गोवा क्रांति दिवस पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम

डॉ राम मनोहर लोहिया ने 18 जून 1946 को मडगांव गोवा में पुर्तगाली शासन के खिलाफ पहला नागरिक अवज्ञा आंदोलन शुरू किया था। खुलेआम सभा की और भाषण दिया था ।यह गोवा मुक्ति आंदोलन की पहली चिंगारी थी।यह संपूर्ण भारतवर्ष में फैल गई थी। डॉ राम मनोहर लोहिया को गिरफ्तार कर लिया गया था इस घटना ने लोगों में आजादी की भावना जगा दी थी ।*स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी परिवार समिति के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुनील गोपालदास गुजराती से प्राप्त जानकारी अनुसार आज गोवा स्वतंत्रता में शहीद स्वतंत्रता सेनानीयों को बुरहानपुर में श्रद्धांजलि दी गई। आमजन की जानकारी हेतु,गोवा आजादी के लिए बुरहानपुर से अनेकों सेनानियों ने हिस्सा लिया था। प्रतिवर्ष 18 जून को क्रांति दिवस के रूप में मडगांव गोवा में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को सम्मानित किया जाता है। गोवा आजादी में जुलाई – अगस्त 1955 में सैकड़ों लोगों ने अपने प्राण गंवाए हैं ।पुर्तगाली शासन के दौरान 1510-से 1961 तक 451 वर्ष में गोवा के स्वतंत्रता सेनानियों को बहुत बर्बर यातनाएं दी गईं।पुर्तगालियो द्वारा गोवा के *आग्वाद फोर्ट* में स्वतंत्रता सेनानियों को कैद कर दिया जाता था यह कुख्यात जेल था। इसे “गोवा का काला पानी” कहते थे।, – 4×4 फीट की अंधेरी कालकोठरी में महीनों बंद रखते। न रोशनी, न हवा।,-हफ्तों तक खाने के नाम पर सिर्फ सूखी रोटी और पानी। कई सेनानी भूख से मर गए।,-24 घंटे हाथ-पैर में लोहे की मोटी बेड़ियों से जकड़े रखना। चलना-फिरना नामुमकिन।,-पीठ पर चमड़े के कोड़े तब तक मारते रहना जब तक खाल उधड़ न जाए। बाद में इस पर घाव पर नमक-मिर्च छिड़कना,-उल्टा लटकाना पैर ऊपर सिर नीचे करके घंटों लटकाते थे।,- नाखून खींच लेते थे ताकि सूचना उगलवाएं।, -गुप्तांगों पर बिजली के तार लगाकर झटके देकर टॉर्चर। इसके अतिरिक्त मानसिक यातनाएं भी जाती थी -बीवी-बच्चों को सामने लाकर मारने की धमकी देते।- अगर किसी गांव से सेनानी निकलता, तो पूरा गांव जला देते। 13 जून 1955 को जगन्नाथ राव जोशी के नेतृत्व में 3000 के करीब सेनानियों के पात्रादेवी गांव से गोवा सीमा में प्रवेश के कारण पुर्तगाली पुलिस द्वारा गांव में आग लगा दी गई थी ,*यातनाओं का मकसद*पुर्तगाली डर पैदा करना चाहते थे ताकि कोई आजादी की बात न करे। लेकिन इन यातनाओं से आंदोलन और भड़क गया था।गोवा में आग्वाद जेल म्यूजियम में प्रतिवर्ष 18 जून को बलिदानी स्वतंत्रता सेनानियों को शासकीय समारोह में विशेष श्रद्धांजलि दी जाती है।*19 दिसम्बर 1961 को भारतीय सेना ने “”आपरेशन विजय” के तहत गोवा आजाद कराया है।