” उन्होंने विद्यार्थियों से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने वाले उत्तरदायी और आजीवन सीखने वाले पेशेवर बनने का आह्वान किया।पीजीपी के चेयर प्रो. सायंतन बनर्जी ने नवप्रवेशित विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए उन्हें जिज्ञासा, विनम्रता और सत्यनिष्ठा के साथ आईआईएम इंदौर की शैक्षणिक यात्रा को अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने विद्यार्थियों से संस्थान के विविध छात्र समुदाय से सीखने, जिम्मेदारी के साथ नेतृत्व करने तथा यह समझने का आग्रह किया कि प्रबंधन शिक्षा केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता तक सीमित नहीं है, बल्कि विवेकपूर्ण निर्णय क्षमता, सहानुभूति और नैतिक नेतृत्व का विकास भी उतना ही महत्वपूर्ण है।पीजीपी 2026–28 बैच आईआईएम इंदौर की विविधता, समावेशन और शैक्षणिक उत्कृष्टता के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस पीजीपी बैच में 54.4 प्रतिशत प्रतिभागी महिलाएं हैं, जो लगातार दूसरे वर्ष संस्थान के प्रमुख प्रबंधन कार्यक्रम में पुरुष प्रतिभागियों से अधिक हैं। शैक्षणिक विविधता भी इस बैच की प्रमुख विशेषता है, जहां 54 प्रतिशत प्रतिभागी गैर-इंजीनियरिंग तथा 46 प्रतिशत इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि से हैं। इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी (126), प्रबंधन अध्ययन (67), वाणिज्य (66), कंप्यूटर विज्ञान (55) तथा अर्थशास्त्र (31) जैसे विषयों के साथ-साथ आर्किटेक्चर, चिकित्सा, पत्रकारिता, मनोविज्ञान, कृषि, विधि, फैशन डिजाइन, पशु चिकित्सा विज्ञान सहित अनेक विषयों से विद्यार्थी इस बैच का हिस्सा हैं, जो इसे एक वास्तविक बहुविषयक शिक्षण समुदाय बनाते हैं।यह बैच शैक्षणिक विविधता के साथ-साथ अनुभव का भी संतुलित मिश्रण प्रस्तुत करता है। 43 प्रतिशत प्रतिभागी पूर्व कार्यानुभव (वर्क एक्सपीरियंस) के साथ संस्थान में आए हैं, जिससे कक्षा में उद्योग जगत के व्यावहारिक अनुभव और विविध दृष्टिकोणों का समावेश होगा। भौगोलिक दृष्टि से भी यह बैच पूरे भारत का प्रतिनिधित्व करता है। महाराष्ट्र से सर्वाधिक 93 प्रतिभागी हैं, इसके बाद उत्तर प्रदेश (64) और दिल्ली (49) का स्थान है। वहीं, मध्य प्रदेश से 26 प्रतिभागियों ने प्रवेश लिया है।इसी प्रकार, पीजीपी-एचआरएम 2026–28 बैच भी शैक्षणिक और भौगोलिक विविधता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है। इस बैच में 95.35 प्रतिशत प्रतिभागी महिलाएं हैं। साथ ही 88 प्रतिशत प्रतिभागी गैर-इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि से आते हैं, जो इस कार्यक्रम की बहुविषयक प्रकृति को रेखांकित करता है। प्रतिभागियों ने प्रबंधन अध्ययन (8), वाणिज्य (7), अर्थशास्त्र (5), विज्ञान (3), इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी (3), मनोविज्ञान (2), राजनीति विज्ञान (2), साहित्य (2) सहित अनेक विषयों की पृष्ठभूमि से हैं। इस वर्ष के पीजीपी-एचआरएम बैच की एक विशेषता यह भी है कि 72 प्रतिशत प्रतिभागी पूर्व कार्यानुभव के साथ आए हैं, जिससे कक्षा में व्यावहारिक अनुभव और उद्योग जगत की समझ और समृद्ध होगी। यह बैच 18 राज्यों का प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें उत्तर प्रदेश (7) से सर्वाधिक प्रतिभागी हैं, इसके बाद महाराष्ट्र (5) और मध्य प्रदेश (4) का स्थान है। यह कार्यक्रम की बढ़ती राष्ट्रीय पहचान और विविध विद्यार्थी समुदाय को दर्शाता है।शैक्षणिक उत्कृष्टता और सामाजिक सरोकार का सम्मानउद्घाटन समारोह के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित भी किया गया।पीजीपी-प्रथम वर्ष और आईपीएम-चतुर्थ वर्ष के संयुक्त बैच के उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों के साथ-साथ पीजीपी-एचआरएम के चयनित विद्यार्थियों को उनकी उल्लेखनीय शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए सर्टिफिकेट ऑफ एकेडमिक एक्सीलेंस प्रदान किए गए।संस्थान ने अपने प्रमुख रूरल एंगेजमेंट प्रोग्राम (REP) 2025 के अंतर्गत उत्कृष्ट कार्य करने वाले छात्र समूहों को भी सम्मानित किया। ग्रामीण विकास से जुड़े उनके शोध, विश्लेषण और सामुदायिक सहभागिता को विशेष रूप से सराहा गया।ओरिएंटेशन कार्यक्रम का समापन शैक्षणिक नियमों, छात्रावास एवं छात्र कल्याण, वित्तीय सहायता, पुस्तकालय संसाधनों, डिजिटल अवसंरचना तथा संस्थान की विभिन्न सहायता प्रणालियों से संबंधित विस्तृत जानकारी के साथ हुआ।इस अवसर पर विद्यार्थियों को कैंपस लाइफ से परिचित करने के लिए आईआईएम इंदौर का वार्षिक फुटबॉल मैच ‘द्रोणोत्सव’आयोजित हुआ।विविध प्रतिभाओं से समृद्ध यह नया बैच आईआईएम इंदौर में एक ऐसी शैक्षणिक यात्रा की शुरुआत कर रहा है, जिसका उद्देश्य उत्तरदायी, नवोन्मेषी और भविष्य के लिए तैयार नेतृत्वकर्ताओं का निर्माण करना है।