आउटसोर्स की नीति के चलते लीक हुआ नीट का पर्चा कांग्रेस चला रही है देशभर में छात्रों की गूंज अभियान 9 अगस्त को होगा समापन जयवर्धन सिंह का बड़ा आरोप

-पूरे देश को आउटसोर्स पर करना चाहते हैं मोदी मोहन यादव के कथित जमीन घोटाले पर मांगी सीएम की सफाई**दैनिक शौर्य टाईम्स गुना*एमपी के पूर्व मंत्री, गुना कांग्रेस के जिला अध्यक्ष जयवर्धन सिंह ने नीट पेपर लीक मामले और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर लगे कथित जमीन घोटालों को लेकर केंद्र व राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। जयवर्धन सिंह ने आरोप लगाया कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने जानबूझकर परीक्षा प्रक्रिया को भाजपा समर्थित निजी कंपनियों को आउटसोर्स कर युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है। इस महाघोटाले और 20 लाख छात्रों के साथ हुए अन्याय के विरोध में कांग्रेस ने 25 जून से देशभर में छात्रों की गूंज अभियान की शुरूआत की है, जो 9 अगस्त को दिल्ली में राहुल गांधी की मौजूदगी में समाप्त होगा। इसके साथ ही उन्होंने महाकाल की नगरी उज्जैन में सिंहस्थ 2028 से पहले मुख्यमंत्री परिवार द्वारा खरीदी गई जमीनों की जांच और इस पर सीएम से तत्काल पत्रकारवार्ता कर सफाई देने की मांग की है। जयवर्धन सिंह ने पत्रकार वार्ता में केंद्र सरकार पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि जबसे एनटीए का गठन हुआ है, तबसे परीक्षा की पूरी प्रक्रिया में जानबूझकर बदलाव किए गए। भाजपा सरकार ने पेपर बनाने, प्रिंटिंग करने, ट्रांसपोर्टेशन और एग्जाम सेंटर के संचालन का पूरा जिम्मा निजी कंपनियों को आउटसोर्स कर दिया है। ये सभी निजी संस्थाएं भाजपा नेताओं या उनके करीबियों से सीधे जुड़ी हुई हैं।उन्होंने एक गंभीर तथ्य उजागर करते हुए कहा कि सीबीएसई परीक्षा प्रक्रिया में जो कंपनी पहले ब्लैकलिस्टेड थी, उसे नियमों को ताक पर रखकर ठेका दिया गया। एनटीए को एक ऐसी स्वतंत्र संस्था बना दिया गया है जो खुद को संसद के प्रति भी उत्तरदायी नहीं मानती है, जिसे लेकर राहुल गांधी भी सदन में जवाब मांग चुके हैं। सिंह ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार पूरे देश को आउटसोर्स करना चाहती है और इसके ठेके भाजपा समर्थित उद्योगपतियों को दिए जा रहे हैं जो लगातार अमीर होते जा रहे हैं।जिनके रहते एमपी में अनियमितता हुईं, उन्हें एनटीए सौंप दियाजयवर्धन सिंह ने एनटीए के अध्यक्ष प्रदीप जोशी की नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए कहा जोशी साल 2006 से 2011 तक मध्य प्रदेश पीएससी के चेयरमैन थे, तब प्रोफेसर भर्ती में भारी भ्रष्टाचार पाया गया था। इसके बावजूद उन्हें छत्तीसगढ़ पीएससी और फिर यूपीएससी का अध्यक्ष बनाया गया। साल 2023 में जब उन्हें एनटीए की कमान सौंपी गई, तो पिछले तीन साल में नीट 2024 और 2026 के पर्चे लीक हो गए। सरकार अलग-अलग परीक्षाओं के नाम पर शिक्षा के आवंटित बजट से भी ज्यादा शुल्क छात्रों से वसूल रही है, लेकिन पेपर लीक होने के बाद भी छात्रों की फीस वापस नहीं की गई।नीट पेपर लीक के खिलाफ कांग्रेस का छात्रों की गूंज अभियानमई के महीने में हुए नीट परीक्षा घोटाले को लेकर देशभर के युवाओं और पालकों में भारी आक्रोश है। इस मानसिक प्रताड़ना और अनिश्चितता के कारण देशभर में अब तक 12 छात्र आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम उठा चुके हैं। छात्र 15 वर्ष की आयु से इस परीक्षा की तैयारी में जुटते हैं और 3 से 4 साल इसके लिए समर्पित करते हैं, लेकिन परीक्षा के ठीक एक महीने बाद 21 जून को उन्हें दोबारा परीक्षा देने पर मजबूर किया गया। इस बदइंतजामी और मनोबल टूटने के कारण लगभग 2 लाख छात्र दोबारा परीक्षा में बैठ ही नहीं पाए। इस छात्र विरोधी नीति के खिलाफ कांग्रेस ने 25 जून से देश के 28 शहरों में छात्रों की गूंज कैंपेन शुरू किया है। इसी क्रम में मध्य प्रदेश के तीन प्रमुख शहरों भोपाल, इंदौर और ग्वालियर में कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने पत्रकारवार्ता कर भाजपा को घेरा। जयवर्धन सिंह स्वयं बिलासपुर गए थे, जहां उन्होंने इस महाघोटाले पर सरकार को कटघरे में खड़ा किया। इस राष्ट्रव्यापी आंदोलन का समापन 9 अगस्त को दिल्ली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की मौजूदगी में एक बड़े प्रदर्शन के साथ होगा।महाकाल की नगरी में पैसों के दुरुपयोग पर सीएम चुप क्यों?जयवर्धन सिंह ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर लग रहे जमीन संबंधी कथित आरोपों को लेकर भी राज्य सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि अगर कुछ भी गलत नहीं हुआ है, तो मुख्यमंत्री मोहन यादव स्वयं सामने आकर इस पर सफाई क्यों नहीं दे रहे हैं? भाजपा के ही प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल भी यह मान चुके हैं कि डॉ. मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके परिवार ने कई जमीनें खरीदी हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी द्वारा लगाए गए आरोपों का समर्थन करते हुए जयवर्धन सिंह ने कहा कि बाबा महाकाल की पवित्र नगरी में बड़े पैमाने पर वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताएं हुई हैं। भाजपा के ही बड़े नेताओं ने यह जानकारी साझा की है कि यादव परिवार द्वारा खरीदी गई इन निजी जमीनों को सिंहस्थ 2028 से पहले सरकारी पैसे से विकसित करने की योजना बनाई गई है। सिंह ने चुटकी लेते हुए कहा कि अब यह जानकारी मामा यानी पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने किसी बड़े राष्ट्रीय अखबार को लीक की या फिर भाजपा के अन्य असंतुष्ट नेताओं ने, लेकिन इस पर मुख्यमंत्री की चुप्पी गंभीर संदेह पैदा करती है। महाकाल की नगरी के पैसे के दुरुपयोग के इन गंभीर आरोपों पर सीएम को तुरंत प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जनता को सच्चाई बतानी चाहिए।