8 करोड़ की लागत से होगा स्वामीनारायण मंदिर का विस्तार, बनेगा भव्य सभा मंडप, संत निवास और विशाल प्रवेश द्वार ।पुरुषोत्तम मास के दौरान पत्रकारों के सहयोग की सराहना, 200वीं जयंती पर होगा भव्य महोत्सव

बुरहानपुर।सीलमपुरा स्थित प्राचीन श्री स्वामीनारायण मंदिर में गुरुवार को आयोजित विशेष पत्रकार वार्ता में मंदिर के महंत एवं कोठारी पूज्य पी.पी. स्वामी, शास्त्री चिंतनप्रियदास जी तथा वरिष्ठ शास्त्री चंद्रप्रकाश स्वामी ने मंदिर के विकास कार्यों, धार्मिक महत्व और आगामी योजनाओं की विस्तृत जानकारी साझा की।पत्रकार समाज का दर्पण, मंदिर को मिला अभूतपूर्व प्रचार : पी.पी. स्वामीपत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कोठारी पी.पी. स्वामी ने कहा कि पत्रकार समाज का दर्पण होता है। वह समाज को वही दिखाता है जो वास्तविकता में घटित हो रहा होता है। उन्होंने अधिक पुरुषोत्तम मास के दौरान 30 दिनों तक आयोजित दिव्य अभिषेक महोत्सव के समाचारों और तस्वीरों को प्रमुखता से प्रकाशित करने के लिए पत्रकारों का आभार व्यक्त किया।उन्होंने कहा कि पत्रकारों के सहयोग का ही परिणाम है कि आज बुरहानपुर का स्वामीनारायण मंदिर देशभर में एक विशेष धार्मिक धाम के रूप में पहचाना जाने लगा है। मंदिर में आयोजित दिव्य अभिषेक, धार्मिक अनुष्ठान और भगवान लक्ष्मीनारायण देव एवं हरिकृष्ण महाराज की महिमा जन-जन तक पहुंची है।मंदिर में बनेगा तीन मंजिला विशाल भवनसभा मंडप, पार्किंग और संत निवास की होगी व्यवस्थाशास्त्री चिंतनप्रियदास जी ने बताया कि आने वाले समय में मंदिर परिसर में एक विशाल निर्माण कार्य प्रारंभ होने जा रहा है। लगभग 8 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस प्रकल्प में अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त तीन मंजिला भवन का निर्माण किया जाएगा।उन्होंने बताया कि भवन में विशाल सभा मंडप, पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था तथा संत निवास का निर्माण किया जाएगा। देश-विदेश से आने वाले संतों और श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।भव्य प्रवेश द्वार बढ़ाएगा मंदिर की शोभाशास्त्री चिंतनप्रियदास जी ने कहा कि निर्माण योजना के अंतर्गत मंदिर परिसर में एक भव्य और विशाल प्रवेश द्वार भी बनाया जाएगा। यह प्रवेश द्वार मंदिर की पहचान और गौरव का प्रतीक होगा तथा दूर से ही श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित करेगा। उन्होंने कहा कि किसी भी धार्मिक स्थल की प्रथम पहचान उसका प्रवेश द्वार होता है और यह नया द्वार मंदिर की भव्यता में चार चांद लगाएगा।भगवान स्वामीनारायण द्वारा पूजित है बुरहानपुर की प्रतिमाछह माह तक स्वयं भगवान स्वामीनारायण ने की थी पूजावरिष्ठ शास्त्री चंद्रप्रकाश स्वामी ने मंदिर के ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि मंदिर में स्थापित दिव्य लक्ष्मीनारायण देव की प्रतिमा अत्यंत प्राचीन एवं चमत्कारिक है। यह वही प्रतिमा है जिसे स्वयं भगवान स्वामीनारायण ने भक्तों को प्रदान किया था।उन्होंने बताया कि बुरहानपुर के श्रद्धालु इस प्रतिमा को अपने कंधों पर रखकर यहां लेकर आए थे। शास्त्रीजी ने वड़ताल धाम की पौराणिक कथा का उल्लेख करते हुए बताया कि जिस स्थान पर आज वड़ताल धाम स्थित है, वहां माता लक्ष्मी ने भगवान नारायण को प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। वन विचरण के दौरान भगवान स्वामीनारायण उस स्थान पर पहुंचे और उसकी दिव्यता को पहचानते हुए वहां भव्य मंदिर की स्थापना का संकल्प लिया।उन्होंने बताया कि भगवान स्वामीनारायण बुरहानपुर की लक्ष्मीनारायण प्रतिमा का छह माह तक स्वयं पूजन करते रहे। बाद में यह दिव्य प्रतिमा बुरहानपुर के भक्तों को प्रदान की गई तथा वड़ताल में नई प्रतिमा की स्थापना हुई। यह प्रतिमा आज भी अनगिनत भक्तों की आस्था का केंद्र है। मान्यता है कि इसके दर्शन मात्र से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।200 वर्ष पूर्ण होने पर होगा भव्य द्विशताब्दी महोत्सवआचार्य राकेशप्रसाद दास जी परिवार सहित होंगे शामिलमंदिर के मीडिया प्रभारी गोपाल देवकर ने बताया कि भगवान लक्ष्मीनारायण देव की प्रतिष्ठा के 200 वर्ष पूर्ण होने जा रहे हैं। इस अवसर पर मंदिर में भव्य द्विशताब्दी महोत्सव का आयोजन किया जाएगा।उन्होंने बताया कि इस ऐतिहासिक आयोजन में वड़ताल गादी के आचार्य पूज्य राकेशप्रसाद दास जी महाराज परिवार सहित बुरहानपुर पधारेंगे। महोत्सव को राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित करने की तैयारी की जा रही है और इसे वड़ताल में आयोजित होने वाले भव्य धार्मिक आयोजनों की तर्ज पर मनाया जाएगा।उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि द्विशताब्दी महोत्सव से पूर्व मंदिर के प्रस्तावित निर्माण कार्य पूर्ण कर लिए जाएंगे, जिससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।पत्रकारों का किया सम्मान, मंदिर से जुड़े रहने का दिया संदेशपत्रकार वार्ता के दौरान मंदिर पदाधिकारियों ने पत्रकारों के सहयोग की सराहना करते हुए उन्हें मंदिर परिवार का अभिन्न अंग बताया। साथ ही सभी पत्रकारों से मंदिर की गतिविधियों से जुड़े रहने और धर्म एवं संस्कृति के प्रचार-प्रसार में सहयोग करने का आग्रह किया गया।