आजीविका मिशन में 3.74 करोड़ की गड़बड़ी पर FIR:हितग्राहियों की जगह निजी खातों में भेजे गए करोड़ों रुपये; काउंटेंट समेत तीन पर केस

गुना में ग्रामीण आजीविका मिशन में 3.74 करोड़ की गड़बड़ी के मामले में FIR दर्ज की गई है। मामले में अकाउंटेंट, सहायक वित्त प्रबंधक और तत्कालीन जिला परियोजना प्रबंधक को आरोपी बनाया गया है**बता दें कि मप्र राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत जिले में गठित स्व-सहायता समूहों और उनके सामुदायिक संगठनों के वित्तीय लेन-देन की जानकारी भारत सरकार द्वारा बनाए गए लोकोस (LOKOS) पोर्टल पर दर्ज की जाती है। किस समूह को कितना पैसा गया और कब-कब भुगतान हुआ, इसकी जानकारी इसी पोर्टल पर रहती है*।*पोर्टल पर दिखाई राशि लेकिन बैंक रिकॉर्ड में नहीं**इसी दौरान मई महीने में कार्रवाई के तहत मिशन के वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (FDM) पोर्टल और लोकोस पोर्टल के आंकड़ों का मिलान किया गया। इसमें प्रतिज्ञा सीएलएफ, विकासखंड गुना से जुड़ी 90.25 लाख रुपये की राशि में गड़बड़ी सामने आई। FDM पोर्टल पर यह राशि दिखाई दे रही थी, लेकिन बैंक रिकॉर्ड और बैंक स्टेटमेंट की जांच में यह राशि वास्तव में नहीं मिली**जैसे ही यह जानकारी सामने आई, विभाग में हड़कंप मच गया। जिला पंचायत CEO ने तीन सदस्यों की टीम बनाकर जांच के आदेश दिए। साथ ही राज्य स्तर पर भी इसकी शिकायत की गई, जिसके बाद राज्य की टीम भी जांच कर रही है। मामले में वित्तीय रिकॉर्ड, पोर्टल पर दर्ज जानकारी और संबंधित बैंक खातों की जांच की जा रही है*।*शुरुआती जांच में सामने आया कि यह पूरी गड़बड़ी वित्तीय वर्ष 2021-22 के दौरान हुई। उस समय विष्णु पंवार DPM के पद पर पदस्थ थे। वहीं मनोज जैन अकाउंटेंट और अमित अग्रवाल सहायक वित्त प्रबंधक थे। जांच के दौरान वर्ष 2019 से 2025 तक के खातों की पड़ताल की गई। इसमें गड़बड़ी बढ़कर 3.74 करोड़ रुपये की निकली*।*निजी व्यक्तियों और संस्थाओं को भेजा गया पैसा**जांच में सामने आया कि जिन हितग्राहियों को पैसा मिलना था, उनकी जगह निजी व्यक्तियों और संस्थाओं के खातों में राशि भेजी गई। हालांकि, जिला परियोजना प्रबंधक विष्णु पंवार 11 फरवरी 2019 को राजगढ़ जिले में पदस्थ हो गए थे। इसके बाद भी उनके हस्ताक्षरों का इस्तेमाल वित्तीय लेन-देन में होता रहा*।*राज्य स्तरीय समिति ने की थी FIR की सिफारिश**राज्य स्तरीय जांच समिति ने मामले को केवल विभागीय लापरवाही नहीं माना। रिपोर्ट में कहा गया कि शुरुआती जांच में मामला सरकारी धन की अफरा-तफरी, गंभीर वित्तीय गड़बड़ी और धोखाधड़ी से जुड़ा प्रतीत होता है। इसी आधार पर कलेक्टर गुना के माध्यम से FIR दर्ज कर विस्तृत आपराधिक जांच कराने की सिफारिश की गई थी। पत्र में यह भी कहा गया था कि पंजाब नेशनल बैंक के संबंधित खाते में पहुंची राशि किन खातों से आई, किन खातों में ट्रांसफर हुई और किसकी मंजूरी से भुगतान किए गए, इसकी पूरी जानकारी जुटाई जाए। साथ ही खाते से निकाली गई पूरी राशि का विवरण भी मांगा गया था*कैंट थाने में FIR दर्जगुरुवार को ग्रामीण आजीविका मिशन के डीपी कमठान ने कैंट थाने में जिला परियोजना समन्वयक की ओर से आवेदन दिया। इसके आधार पर कैंट पुलिस ने अमित अग्रवाल, मनोज जैन और विष्णु पंवार के खिलाफ FIR दर्ज की है। तीनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 316(5) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।