प्यास से तड़पती सकीना का पानी लाने कत्ल हो गए अब्बास मुहर्रम की मजलिसों में याद किया गया करबला का दर्दनाक मंजर

गुना हिजरी केलेनडर के पहले महीने मुहर्रम के प्रथम दस दिवस मुस्लिम समाज में इमाम हुसेन और उनके परिवार पर ढाए जुल्मो सितम को दर्द के साथ याद कर मनाए जाते हैं। स्थानीय बोहरा मस्जिद में मुहर्रम की दूसरी तारीख से वाज प्रवचन का सिलसिला जारी था जो बुधवार को योमे आशूर यानी दसवी तारीख को सम्पन्न हुआ। तकरीर करने मुम्बई से आए आमिल मुल्ला ताहिर ने बुधवार को दर्दनाक वाकया बयान करते हुए बताया कि इमाम हुसैन का पूरा कुनबा 3 दिन से प्यासा था। प्यास से व्याकुल उनकी बेटी सकीना जब सूखी मशकीजा लेकर अपने चाचा अब्बास से पानी मांगने गई तो अब्बास से बच्चों की प्यास नहीं देखी गई। अब्बास को इमाम हुसेन ने जंग की इजाजत नही दी थी। पूरा कुनबा तीन दिन की भूख और प्यास से बेहाल था। छोटे बच्चे माओं की गोद में दुबके बेठे थे। उनमे इतनी ताकत भी नही बची थी के आवाज निकल सके। इमाम हुसेन की नन्ही बच्ची सकीना ने तीन दिन की भूख और प्यास से तड़पते हुए छोटी सी मश्की पानी लाने के लिए अपने चचा अब्बास को थमाई। अब्बास ने इमाम हुसेन से पानी लाने की इजाजत मांगी थी। इजाजत मिलते ही वे पानी भरने नहर पहुचे थे जहां यजीद की फौज ने उनका बेदर्दी से कत्ल कर दिया था।इमाम हुसैन इब्न अली कर्बला के मैदान में सत्य, न्याय और इंसानियत की रक्षा के लिए अपने परिवार के साथ शहीद हुए थे। इमाम हुसैन किसी युद्ध को शुरू करने या सत्ता हासिल करने के उद्देश्य से नहीं निकले थे, बल्कि वे अपने परिवार और कुछ साथियों के साथ मदीना से निकले थे। उन्होंने तत्कालीन शासक यज़ीद इब्न मुआविया की बैअत (निष्ठा) स्वीकार करने से इनकार कर दिया था, क्योंकि उनका मानना था कि शासन को न्याय, नैतिकता और इस्लामी मूल्यों के अनुरूप होना चाहिए। कर्बला में इमाम हुसैन के काफिले को घेर लिया गया और तीन दिनों तक पानी से वंचित रखा गया। उनके साथ महिलाओं, बच्चों और परिवार के अन्य सदस्यों के अलावा मात्र छह माह के शिशु अली असगर भी मौजूद थे। आशूरा के दिन अली असगर सहित इमाम हुसैन के परिवार और साथियों ने शहादत प्राप्त की। इमाम हुसैन की यह कुर्बानी अन्याय के सामने झुकने से इनकार और सत्य के लिए सर्वोच्च बलिदान का प्रतीक मानी जाती है। आज भी दुनिया भर में योमे आशूरा के अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है और उनके संदेश हक, इंसाफ और मानवता को याद किया जाता है।बुधवार शाम 4 बजे से समापन कार्यक्रमबोहरा समाज के धर्मगुरु सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन इन दिनों लंदन में प्रवचन कर रहे हैं। जिसका मुख्य अंश पूरे देश के साथ गुना मस्जिद में भी प्रसारित किए जा रहे है। पहले दिन से ही बोहरा जमात खाने में दोनों समय तबर्रुक भोजन धर्मगुरु सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन साहब की ओर से मुस्तफा हुसैन एवं शब्बीर हुसैन द्वारा प्रबंध कराया जा रहा है। कार्यक्रम का समापन बुधवार को आशूरा पर्व के साथ शाम 4.15 बजे मकतल से आरम्भ होकर मगरिब की नमाज के साथ शाम साढ़े सात बजे सम्पन्न हो गया।